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  1. तो क्या बाजार को मिल गया अमेरिका से बूस्टर डोज? समझिए टैरिफ घटने से भारत के किन सेक्टर्स को होगा फायदा

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तो क्या बाजार को मिल गया अमेरिका से बूस्टर डोज? समझिए टैरिफ घटने से भारत के किन सेक्टर्स को होगा फायदा

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड February 02, 2026, 23:52 IST

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सारांश

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने के बाद बाजार को नई ऊर्जा मिली है। अमेरिकी बाजारों में तेजी के साथ गिफ्ट निफ्टी संकेत दे रहा है कि कल सेंसेक्स और निफ्टी नए रिकॉर्ड हलचल दिख सकती है।

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अमेरिका से आई अच्छी खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में कल हलचल देखने को मिल सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई ऐतिहासिक व्यापार डील ने भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़े 'बूस्टर डोज' का काम किया है। सोमवार को जैसे ही यह खबर आई कि अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, उसका असर वैश्विक संकेतों पर तुरंत दिखने लगा। भारतीय बाजार खुलने से पहले ही गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) में करीब 800 अंकों की जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। यह इस बात का साफ संकेत है कि कल भारतीय बाजार में हलचल दिख सकती है।

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कपड़ा और ज्वैलरी सेक्टर को सबसे बड़ी राहत

इस फैसले का सबसे ज्यादा और सीधा असर उन सेक्टर्स पर पड़ेगा जो अमेरिका को भारी मात्रा में सामान निर्यात करते हैं। पिछले कुछ समय से ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ की वजह से टेक्सटाइल (कपड़ा) और जेम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में थे। इन सेक्टर्स का मार्जिन बहुत कम होता है, इसलिए बढ़ा हुआ टैक्स इनकी कमर तोड़ रहा था। अब टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से इन कंपनियों की सांस में सांस आई है। कल बाजार खुलते ही कपड़ा बनाने वाली कंपनियों और आभूषण निर्यातकों के शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। जानकारों का मानना है कि सूरत और लुधियाना जैसे टेक्सटाइल हब से जुड़ी कंपनियों के लिए यह किसी संजीवनी से कम नहीं है।

आईटी और फार्मा सेक्टर में लौटेगी चमक

भारतीय शेयर बाजार की रीढ़ माने जाने वाले आईटी और फार्मा सेक्टर के लिए भी यह खबर बहुत राहत देने वाली है। अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों और दवा कंपनियों का सबसे बड़ा ग्राहक है। पिछले कुछ महीनों से मंदी की आहट और टैरिफ वॉर के डर से इन सेक्टर्स के शेयरों में सुस्ती देखी जा रही थी। अब जब दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है और पीएम मोदी ने 'बाय अमेरिकन' के तहत तकनीक खरीदने का वादा किया है, तो इससे तकनीकी सहयोग बढ़ेगा। आईटी कंपनियों के क्लाइंट्स अब खुलकर खर्च कर पाएंगे, जिससे आईटी शेयरों में नई तेजी का दौर शुरू होने की पूरी उम्मीद है। इसी तरह जेनरिक दवाओं के निर्यात पर भी अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं।

ऑटो एंसिलरी और एनर्जी सेक्टर पर नजर

इस डील में भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर की ऊर्जा और तकनीक खरीदने का वादा किया है। इसका असर भारतीय एनर्जी सेक्टर और रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों पर भी देखने को मिल सकता है जो ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही हैं। इसके अलावा, भारत से अमेरिका जाने वाले ऑटो पार्ट्स (ऑटो एंसिलरी) पर भी टैरिफ कम होने का फायदा मिलेगा। अमेरिका में भारतीय गाड़ियों के कलपुर्जों की काफी मांग है। टैरिफ कम होने से भारतीय कंपनियां चीन और वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर दे पाएंगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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