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FII Selling: जुलाई 2025 से अब तक FIIs ने बेचे ₹2.20 लाख करोड़ के शेयर, आखिर क्यों हुआ विदेशी निवेशकों का मोहभंग

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 23, 2026, 15:07 IST

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सारांश

FII Selling: भारतीय बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली है। जुलाई 2025 से FIIs लगातार भारतीय शेयर बेच रहे हैं। इस दौरान वे अब तक करीब ₹2.20 लाख करोड़ की इक्विटी बेच चुके हैं।

FII Selling

FII Selling: एक समय था जब FIIs भारतीय शेयर बाजार की तेजी की रीढ़ माने जाते थे।

FII Selling: नए साल की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छी नहीं रही है। जनवरी में अब तक निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 3% से ज़्यादा गिर चुके हैं। इसकी कई वजहें हैं। भू-राजनीतिक तनाव, कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे, भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी और अमेरिका की तरफ से नए टैरिफ की धमकी। इन सबने मिलकर बाजार में बिकवाली का माहौल बना दिया है।
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FII की लगातार बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

भारतीय बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली है। जुलाई 2025 से FIIs लगातार भारतीय शेयर बेच रहे हैं। इस दौरान वे अब तक करीब ₹2.20 लाख करोड़ की इक्विटी बेच चुके हैं। सिर्फ जनवरी महीने में ही (22 जनवरी तक) FIIs ने ₹36591 करोड़ के शेयर बेच दिए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

पहले बाजार की ताकत थे, अब सतर्क हो गए FIIs

एक समय था जब FIIs भारतीय शेयर बाजार की तेजी की रीढ़ माने जाते थे। लेकिन 2025 में तस्वीर बदल गई। उस साल 12 में से 8 महीनों में FIIs नेट सेलर रहे और पूरे साल में उन्होंने रिकॉर्ड $18.4 अरब की इक्विटी बेच दी। इसका असर यह हुआ कि निफ्टी 50 कंपनियों में FII की हिस्सेदारी घटकर 13 साल के निचले स्तर 24.1% पर आ गई। FIIs की बिकवाली के साथ-साथ बाजार में गिरावट भी तेजा होती गई।

FIIs की बिकवाली और निफ्टी की गिरावट

जुलाई 2025 से FIIs की लगातार बिकवाली देखी गई है और हर बड़े आउटफ्लो के साथ निफ्टी पर दबाव बढ़ा है। उदाहरण के तौर पर, जुलाई 2025 में FIIs ने ₹47,667 करोड़ के शेयर बेचे, और उसी महीने निफ्टी 50 करीब 2.9% गिर गया। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा दे रहे हैं, लेकिन FIIs की बिकवाली ने कुल मिलाकर निवेशकों की भावनाओं को कमजोर किया है।

FII बिकवाली के पीछे मुख्य कारण

रुपये की कमजोरी से डॉलर रिटर्न घटता है

FIIs के लिए सबसे बड़ी चिंता भारतीय रुपये की गिरावट है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर डॉलर में कम रिटर्न मिलता है। 2025 में रुपया करीब 4.3% गिरकर ₹90 प्रति डॉलर के आसपास पहुंच गया और दिसंबर में यह ₹91.01 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक चला गया।

ट्रेड घाटा और बढ़ता दबाव

भारत का ट्रेड डिफिसिट बढ़ने से रुपये पर और दबाव आया है। जहां चीन ने $1.19 ट्रिलियन का ट्रेड सरप्लस दर्ज किया, वहीं भारत लगातार घाटे में रहा। RBI ने रुपये को संभालने की कोशिश की, लेकिन उसकी क्षमता सीमित है, क्योंकि चीन के पास लगभग $3.3 ट्रिलियन के विदेशी मुद्रा भंडार हैं, जबकि भारत के पास करीब $700 बिलियन ही हैं। रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव के कारण FIIs के लिए हेजिंग कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे उनका कुल रिटर्न और कम हो जाता है।

दूसरे वैश्विक बाजारों में बेहतर रिटर्न

FIIs अब उन बाजारों की तरफ रुख कर रहे हैं जहां ज्यादा स्थिरता और बेहतर रिटर्न मिल रहा है। 2025 में MSCI ऑल कंट्री वर्ल्ड इंडेक्स करीब 21% बढ़ा, लेकिन अमेरिका के बाहर के बाजारों ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया।

MSCI ex-USA में 29.2% की तेजी रही। चीन का CSI 300 (AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर के दम पर) 18% ऊपर रहा, दक्षिण कोरिया का KOSPI भी 76% उछल गया, जापान के निक्केई 225 में 26% की बढ़त रही। इसके मुकाबले भारत का निफ्टी 50 सिर्फ 10.5% रिटर्न दे पाया। यही वजह है कि FIIs ब्राजील जैसे उभरते बाजारों की तरफ भी आकर्षित हुए, जहां रिटर्न करीब 39.4% रहा।

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लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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