मार्केट न्यूज़

4 min read | अपडेटेड December 28, 2025, 16:13 IST
सारांश
पिछला हफ्ता शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सुस्ती भरा रहा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। मुनाफावसूली के कारण बाजार में दबाव दिखा। अब सबकी नजरें अगले हफ्ते आने वाले औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों और अमेरिकी फेड रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स पर टिकी हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।

भारतीय शेयर बाजार में बीते हफ्ते बिकवाली का दौर रहा है।
शेयर बाजार में पिछला हफ्ता निवेशकों के लिए थोड़ा थका देने वाला रहा। बाजार में वह जोश और उमंग नहीं दिखी जिसकी उम्मीद की जा रही थी और अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में बंद हुए। असल में बाजार में फिलहाल कोई नया और बड़ा कारण नजर नहीं आ रहा है जिसकी वजह से निवेशक अब मुनाफावसूली करना ज्यादा सही समझ रहे हैं। अब बड़ा सवाल ये है कि नए साल के जश्न से पहले क्या यह सुस्ती बनी रहेगी या फिर बाजार में कोई बड़ी रिकवरी दिखेगी? यह सब कुछ अगले हफ्ते आने वाले कुछ बड़े घरेलू और ग्लोबल संकेतों पर टिका है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल किस तरफ मुड़ सकती है।
शुक्रवार को जब बाजार बंद हुआ तब माहौल थोड़ा फीका नजर आया। सेंसेक्स करीब 367 अंक टूटकर 85,041 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी भी 100 अंकों की गिरावट के साथ 26,042 पर बंद हुआ। इस गिरावट में सिर्फ बड़े शेयर ही शामिल नहीं थे बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी दबाव देखा गया। जानकारों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मिले-जुले संकेतों और निवेशकों की सावधानी की वजह से बाजार में यह गिरावट देखने को मिली है। जब तक बाजार को कोई ठोस सहारा नहीं मिलता तब तक ऐसी उठापटक जारी रह सकती है। निवेशक अभी किसी भी बड़े दांव को खेलने से पहले थोड़ा रुकना पसंद कर रहे हैं।
बाजार के एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी के लिए 26,000 से 25,800 का इलाका बहुत अहम है। जब तक निफ्टी इस स्तर के ऊपर बना हुआ है तब तक घबराने वाली कोई बात नहीं है और बाजार का भरोसा बना रह सकता है। अगर ऊपर की तरफ बात करें तो 26,200 के पास निफ्टी को पहली रुकावट मिल सकती है। इसे पार करने के बाद अगला लक्ष्य 26,500 का हो सकता है। निवेशकों को बहुत संभलकर रहने की जरूरत है क्योंकि अगर निफ्टी 25,800 के नीचे चला गया तो बाजार में बिकवाली का दबाव काफी ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में छोटे निवेशकों को हड़बड़ी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए।
अगले हफ्ते भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा घरेलू संकेत 29 दिसंबर को आने वाला है। इस दिन नवंबर 2025 के औद्योगिक उत्पादन यानी आईआईपी के आंकड़े पेश किए जाएंगे। यह डेटा हमें बताएगा कि हमारे देश की फैक्ट्रियों और उद्योगों में किस तरह की तरक्की हो रही है। निवेशक इस डेटा का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह हमारी अर्थव्यवस्था की सेहत का असली आईना होता है। इसके अलावा 31 दिसंबर को अमेरिका से भी एक बड़ी खबर आएगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी पिछली मीटिंग के मिनट्स जारी करेगा, जिससे आगे की रणनीति का पता चलेगा।
दिसंबर की मीटिंग में फेड ने ब्याज दरों में 0.25 परसेंट की कटौती की थी, जिससे दरें 3.75 परसेंट पर आ गई हैं। अब निवेशक उन मिनट्स में यह जानने की कोशिश करेंगे कि आने वाले समय में ब्याज दरें और कितनी कम हो सकती हैं और महंगाई को लेकर फेड की क्या सोच है। दुनिया भर के बाजारों की चाल इसी खबर से तय होगी। इसके साथ ही भारतीय रुपये की कमजोरी भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 89.90 के स्तर पर बंद हुआ। रुपये के गिरने का सीधा असर विदेशी निवेशकों के निवेश पर पड़ता है। अगर रुपया और ज्यादा कमजोर होता है तो विदेशी फंड्स बाजार से पैसा निकाल सकते हैं जो शेयर बाजार के लिए अच्छा नहीं होगा।
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