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IPO Rules: वित्त मंत्रालय ने IPO लाने वाली कंपनियों के लिए बदल डाले अहम नियम, यहां समझें डीटेल में

Upstox

3 min read | अपडेटेड March 16, 2026, 07:43 IST

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सारांश

इस महीने की 13 तारीख को अधिसूचित प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के अनुसार, जिन कंपनियों की इश्यू के बाद की पूंजी 1,600 करोड़ रुपये से अधिक और 5,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें लिस्ट होने के तीन साल के अंदर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25% करनी होगी।

IPO नियम

वित्त मंत्रालय ने आईपीओ लाने वाली कंपनियों के लिए सार्वजनिक निर्गम नियमों में संशोधन किया

वित्त मंत्रालय ने शेयर बाजारों में लिस्ट होने वाली कंपनियों के मिनिमम पब्लिक इश्यू से संबंधित नियमों में संशोधन किया है और इसे इश्यू के बाद की कैपिटल से जोड़ दिया है। इस महीने की 13 तारीख को अधिसूचित प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के अनुसार, जिन कंपनियों की इश्यू के बाद की पूंजी 1,600 करोड़ रुपये से अधिक और 5,000 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें लिस्ट होने के तीन साल के अंदर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25% करनी होगी। ऐसा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा तय तरीके से किया जाएगा। नियमों में आगे कहा गया है कि निर्गम के बाद की सीमा चाहे कुछ भी हो, लिस्ट होने के समय प्रतिभूतियों के प्रत्येक वर्ग का कम से कम 2.5% हिस्सा सार्वजनिक रूप से पेश किया जाना चाहिए।

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डीटेल में समझें नियम में हुए बदलाव को

संशोधन के अनुसार, अगर किसी कंपनी के इश्यू के बाद उसक कैपिटल 1,600 करोड़ रुपये तक है, तो कंपनी द्वारा जारी किए गए प्रत्येक वर्ग के इक्विटी शेयरों या परिवर्तनीय ऋण पत्र (Convertible debentures) का कम से कम 25% हिस्सा सार्वजनिक रूप से पेश करना अनिवार्य होगा। अगर यह कैपिटल 1,600 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 4,000 करोड़ रुपये से कम है, तो कंपनी को 4,000 करोड़ रुपये के बराबर शेयर पेश करने होंगे।

जिन कंपनियों की निर्गम के बाद का कैपिटल 4,000 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन 5,000 करोड़ रुपये के बराबर या उससे कम है, उनके लिए सार्वजनिक पेशकश कंपनी द्वारा जारी इक्विटी शेयरों या कन्वर्टिबल डिबेंचर के प्रत्येक वर्ग का कम से कम 10 करोड़ होना चाहिए। वहीं, 5,000 करोड़ रुपये से अधिक लेकिन एक लाख करोड़ रुपये से कम या उसके बराबर के कैपिटल वाली कंपनियों को 1,000 करोड़ रुपये के बराबर शेयर और प्रत्येक वर्ग के कम से कम 8% शेयर जनता को देने होंगे। इन कंपनियों को लिस्ट होने के पांच साल के भीतर अपनी सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 25% करनी होगी।

ऐसा नहीं करने पर क्या होगा?

इसी तरह निर्गम के बाद पांच लाख रुपये से अधिक के कैपिटल वाली कंपनी को कम से कम 1,500 करोड़ रुपये के शेयरों के बराबर और उनके द्वारा जारी किए जाने वाले प्रत्येक वर्ग के शेयरों या परिवर्तनीय डिबेंचर के कम से कम 1% बराबर शेयर जारी करने होंगे। ये नियम पंजीकृत शेयर बाजारों को संशोधित नियमों के लागू होने से पहले के सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के गैर-अनु़पालन के लिए जुर्माना लगाने की अनुमति देते हैं।

PTI इनपुट के साथ

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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