return to news
  1. Eternal, Urban Company और Swiggy के शेयरों में हलचल, नए लेबर कोड से बढ़ने वाला है इन कंपनियों का खर्च

मार्केट न्यूज़

Eternal, Urban Company और Swiggy के शेयरों में हलचल, नए लेबर कोड से बढ़ने वाला है इन कंपनियों का खर्च

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड November 24, 2025, 11:12 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

भारत ने नया लेबर कोड लागू कर दिया है, जिसके बाद Eternal, Urban Company और Swiggy के शेयरों में हलचल नजर आ रही है। इसके तहत सरकार ने पहली बार “गिग वर्क”, “प्लेटफॉर्म वर्क” और “एग्रीगेटर” जैसे शब्दों को कानून में सही तरह से परिभाषित किया है। अब इन सभी कंपनियों को सरकार के नए नियमों का पालन करना होगा।

शेयर सूची

New Labour Laws

New Labour Laws: सरकार ने कहा है कि जो भी कंपनी गिग वर्कर्स से काम करवाती है, उसे अपने सालाना बिजनेस का 1%–2% हिस्सा एक फंड में डालना होगा।

New Labour Laws: आज 24 नवंबर को Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal और Urban Company जैसे शेयरों में बिकवाली नजर आ रही है। Eternal के शेयरों में 2 फीसदी तक की गिरावट देखी गई और यह स्टॉक 295.80 रुपये तक लुढ़क गया। दूसरी तरफ Urban Company का शेयर भी करीब 1.85 फीसदी की गिरावट के साथ 140.20 रुपये के भाव पर आ गया।
Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

हालांकि, इस बीच Swiggy का शेयर 1.13 फीसदी उछलकर 390 रुपये के भाव पर ट्रेड कर रहा है। ये सभी ऐसी कंपनियां हैं जहां गिग वर्कर्स काम करते हैं। गिग वर्क मतलब ऐसा काम जिसे लोग फ्रीलांस की तरह करते हैं, जैसे Swiggy, Zomato, Blinkit के डिलीवरी पार्टनर या Urban Company के सर्विस प्रोफेशनल।

क्या है इन शेयरों में गिरावट की वजह

दरअसल, भारत ने नया लेबर कोड लागू कर दिया है, जिसके बाद इन शेयरों में हलचल नजर आ रही है। इसके तहत सरकार ने पहली बार “गिग वर्क”, “प्लेटफॉर्म वर्क” और “एग्रीगेटर” जैसे शब्दों को कानून में सही तरह से परिभाषित किया है। अब इन सभी कंपनियों को सरकार के नए नियमों का पालन करना होगा।

सरकार ने कहा है कि जो भी कंपनी गिग वर्कर्स से काम करवाती है, उसे अपने सालाना बिजनेस का 1%–2% हिस्सा एक फंड में डालना होगा। यह पैसा गिग वर्कर्स की भलाई और सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होगा। लेकिन एक सीमा भी तय की गई है, यह योगदान कंपनी द्वारा गिग वर्कर्स को दिए जाने वाले कुल पैसे के 5% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बेनिफिट्स स्टेट वेलफेयर बोर्ड और मौजूदा सरकारी स्कीम के जरिए दिए जाएंगे।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स

CNBCTV18 के मुताबिक ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि नए कोड से डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर गिग-वर्कर की लागत बढ़ सकती है और शॉर्ट-टर्म सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट् का कहना है कि इन नियमों का असर अलग-अलग कंपनियों पर अलग तरीके से पड़ेगा। Eternal और Swiggy जैसी फूड डिलीवरी कंपनियों को हर ऑर्डर पर लगभग ₹1.5 से ₹2.5 अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि बड़े प्लेटफॉर्म सेक्टर के लिए EBITDA पर 4% से 10% का असर पड़ेगा, लेकिन कहा कि इसका कुछ हिस्सा कस्टमर, मर्चेंट और बड़े इकोसिस्टम पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ क्विक कॉमर्स यानी 10–20 मिनट में सामान पहुंचाने वाली कंपनियों की बात करें, तो इनका खर्च थोड़ा ज्यादा है, लगभग 4 से 9 रुपये प्रति ऑर्डर।

NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार Urban Company पर इसका असर काफी बड़ा हो सकता है, क्योंकि वे अपने सर्विस पार्टनर्स को ज्यादा भुगतान करते हैं। इसलिए उन्हें एक ऑर्डर पर लगभग 47 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है, अगर 5% वाला नियम पूरी तरह लागू होता है। कुल मिलाकर इन बदलावों का असर कंपनियों की कमाई पर लगभग 4% से 10% तक पड़ सकता है, जो तेज़ झटका नहीं है और कंपनियां इसे संभाल सकती हैं।

कंपनियों का क्या कहना है?

कंपनियां इस बदलाव से ज्यादा परेशान नहीं दिखतीं। Eternal ने कहा है कि लंबे समय में उनके बिजनेस पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। Swiggy ने भी बताया कि इससे उनकी लागत या मुनाफे पर कोई बड़ा असर नहीं आएगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह खर्च धीरे-धीरे सबके बीच बांट दिया जाएगा-कंपनियां थोड़ा ग्राहकों से convenience fee में ले सकती हैं, थोड़ा रेस्टोरेंट या सर्विस पार्टनर्स एडजस्ट कर सकते हैं, और थोड़ा प्लेटफॉर्म खुद संभाल सकता है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि यह कदम भारत के लिए लंबे समय में अच्छा है, क्योंकि इससे रोजगार ज्यादा व्यवस्थित होगा और गिग वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
SIP
टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
promotion image

लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

अगला लेख