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FPI ने भारतीय बाजार से जनवरी में 36000 करोड़ रुपये निकाले, आगे STT से जोखिम

Upstox

2 min read | अपडेटेड February 02, 2026, 18:43 IST

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सारांश

FPI: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट भाषण में वायदा पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत तथा विकल्प प्रीमियम एवं विकल्प सौदों पर एसटीटी को क्रमशः 0.10 प्रतिशत एवं 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।

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FPI ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 36000 करोड़ रुपये (लगभग 3.97 अरब डॉलर) की निकासी की।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली का सिलसिला जनवरी में भी जारी रहा। उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से करीब 36000 करोड़ रुपये (लगभग 3.97 अरब डॉलर) की निकासी की। इस बीच, फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) खंड में सौदों पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने की बजट घोषणा से निकट भविष्य में विदेशी निवेशकों की भागीदारी पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

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35962 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जनवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार से 35962 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। FPI ने इससे पहले वर्ष 2025 में भी भारतीय बाजार से करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये (18.9 अरब डॉलर) की रिकॉर्ड निकासी की थी। उस समय अस्थिर मुद्रा बाजार, वैश्विक व्यापार तनाव, संभावित अमेरिकी शुल्क और ऊंचे बाजार मूल्यांकन ने विदेशी पूंजी को प्रभावित किया था।

कितना बढ़ाया गया है STT

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट भाषण में वायदा पर एसटीटी को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत तथा विकल्प प्रीमियम एवं विकल्प सौदों पर एसटीटी को क्रमशः 0.10 प्रतिशत एवं 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह ने कहा कि एफएंडओ में एसटीटी का बढ़ना निकट अवधि में खासकर अत्यधिक तेजी और डेरिवेटिव-केंद्रित वैश्विक कोषों के लिए एफपीआई प्रवाह के लिए हल्का नकारात्मक कारक बन सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘STT बढ़ोतरी से टैक्स कलेक्शन बढ़ सकता है, लेकिन इससे सौदों की मात्रा प्रभावित होने और रणनीतिक FPI भागीदारी धीमी होने का जोखिम है। टिकाऊ FPI प्रवाह के लिए निवेशक सिर्फ वृद्धि संभावनाओं के बजाय व्यापक स्थिरता, रुपये की चाल और कर नीति में निरंतरता पर अधिक ध्यान देंगे।’’

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख एवं शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि विकसित बाजारों में ऊंची ब्याज दरें, मजबूत डॉलर और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते उभरते बाजारों के प्रति जोखिम लेने की क्षमता घटी है। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर कंपनियों के नतीजों के मिले-जुले रुझान और बजट जैसी प्रमुख घटनाओं को लेकर सतर्कता ने भी विदेशी निवेशकों को सजग बनाए रखा।

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टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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