मार्केट न्यूज़
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3 min read | अपडेटेड February 23, 2026, 10:51 IST
सारांश
एआई सेक्टर में इनवेस्टमेंट के नए दौर की शुरुआत हो चुकी है। रिलायंस 10 लाख करोड़ और अडानी 100 बिलियन डॉलर खर्च करेंगे। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल भी भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए तैयार हैं। इस समिट के बाद टीसीएस, इंफोसिस और नेटवेब टेक्नोलॉजीज जैसे एआई शेयरों पर निवेशकों की नजर है, जो भविष्य में बड़े मल्टीबैगर बन सकते हैं।

भारत अब ग्लोबल एआई हब बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के सेक्टर में एक नई क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। हाल ही में संपन्न हुए 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' ने पूरी दुनिया के निवेशकों का ध्यान भारत की ओर खींचा है। इस समिट में दुनिया भर की दिग्गज एआई कंपनियों ने हिस्सा लिया और भारत में अरबों डॉलर के इनवेस्टमेंट का भरोसा दिया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत को अगले दो साल में इस सेक्टर में 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इनवेस्टमेंट मिलने की उम्मीद है। यह समिट भारत के डीप टेक इकोसिस्टम को पूरी दुनिया में एक नई पहचान दिलाने वाला साबित हुआ है।
दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में अगले पांच सालों के भीतर 50 बिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट का प्लान बनाया है। यह पैसा एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को खड़ा करने में खर्च किया जाएगा। वहीं गूगल ने भी पीछे न रहते हुए आंध्र प्रदेश में 15 बिलियन डॉलर का एआई हब बनाने और एआई फोर साइंस फंड के लिए 30 मिलियन डॉलर देने का ऐलान किया है। इन कंपनियों का मानना है कि भारत आने वाले समय में ग्लोबल एआई इकोसिस्टम का सबसे मजबूत हिस्सा बनेगा।
भारतीय दिग्गज कंपनियों ने भी एआई की रेस में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज अगले सात सालों में अपने टेलीकॉम आर्म रिलायंस जियो के जरिए एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर 10 लाख करोड़ रुपये खर्च करने वाली है। दूसरी तरफ गौतम अडानी का अडानी ग्रुप भी पीछे नहीं है। अडानी ग्रुप ने साल 2035 तक रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले एआई डेटा सेंटर्स पर 100 बिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट की बात कही है। इन दोनों बड़े ग्रुप के आने से भारत में एआई का आधार बहुत मजबूत होने वाला है।
पिछले एक साल में टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में 25 से 28 पर्सेंट तक की गिरावट देखी गई थी क्योंकि एआई टूल्स से इनके पारंपरिक बिजनेस को खतरा लग रहा था। लेकिन अब इन कंपनियों ने अपनी रणनीति बदल ली है। टीसीएस का एआई सर्विस से रेवेन्यू सालाना 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है और कंपनी ने अब तक 5500 से ज्यादा एआई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। टीसीएस अपनी सब्सिडियरी हाइपरवॉल्ट के जरिए 18,000 करोड़ रुपये का इनवेस्टमेंट कर डेटा सेंटर नेटवर्क भी बना रही है। वहीं इंफोसिस अपने टॉपज ब्रांड के जरिए एआई सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रही है।
सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं बल्कि नेटवेब टेक्नोलॉजीज और ई2ई नेटवर्क्स जैसी मध्यम स्तर की कंपनियां भी एआई के दम पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रही हैं। नेटवेब टेक्नोलॉजीज के रेवेन्यू में इस साल की तीसरी तिमाही में 141 पर्सेंट का भारी उछाल आया है और कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 143 पर्सेंट बढ़ गया है। उनके पास 4270 करोड़ रुपये का ऑर्डर पाइपलाइन तैयार है। इसी तरह ई2ई नेटवर्क्स ने एनवीडिया के साथ मिलकर एआई क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का काम शुरू किया है। अनंत राज जैसी कंपनियां भी डेटा सेंटर बिजनेस में एग्रेसिव इनवेस्टमेंट कर रही हैं और उनका लक्ष्य साल 2031 तक इस बिजनेस से करीब 1 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू हासिल करना है।
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