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4 min read | अपडेटेड February 12, 2026, 12:31 IST
सारांश
हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने दिसंबर तिमाही में 6,603 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 120 परसेंट ज्यादा है। मुनाफे में यह बड़ी बढ़त आइसक्रीम बिजनेस के डीमर्जर से मिले 4,611 करोड़ रुपये के एकमुश्त फायदे की वजह से हुई है। कंपनी का रेवेन्यू भी 5 परसेंट बढ़कर 16,580 करोड़ रुपये रहा।
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HUL के तिमाही नतीजों ने बाजार को चौंकाया, मुनाफे में दिखी जबरदस्त तेजी।
देश की दिग्गज एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने गुरुवार 12 फरवरी को अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी के लिए यह तिमाही मुनाफे के लिहाज से ऐतिहासिक साबित हुई है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 120 परसेंट की भारी बढ़त के साथ 6,603 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी समय कंपनी का नेट प्रॉफिट 2,989 करोड़ रुपये था।
हालांकि इस मुनाफे को देखकर अगर आप बहुत ज्यादा उत्साहित हो रहे हैं, तो रुकिए। मुनाफे में आई यह जादुई तेजी कंपनी के सामान्य कामकाज से नहीं, बल्कि एक बड़े बिजनेस बदलाव की वजह से आई है। कंपनी ने अपने मशहूर आइसक्रीम बिजनेस को अलग किया है, जिससे उसे 4,611 करोड़ रुपये का तगड़ा फायदा हुआ है। यही कारण है कि बैलेंस शीट पर मुनाफे का आंकड़ा इतना बड़ा नजर आ रहा है।
हिंदुस्तान यूनिलीवर ने काफी समय पहले अपने आइसक्रीम बिजनेस यानी क्वालिटी वॉल्स को मुख्य कंपनी से अलग करने का फैसला लिया था। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस डीमर्जर की वजह से कंपनी को जो एकमुश्त फायदा हुआ है, उसने नेट प्रॉफिट के आंकड़ों को आसमान पर पहुंचा दिया है। आने वाले कुछ हफ्तों में क्वालिटी वॉल्स (इंडिया) लिमिटेड शेयर बाजार में अलग से लिस्ट हो सकती है।
कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ प्रिया नायर ने बताया कि आइसक्रीम बिजनेस को अलग करना वैल्यू अनलॉक करने के लिहाज से एक बड़ा कदम है। इससे कंपनी अब अपने कोर बिजनेस पर ज्यादा बेहतर तरीके से फोकस कर पाएगी। हालांकि अगर इस एकमुश्त फायदे को हटाकर देखें, जिसे कोर पीएटी (Core PAT) कहा जाता है, तो उसमें गिरावट आई है। यह पिछले साल के 3,027 करोड़ रुपये से घटकर 2,118 करोड़ रुपये रह गया है।
कंपनी के रेवेन्यू और कामकाज की बात करें तो वहां स्थिति स्थिर बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5 परसेंट बढ़कर 16,580 करोड़ रुपये रहा है। वहीं कंपनी का एबिटा (EBITDA) मामूली तौर पर 3 परसेंट बढ़ा और यह 3,788 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि बढ़ती लागत और कच्चे माल की कीमतों की वजह से एबिटा मार्जिन में हल्की गिरावट आई है। यह पिछले साल के 24.0 परसेंट से गिरकर 23.3 परसेंट पर आ गया है। बाजार के जानकारों ने अनुमान लगाया था कि कंपनी का रेवेन्यू 16,156 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा, जिसे कंपनी ने पार कर लिया है। कंपनी ने यह भी बताया कि जीएसटी दरों में कटौती की वजह से इन्वेंट्री में कुछ रुकावटें आई थीं, जिनका असर अक्टूबर के महीने तक देखने को मिला था।
अलग-अलग सेगमेंट को देखें तो होम केयर बिजनेस अभी भी कंपनी का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है। इस सेगमेंट से रेवेन्यू 3 परसेंट बढ़कर 5,887 करोड़ रुपये रहा। सबसे शानदार ग्रोथ ब्यूटी और वेलबीइंग सेगमेंट में दिखी, जहां रेवेन्यू 11 परसेंट बढ़ा है। पर्सनल केयर सेगमेंट में 1 परसेंट की मामूली बढ़त हुई, जबकि फूड्स सेगमेंट 6 परसेंट की रफ्तार से बढ़ा। कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत करने के लिए कुछ बड़े फैसले भी लिए हैं। HUL अब पोषण ब्रांड ओजीवा (OZiva) में अपनी पूरी हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। वहीं दूसरी तरफ, कंपनी ने अपने खराब प्रदर्शन करने वाले जॉइंट वेंचर न्यूट्रिशनलैब से बाहर निकलने का फैसला किया है। कंपनी की रणनीति अब उन ब्रांड्स पर दांव लगाने की है जो तेजी से बढ़ रहे हैं और जिनमें मुनाफा ज्यादा है।
नतीजे आने के तुरंत बाद शेयर बाजार में HUL के स्टॉक पर दबाव देखने को मिला। खबर लिखे जाने तक बीएसई (BSE) पर कंपनी का शेयर करीब 0.9 परसेंट गिरकर 2440.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था। वहीं दूसरी तरफ बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स में भी 309 अंकों की गिरावट देखी गई। निवेशकों को शायद यह बात ज्यादा पसंद नहीं आई कि कंपनी का कोर मुनाफा कम हुआ है।
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