return to news
  1. क्यों गिर रहा है रुपया और आम लोगों पर इसका क्या हो सकता है असर?

मार्केट न्यूज़

क्यों गिर रहा है रुपया और आम लोगों पर इसका क्या हो सकता है असर?

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 23, 2026, 12:50 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आज Brent crude करीब 1.07 फीसदी बढ़कर 107.15 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है। तेल का लेन-देन डॉलर में होता है। ऐसे में डॉलर की वैल्यू बढ़ती है और रुपये की वैल्यू गिरती है।

rupee

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा लगातार निकाल रहे हैं।

रुपये (Rupee) ने आज डॉलर के मुकाबले एक बार फिर रिकॉर्ड निचले स्तर को छू लिया। 23 मार्च को रुपया 10 पैसे गिरकर ₹93.84 प्रति डॉलर पर खुला, जो अब तक का रिकॉर्ड लो है। इसके पहले 20 मार्च को रुपया एक ही दिन में करीब 1 रुपये गिर गया था, जो पिछले 4 साल में सबसे बड़ी गिरावट है। इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध है। इस तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। चूंकि भारत तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल मतलब ज्यादा डॉलर की जरूरत, जिससे रुपया और कमजोर होता है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

रुपया गिरने के मुख्य कारण

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज लगभग बंद

इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज अभी भी लगभग बंद है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटल दिया है। ट्रंप का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को नहीं खोला गया तो वह ईरान का पावर प्लांट्स नष्ट कर देंगे। ईरान ने भी इसका जवाब देते हुए कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वे पूरे मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगियों से जुड़े ऊर्जा और पानी के नेटवर्क को नष्ट कर देंगे। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को भी पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आज Brent crude करीब 1.07 फीसदी बढ़कर 107.15 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ गया है। तेल का लेन-देन डॉलर में होता है। ऐसे में डॉलर की वैल्यू बढ़ती है और रुपये की वैल्यू गिरती है।

विदेशी निवेशकों की निकासी

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा लगातार निकाल रहे हैं। FII भारत में डॉलर लेकर आते हैं और उन्हें रुपये में बदलकर शेयर खरीदते हैं। जब रुपया कमजोर होता है, तो उनके निवेश की वैल्यू डॉलर के मुकाबले कम हो जाती है। यानी उनको करेंसी लॉस होता है। इससे बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है।

आम लोगों पर होने वाले असर

रुपये की इस गिरावट का आपकी जेब पर सीधा और गहरा असर पड़ सकता है। कच्चा तेल महंगा होने देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। रुपया कमजोर होने से तेल महंगा होगा, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी और सब्जियां, दालें और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे।

इसके अलावा स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और कारों के पुर्जे बाहर से मंगाए जाते हैं। कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ने से इनके दाम भी बढ़ सकते हैं।अगर आपके बच्चे बाहर पढ़ रहे हैं, तो अब आपको उतनी ही फीस के लिए ज्यादा रुपये चुकाने होंगे। इसी तरह, विदेश घूमना भी काफी खर्चीला हो जाएगा। इसके अलावा बढ़ती महंगाई आपकी बचत करने की क्षमता को कम कर देगी और शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू भी घट सकती है।

अगला लेख