मार्केट न्यूज़
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4 min read | अपडेटेड April 06, 2026, 14:23 IST
सारांश
देश के प्रमुख सरकारी बैंकों ने चौथी तिमाही के बिजनेस अपडेट जारी कर दिए हैं। बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने कर्ज देने के मामले में 20.3 पर्सेट की सबसे तेज ग्रोथ दर्ज की है। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सरकारी बॉन्ड की ऊंची यील्ड ने बैंकों के मुनाफे और भविष्य की क्रेडिट ग्रोथ पर दबाव बना दिया है।

चौथी तिमाही में पीएसयू बैंकों के ग्रॉस एडवांस और डिपॉजिट में अच्छी बढ़त देखी गई है।
देश के सरकारी बैंकों यानी पीएसयू बैंकों के लिए पिछला कुछ समय काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पिछले कुछ दिनों में बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र जैसे बड़े बैंकों ने अपनी चौथी तिमाही के बिजनेस अपडेट जारी किए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ज्यादातर सरकारी बैंकों ने कर्ज देने और जमा राशि जुटाने के मामले में शानदार प्रदर्शन किया है। इन खबरों के बाद निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.3 पर्सेट की इंट्राडे बढ़त भी देखी गई, जिसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में 2 से 4 पर्सेट की तेजी आई। हालांकि, यह बढ़त उस समय आई है जब पिछले महीने ही मुनाफे की वसूली और बॉन्ड यील्ड बढ़ने की वजह से यह इंडेक्स करीब 20 पर्सेट तक टूट चुका था।
चौथी तिमाही के बिजनेस अपडेट में बैंक ऑफ महाराष्ट्र का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। इस बैंक ने अपने ग्रॉस एडवांस यानी कर्ज देने के मामले में सालाना आधार पर 20.3 पर्सेट की जोरदार ग्रोथ दर्ज की है, जो अब 3.98 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। बैंक की कुल जमा राशि भी 14 पर्सेट बढ़कर 3.50 लाख करोड़ रुपये हो गई है। लगभग 50,248 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाले इस बैंक ने ग्रोथ के मामले में बड़े बैंकों को भी पीछे छोड़ दिया है। इसी तरह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने भी 18.9 पर्सेट की शानदार क्रेडिट ग्रोथ दिखाई है, जबकि पंजाब एंड सिंध बैंक ने 18.3 पर्सेट की बढ़त दर्ज की है।
बड़े बैंकों की बात करें तो बैंक ऑफ बड़ौदा ने 15.3 पर्सेट की ग्रोथ के साथ 22.5 लाख करोड़ रुपये का ग्रॉस एडवांस हासिल किया है। इसकी कुल जमा राशि 27.1 लाख करोड़ रुपये रही है। पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी ने भी 12.5 पर्सेट की क्रेडिट ग्रोथ दिखाई है और इसकी कुल जमा राशि 30.7 लाख करोड़ रुपये के शानदार लेवल पर पहुंच गई है। हालांकि, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में इस साल अब तक यानी YTD आधार पर क्रमशः 15.1 पर्सेट और 13.9 पर्सेट की गिरावट देखी गई है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 6.1 पर्सेट की क्रेडिट ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन इसके शेयर ने इस साल अब तक 12.5 पर्सेट का पॉजिटिव रिटर्न दिया है।
भले ही बैंकों के बिजनेस के आंकड़े मजबूत दिख रहे हों, लेकिन कुछ बाहरी कारण बैंकों की सेहत बिगाड़ सकते हैं। भारत के 10 साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.1 पर्सेट के पास पहुंच गई है, जो मई 2024 के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है। इसका कारण मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर के पार जाना है। सरकारी बैंक अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा सरकारी बॉन्ड में रखते हैं। जब बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो बॉन्ड की कीमतें गिर जाती हैं। इससे बैंकों को अपने पोर्टफोलियो पर मार्क-टू-मार्केट यानी MTM घाटा होता है, जिसका सीधा असर उनके ट्रेजरी इनकम और नेट प्रॉफिट पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को महंगाई के डर में डाल दिया है। तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल घरेलू आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है, बल्कि बैंकों की कर्ज की मांग यानी क्रेडिट ग्रोथ पर भी बुरा असर पड़ सकता है। अगर महंगाई को काबू में करने के लिए आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, तो लोग कर्ज लेने से बचेंगे, जिससे बैंकों का बिजनेस प्रभावित होगा। निवेशकों को अब इस हफ्ते आने वाले आरबीआई के ब्याज दरों पर फैसले और उनकी कमेंट्री का इंतजार है, जिससे बैंकिंग सेक्टर की आगे की दिशा तय होगी।
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