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US-Iran Tensions: भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह, टेंशन की क्या है वजह और अभी क्या हैं हालात

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड February 23, 2026, 17:15 IST

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सारांश

US-Iran Tensions: दूतावास ने यह भी कहा कि पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कागज हमेशा तैयार रखें। मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल साझा किए गए हैं। जो भारतीय अब तक दूतावास में रजिस्टर नहीं हुए हैं, उनसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया है।

US-Iran Tension

अमेरिका और ईरान के बीच अगली परमाणु वार्ता इस हफ्ते गुरुवार को Geneva में होने वाली है।

US-Iran Tensions: भारत सरकार ने सोमवार को ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द देश छोड़ने की सलाह दी। Embassy of India in Tehran ने कहा कि हालात तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए छात्र, तीर्थयात्री, कारोबारी और पर्यटक उपलब्ध व्यावसायिक साधनों (कमर्शियल फ्लाइट्स आदि) से ईरान छोड़ दें। दूतावास ने पहले दी गई हिदायतें भी दोहराईं। भारतीयों से कहा गया है कि प्रदर्शन/धरना क्षेत्रों से दूर रहें, सावधानी बरतें, स्थानीय मीडिया पर नजर रखें और दूतावास के संपर्क में रहें।
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पासपोर्ट तैयार रखने की सलाह

दूतावास ने यह भी कहा कि पासपोर्ट और पहचान से जुड़े कागज हमेशा तैयार रखें। मदद के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल साझा किए गए हैं। जो भारतीय अब तक दूतावास में रजिस्टर नहीं हुए हैं, उनसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया है। अगर ईरान में इंटरनेट दिक्कत के कारण रजिस्ट्रेशन संभव न हो, तो भारत में मौजूद परिवार से यह प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की गई है।

अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन

यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हैं और साथ ही परमाणु समझौते को लेकर बातचीत फिर शुरू होने वाली है। Donald Trump ने शुक्रवार को कहा कि बातचीत के दौरान भी सीमित सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को “न्यायपूर्ण समझौता” करना चाहिए।

ईरान का क्या है प्लान?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि ईरान 2–3 दिनों में एक ड्राफ्ट समझौता तैयार कर वॉशिंगटन भेजने की तैयारी में है। उनके मुताबिक, एक हफ्ते के भीतर गंभीर बातचीत शुरू होकर नतीजे तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान कूटनीति के लिए भी तैयार है और अगर बातचीत विफल होती है तो टकराव के लिए भी।

Geneva में गुरुवार को होने वाली है अगली वार्ता

अमेरिका और ईरान के बीच अगली परमाणु वार्ता इस हफ्ते गुरुवार को Geneva में होने वाली है। इससे पहले Oman में अप्रत्यक्ष बातचीत और संपर्क हुए थे। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि बातचीत में “व्यावहारिक प्रस्तावों का आदान-प्रदान” हुआ है और संकेत सकारात्मक हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि ईरान हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है।

अमेरिका भी कर रहा है वॉर की तैयारी

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है। Pentagon दशकों में पहली बार इतनी बड़ी नौसैनिक और वायु शक्ति तैनात कर रहा है। इसमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल हैं। शुक्रवार को USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप Strait of Gibraltar से गुजरकर भूमध्य सागर में दाखिल हुआ।

अमेरिका क्या चाहता है?

वॉशिंगटन का रुख है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने या बनाने की क्षमता नहीं दी जा सकती और वह यूरेनियम संवर्धन नहीं कर सकता। वहीं अराघची ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है। ट्रंप के विशेष दूत Steve Witkoff ने Fox News से कहा कि ट्रंप यह जानने को “उत्सुक” हैं कि ईरान ने अब तक अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए क्यों पूरी तरह सहमति नहीं दी।

तेहरान क्या कह रहा है?

तेहरान लंबे समय से कहता रहा है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहे। वह अमेरिका और इजराइल की उन मांगों को खारिज करता है जिनमें मिसाइल कार्यक्रम रोकने और क्षेत्र के सशस्त्र सहयोगी समूहों से रिश्ते तोड़ने की बात है।

भारत के लिए ईरान रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम है। कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स, ऊर्जा संबंध और व्यापार के साथ-साथ हजारों भारतीय नागरिक वहां पढ़ाई, कारोबार और धार्मिक यात्रा के लिए रहते या जाते हैं। मौजूदा अनिश्चित और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए ही भारत ने अपने नागरिकों को एहतियातन ईरान छोड़ने की सलाह दी है।

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लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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