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  1. HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट, 4 दिन में डूबे 1.34 लाख करोड़, जानें क्या है पूरी वजह?

मार्केट न्यूज़

HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट, 4 दिन में डूबे 1.34 लाख करोड़, जानें क्या है पूरी वजह?

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड March 23, 2026, 11:03 IST

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सारांश

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव है। बैंक ने क्रेडिट सुइस के AT1 बॉन्ड्स की गलत तरीके से बिक्री के आरोप में 3 सीनियर अफसरों को नौकरी से निकाल दिया है। इसके साथ ही चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे ने बैंक के अंदरूनी कामकाज और गवर्नेंस पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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एचडीएफसी बैंक के शेयरों में लगातार गिरावट से बाजार में हड़कंप।

देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंक एचडीएफसी बैंक के लिए पिछला एक हफ्ता किसी बुरे सपने जैसा रहा है। 23 मार्च को बैंक के शेयरों में लगातार चौथे दिन गिरावट देखी गई। पिछले चार कारोबारी सेशन में एचडीएफसी बैंक के शेयर करीब 10.53 पर्सेंट तक टूट चुके हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर बैंक का शेयर गिरकर 756.30 रुपये के इंट्राडे लो तक पहुंच गया। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही शेयरों में 3 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट आई। इस भारी बिकवाली की वजह से बैंक के मार्केट कैप को बड़ा झटका लगा है और निवेशकों के करीब 1.34 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए हैं। बैंक का कुल मार्केट कैप अब घटकर 11.63 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है।

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क्या है मुख्य वजह?

बैंक के शेयरों में आई इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह बैंक के अंदरूनी कामकाज को लेकर आई एक चौंकाने वाली खबर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक ने अपने तीन बहुत सीनियर अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से पद से हटा दिया है। इन अधिकारियों पर क्रेडिट सुइस के एडिशनल टायर 1 (AT1) बॉन्ड्स को गलत तरीके से बेचने यानी मिसेलिंग का गंभीर आरोप लगा है। जिन अधिकारियों की छुट्टी की गई है, उनमें ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड संपत कुमार, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका बिजनेस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हर्ष गुप्ता और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पायल मंध्यान शामिल हैं। बताया जा रहा है कि बैंक अपनी दुबई ब्रांच से इन हाई-रिस्क बॉन्ड्स की बिक्री में हुई गड़बड़ी की जांच कर रहा है।

चेयरमैन के इस्तीफे ने बढ़ाई चिंता

बैंक में संकट की शुरुआत कुछ दिन पहले ही हो गई थी, जब इसके नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे "वैल्यूज और एथिक्स" यानी मूल्यों और नैतिकता के मतभेदों का हवाला दिया था। यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक का कोई चेयरमैन कार्यकाल के बीच में ही पद छोड़कर गया है, जिससे बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। उनकी जगह केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया है। मिस्त्री ने हालांकि कहा है कि यह मामला लीडरशिप के बीच आपसी तालमेल की कमी का हो सकता है और बैंक का ऑपरेशन पूरी तरह स्थिर है, लेकिन निवेशक इस स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।

क्या होते हैं AT1 बॉन्ड्स?

मार्केट में मचे इस बवाल के केंद्र में AT1 बॉन्ड्स हैं। एडिशनल टायर 1 (AT1) बॉन्ड एक तरह के ऊंचे मुनाफे वाले कर्ज के इंस्ट्रूमेंट होते हैं, जिन्हें बैंक अपनी पूंजी बढ़ाने के लिए जारी करते हैं। इन बॉन्ड्स की कोई फिक्स्ड मैच्योरिटी तारीख नहीं होती, यानी बैंक जब चाहे इन्हें वापस ले सकता है या इन्हें जारी रख सकता है। ये बॉन्ड्स काफी रिस्की माने जाते हैं क्योंकि अगर बैंक की आर्थिक हालत खराब होती है, तो इन बॉन्ड्स की वैल्यू को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या इन्हें इक्विटी में बदला जा सकता है। निवेशकों का आरोप है कि उन्हें इन खतरों के बारे में पूरी जानकारी दिए बिना ही ये बॉन्ड्स बेचे गए। सोमवार को सुबह के कारोबार में एचडीएफसी बैंक का शेयर 2.11 पर्सेंट गिरकर 764 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। दिलचस्प बात यह है कि बैंक का प्रदर्शन निफ्टी 50 इंडेक्स के मुकाबले काफी खराब रहा है। जहां निफ्टी 1.66 पर्सेंट नीचे था, वहीं एचडीएफसी बैंक में गिरावट उससे कहीं ज्यादा रही।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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