मार्केट न्यूज़

5 min read | अपडेटेड February 02, 2026, 13:47 IST
सारांश
वित्त मंत्री ने बजट में 17.2 लाख करोड़ रुपये के कर्ज लेने का ऐलान किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा है? नीति आयोग की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बाजार 53.6 लाख करोड़ रुपये का हो चुका है। सरकार इसे 2030 तक दोगुना करने की तैयारी में है ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार मिल सके।

भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार 2030 तक 100-120 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में साफ कर दिया है कि सरकार FY27 के लिए बाजार से 17.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज उठाएगी। यह रकम बहुत बड़ी है, लेकिन सरकार के खर्च और कमाई के बीच के अंतर यानी राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए यह जरूरी होता है। जब भी सरकार को पैसे की जरूरत होती है, वह जनता या बड़ी संस्थाओं से उधार मांगती है और बदले में उन्हें एक कागज का टुकड़ा देती है, जिसे बॉन्ड या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज कहा जाता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा बाजार कैसे काम करता है और इसमें दुनिया के बड़े-बड़े देश कैसे शामिल हैं।
नीति आयोग द्वारा दिसंबर 2025 में जारी की गई रिपोर्ट "डीपनिंग द कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट इन इंडिया" (Deepening the Corporate Bond Market in India) में इस बाजार को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे बॉन्ड बाजार अब बैंकों के बराबर ही कंपनियों को पैसा मुहैया करा रहा है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2015 में यह महज 17.5 लाख करोड़ रुपये का था, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर करीब 53.6 लाख करोड़ रुपये (53.6 Trillion) का हो गया है। इसका मतलब है कि इसमें सालाना करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, अगर दुनिया की बात करें, तो सिक्योरिटीज इंडस्ट्री एंड फाइनेंशियल मार्केट्स एसोसिएशन (SIFMA) के मुताबिक ग्लोबल बॉन्ड मार्केट का आकार 133 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा है, जो शेयर बाजार से भी बड़ा है। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार अभी जीडीपी का लगभग 15-16 फीसदी है। सरकार का अनुमान है कि साल 2030 तक यह बाजार बढ़कर 100 से 120 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
नीति आयोग की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 'विकसित भारत @2047' के सपने को पूरा करने के लिए एक मजबूत बॉन्ड मार्केट बहुत जरूरी है। सरकार का मानना है कि सिर्फ बैंकों के भरोसे इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पैसा नहीं जुटाया जा सकता। बॉन्ड मार्केट कंपनियों को लंबी अवधि के लिए सस्ता कर्ज देता है, जिससे बैंकों पर दबाव कम होता है। पिछले कुछ सालों में कंपनियों ने जितना पैसा बैंकों से कर्ज लिया, लगभग उतना ही पैसा (22.2 लाख करोड़ रुपये) बॉन्ड मार्केट से भी उठाया है। यह दिखाता है कि भारत में अब बॉन्ड कल्चर तेजी से बढ़ रहा है।
यह एक दिलचस्प पहलू है कि कर्ज लेने वाला भारत, निवेश भी करता है। भारत सरकार सीधे ट्रेडिंग नहीं करती, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका जैसे देशों के बॉन्ड खरीदता है। अमेरिकी वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में 200 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर रखा है। यह पैसा इसलिए लगाया जाता है ताकि मुश्किल वक्त में देश की आर्थिक स्थिति मजबूत रहे।
पहले सरकारी बॉन्ड खरीदना सिर्फ बड़े बैंकों और संस्थाओं के बस की बात थी, लेकिन अब आम आदमी भी इसमें पैसा लगा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले 'आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम' लॉन्च की थी। इसके तहत कोई भी आम नागरिक आरबीआई के साथ गिल्ट अकाउंट खोल सकता है और सीधे सरकार को कर्ज दे सकता है। इसमें निवेश करना बैंक एफडी से ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें 'सॉवरेन गारंटी' यानी सरकार की गारंटी होती है। इसमें आपका पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है।
बता दें कि सेबी (SEBI) ने अब कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश की न्यूनतम राशि (Face Value) को 1 लाख रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया है, ताकि छोटे निवेशक भी इसका फायदा उठा सकें।
बॉन्ड में कमाई दो तरह से होती है, एक कूपन रेट यानी ब्याज और दूसरा कैपिटल एप्रिसिएशन। जब आप बॉन्ड खरीदते हैं, तो सरकार आपको एक तय ब्याज दर देती है, जो आमतौर पर सालाना 7 से 7.5 प्रतिशत के आसपास होती है। यह ब्याज हर छह महीने में आपके खाते में आता है। इसके अलावा, अगर ब्याज दरें बाजार में कम होती हैं, तो आपके पुराने बॉन्ड की कीमत बढ़ जाती है, जिसे बेचकर आप मुनाफा कमा सकते हैं। लंबी अवधि के लिए यह एक बेहतरीन निवेश विकल्प है, खासकर उन लोगों के लिए जो शेयर बाजार के जोखिम से बचना चाहते हैं। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि कॉर्पोरेट बॉन्ड पर 8-12 फीसदी का सालाना रिटर्न मिलता है, जो सरकारी बॉन्ड की तुलना में थोड़ा अधिक होता है।
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