मार्केट न्यूज़
.png)
4 min read | अपडेटेड January 05, 2026, 02:09 IST
सारांश
साल 2026 के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार ने रिकॉर्ड तोड़ बढ़त बनाई है। निफ्टी ने अपनी नई ऊंचाइयों को छुआ है जिससे निवेशकों में उत्साह है। हालांकि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी आने वाले समय में बाजार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

कैसा रहेगा बाजार का हाल?
भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 का आगाज किसी बड़े उत्सव से कम नहीं रहा है। दलाल स्ट्रीट पर नए साल के पहले ही हफ्ते में निवेशकों के चेहरों पर जो चमक देखी गई है वह संकेत दे रही है कि यह साल काफी शानदार रहने वाला है। जब पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी तब भारतीय बाजार चुपचाप नई ऊंचाई पर पहुंचने की तैयारी कर रहा था। शुक्रवार 2 जनवरी 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है। इसी दिन निफ्टी ने नया लाइफ हाई बनाया। हालांकि इस भारी बढ़त के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इस लेवल को बनाए रखने की है।
बीते शुक्रवार को बाजार में जो खरीदारी देखी गई वह किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं थी, बल्कि हर तरफ निवेशक पैसा लगा रहे थे। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी ने कारोबार के दौरान 26,340 का ऐतिहासिक लेवल छुआ और आखिर में 182 पॉइंट की बढ़त के साथ 26,328 पर बंद हुआ। यह पहली बार है जब निफ्टी ने इतनी ऊंची छलांग लगाई है। सिर्फ निफ्टी ही नहीं बल्कि बैंकिंग सेक्टर के शेयरों ने भी कमाल कर दिया है। बैंक निफ्टी पहली बार 60,150 के पार जाकर बंद हुआ है जो बैंकिंग सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है। वहीं सेंसेक्स भी 573 पॉइंट उछलकर 85,762 पर पहुंच गया है। इस तेजी में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने भी बराबर का साथ दिया जिससे छोटे निवेशकों को भी बड़ा फायदा हुआ है।
बाजार की इस ऐतिहासिक तेजी के बीच वैश्विक मोर्चे से कुछ डराने वाली खबरें भी आ रही हैं। अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला पर किए गए सैन्य हमलों ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सैन्य कार्रवाई को स्वीकार किया है जिससे तनाव और बढ़ गया है। जब भी दुनिया के किसी हिस्से में ऐसा संघर्ष शुरू होता है तो उसका सबसे पहला असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है। वेनेजुएला दुनिया का एक बड़ा तेल उत्पादक देश है और वहां के हालात बिगड़ने से तेल की सप्लाई रुक सकती है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हमारे बाजार का मूड बिगाड़ सकती हैं और महंगाई बढ़ा सकती हैं।
इस हफ्ते से कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन भी शुरू हो रहा है जो बाजार की अगली दिशा तय करेगा। 12 जनवरी से टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां अपनी कमाई का ब्योरा पेश करेंगी। इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ अहम आंकड़े जैसे जीडीपी ग्रोथ और बैंकों की लोन ग्रोथ के डेटा भी इसी हफ्ते जारी होने वाले हैं। देश में व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार की स्थिति बताने वाले पीएमआई के आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। अगर ये घरेलू आंकड़े उम्मीद के मुताबिक सकारात्मक रहे तो बाजार की तेजी को और मजबूती मिलेगी।
एक तरफ जहां शेयर बाजार ऊपर जा रहा है वहीं रुपये की कमजोरी चिंता का विषय बनी हुई है। इतिहास में पहली बार भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के पार चला गया है और 90.20 पर बंद हुआ है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक परिस्थितियों के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है जो आयात करने वाली कंपनियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। कमोडिटी बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखा जा रहा है। सोना 1,36,900 रुपये और चांदी 2,36,316 रुपये के पास पहुंच गई है। धातुओं की बढ़ती डिमांड की वजह से टाटा स्टील जैसी कंपनियों के शेयरों में आने वाले दिनों में और तेजी देखी जा सकती है। निवेशकों को इन सभी फैक्टर्स को ध्यान में रखकर ही अपनी रणनीति बनानी चाहिए।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख