return to news
  1. Rice Stocks: ईरान के ट्रेड पार्टनर्स पर ट्रंप का 25% टैरिफ, राइस एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर क्या हो सकता है असर?

मार्केट न्यूज़

Rice Stocks: ईरान के ट्रेड पार्टनर्स पर ट्रंप का 25% टैरिफ, राइस एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर क्या हो सकता है असर?

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 13, 2026, 11:20 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

Rice Stocks: डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि टैरिफ का यह आदेश तुरंत लागू होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। टैरिफ का मतलब है कि अमेरिका में उन देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स देना होगा, जो ईरान से व्यापार करते हैं। भारत भी ईरान के बड़े ट्रेड पार्टनर्स में शामिल है।

Rice Stocks

Rice Stocks: ईरान भारत से बासमती चावल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।

Rice Stocks: ईरान को चावल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के शेयर आज 13 जनवरी को फोकस में हैं। इनमें KRBL Ltd, LT Foods, Kohinoor Foods, और GRM Overseas जैसे शेयर शामिल हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ऐलान किया कि जो भी देश ईरान के साथ ट्रेड करेंगे, उन्हें अमेरिका के साथ ट्रेड पर 25% टैरिफ देना होगा। निवेशकों को डर है कि इस फैसले का इन कंपनियों के कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट लिखे जाने के समय इन कंपनियों के शेयर हरे निशान पर ट्रेड कर रहे थे।
Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

KRBL के शेयरों में आज 0.66 फीसदी की बढ़त है और यह स्टॉक BSE पर 358.90 रुपये प्रति शेयर के भाव पर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा LT Foods के शेयरों में 0.44 फीसदी और GRM Overseas के शेयरों में 1.87 फीसी की तेजी नजर आई। हालांकि, Kohinoor के शेयरों में 0.20 की कमजोरी है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि टैरिफ का यह आदेश तुरंत लागू होगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। टैरिफ का मतलब है कि अमेरिका में उन देशों से आने वाले सामान पर ज्यादा टैक्स देना होगा, जो ईरान से व्यापार करते हैं। भारत भी ईरान के बड़े ट्रेड पार्टनर्स में शामिल है, इसलिए भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। वैसे भी ईरान पर अमेरिका की पाबंदियां पहले से लगी हुई हैं और अब हालात और मुश्किल होते दिख रहे हैं।

ईरान के सामने कई मुश्किलें

ईरान की आर्थिक हालत भी काफी खराब हो गई है। ईरान की मुद्रा रियाल बुरी तरह गिर चुकी है और अब लगभग 13 लाख रियाल में एक अमेरिकी डॉलर मिल रहा है। इसकी वजह से वहां महंगाई बढ़ गई है और विदेशी मुद्रा की भारी कमी हो गई है। ईरानी सरकार ने खाने-पीने की चीजों पर दी जाने वाली सब्सिडी भी हटा ली है, जिससे वहां के आयातक भारतीय चावल के भुगतान में देरी कर रहे हैं।

भारत पर क्या हो सकता है असर?

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के मुताबिक पेमेंट अटकने की वजह से भारत के बड़े बंदरगाहों जैसे कांडला और मुंद्रा पर करीब 2000 करोड़ रुपये के बासमती चावल के कंसाइनमेंट फंसे हुए हैं। इस संकट का असर खास तौर पर पंजाब और हरियाणा के किसानों, मिलर्स और निर्यातकों पर पड़ सकता है। कई एक्सपोर्टर्स ने अब नए शिपमेंट रोक दिए हैं ताकि भुगतान न मिलने का जोखिम न उठाना पड़े।

भारत से बासमती चावल खरीदता है ईरान

ईरान भारत से बासमती चावल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। हर साल वह करीब 12 लाख टन बासमती चावल आयात करता है, जिसकी कीमत 12000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ईरान में खास तौर पर सैला यानी पारबॉयल्ड बासमती चावल की मांग ज्यादा रहती है। अगर यह संकट लंबा चलता है, तो भारत के कुल बासमती चावल निर्यात में इस साल 10 से 15 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।

पाकिस्तान जैसे देश अब नए बासमती वेरायटी के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए जरूरी हो गया है कि वे नए बाजार तलाशें। यूरोप जैसे इलाकों में बासमती चावल की मांग बढ़ रही है, जहां ध्यान देकर भारत ईरान पर अपनी निर्भरता धीरे-धीरे कम कर सकता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
SIP
टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
promotion image

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख