मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड March 01, 2026, 13:26 IST
सारांश
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग का सीधा असर आपके निवेश पर पड़ सकता है। सोमवार को जब बाजार खुलेगा तो सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की सप्लाई रुकने से भारत की इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ सकता है।

ईरान पर हुए हमले के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट का खतरा बढ़ गया है।
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग की वजह से दुनिया भर के देशों में खलबली मच गई है। शनिवार सुबह अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़ा सैन्य हमला कर दिया। इस हमले के बाद अब सबकी नजरें 2 मार्च को खुलने वाले भारतीय शेयर बाजार पर टिकी हैं। जानकारों का कहना है कि जब सोमवार को बाजार में ट्रेडिंग शुरू होगी, तो निवेशकों के सेंटिमेंट पर इस तनाव का भारी असर देखने को मिल सकता है। ईरान में हुए धमाकों की गूंज दलाल स्ट्रीट तक सुनाई देने वाली है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट की आशंका बनी हुई है।
अमेरिका और इजरायल ने शनिवार तड़के ईरान के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। दोनों देशों का कहना है कि उन्होंने ईरान के सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर क्षमताओं को निशाना बनाया है। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में साफ कहा है कि वाशिंगटन ने ईरान में बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं। ट्रंप का कहना है कि यह कदम ईरान की तरफ से मिलने वाली धमकियों को खत्म करने और उसे न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोकने के लिए उठाया गया है। वहीं इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।
शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट के हालात ऐसे ही बने रहे, तो सोमवार को बाजार खुलते ही इसमें भारी गिरावट आ सकती है। आने वाला पूरा हफ्ता बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव वाला रहने वाला है। एक तरफ जहां जंग का तनाव है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में आने वाले बड़े डेटा भी बाजार की चाल तय करेंगे। अगर जंग रोकने की कोई कोशिश सफल होती है, तभी बाजार में कुछ राहत की उम्मीद की जा सकती है। वरना फिलहाल निवेशकों के लिए हालात काफी मुश्किल नजर आ रहे हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतें हैं। अगर ईरान और अमेरिका के बीच यह जंग और बढ़ती है, तो तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ेगा। सबसे बड़ा खतरा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को लेकर है, जहां से दुनिया का करीब 20 परसेंट तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां से जहाजों को घूमकर जाना पड़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 50 परसेंट तेल और 60 परसेंट एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ऐसे में तेल महंगा होने से भारत की पूरी इकोनॉमी और कंपनियों के ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर दबाव बढ़ जाएगा।
पिछले कुछ हफ्तों से भारतीय बाजार वैसे ही काफी दबाव में चल रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी अपनी पुरानी ऊंचाई को पार करने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों का डर और एआई सेक्टर में वैल्युएशन को लेकर चिंताएं पहले से ही बाजार को परेशान कर रही थीं। अब इस नई जंग ने आग में घी डालने का काम किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल बाजार में रिस्क काफी ज्यादा है और निवेशकों को कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले ग्लोबल हालात को अच्छे से समझ लेना चाहिए। आने वाले समय में कंपनियों के नेट प्रॉफिट और रेवेन्यू पर भी इसका असर दिख सकता है।
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