return to news
  1. 125% रिटर्न देने वाले डिफेंस शेयर की नई डील, अब नेवी और IIT के साथ मिलकर बनाएगी हथियार

मार्केट न्यूज़

125% रिटर्न देने वाले डिफेंस शेयर की नई डील, अब नेवी और IIT के साथ मिलकर बनाएगी हथियार

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड November 26, 2025, 09:11 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने आईआईटी चेन्नई और भारतीय नौसेना के साथ एक बड़ा समझौता किया है। तीनों मिलकर देश में ही डिफेंस तकनीक विकसित करेंगे। इस खबर के बाद बुधवार को कंपनी के शेयरों में हलचल दिख सकती है। कंपनी ने इस साल निवेशकों को 125 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है।

शेयर सूची

Apollo Micro Systems-share

Apollo Micro Systems के शेयर में आज दिख सकती है हलचल

Apollo Micro Systems Share Price: शेयर बाजार में आज डिफेंस सेक्टर की कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी ने एक ऐसी साझेदारी की घोषणा की है जो न केवल उसके कारोबार के लिए अहम है, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करेगी। बुधवार को जब बाजार खुलेगा तो निवेशकों की नजर इस शेयर पर टिकी होगी। कंपनी ने बताया है कि उसने आईआईटी चेन्नई और भारतीय नौसेना के साथ मिलकर एक त्रिपक्षीय समझौता किया है। इस समझौते का मुख्य मकसद देश के भीतर ही आधुनिक डिफेंस तकनीक को विकसित करना है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

तीनों मिलकर कैसे करेंगे काम?

इस समझौते के तहत तीनों भागीदारों की भूमिका तय कर दी गई है। आईआईटी चेन्नई रिसर्च का काम संभालेगा। वे नई तकनीकों और जरूरी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को विकसित करने पर फोकस करेंगे। वहीं, अपोलो माइक्रो सिस्टम्स एक टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के तौर पर काम करेगी। यानी आईआईटी जो तकनीक लैब में तैयार करेगा, अपोलो उसे फैक्ट्री में लाकर असली उपकरणों में बदलेगी। इसके बाद भारतीय नौसेना का डायरेक्टरेट जनरल ऑफ नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्शन (DGNAI) इन उपकरणों की जांच करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वे सेना के मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

किस तरह के हथियार बनेंगे?

इस साझेदारी का फोकस आधुनिक युद्ध में काम आने वाली तकनीकों पर होगा। इसमें एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सटीक निशाना लगाने वाली गाइडेंस तकनीक और हाई-एनर्जी वाले हथियार शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि वे लैब में बनी इनोवेशन को सीधे युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने लायक उपकरणों में बदलेंगे। यह मेक इन इंडिया पहल के तहत एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे विदेशी हथियारों पर भारत की निर्भरता कम होगी।

मैनेजमेंट का क्या कहना है?

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के प्रबंध निदेशक करुणाकर रेड्डी ने इस समझौते पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि हम अगली पीढ़ी के समाधान देने के लिए तैयार हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेंगे। उन्होंने बताया कि यह साझेदारी सिर्फ नेवी तक सीमित नहीं रहेगी। आईआईटी चेन्नई के साथ मिलकर वे भारतीय सेना, वायु सेना और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भी एडवांस तकनीक विकसित करेंगे। इससे भारत डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।

लगातार मिल रहे हैं ऑर्डर

कंपनी के लिए यह साल काफी अच्छा रहा है। अभी कुछ दिन पहले 22 नवंबर को कंपनी ने बताया था कि उसे 17 करोड़ रुपये का एक एक्सपोर्ट ऑर्डर मिला है। इसके अलावा कंपनी को डीआरडीओ से भी ऑर्डर मिल चुका है। अगर शेयर की बात करें तो अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने इस साल अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। इस साल अब तक कंपनी के शेयर ने 125 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। इन खबरों के दम पर आज भी शेयर में तेजी देखने को मिल सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
SIP
टाइमिंग पर भारी पड़ती है निरंतरता
promotion image

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

अगला लेख