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4 min read | अपडेटेड April 09, 2026, 12:34 IST
सारांश
सीजफायर की खबरों के बाद से दावा किया जा रहा था कि ईरान के 10 पॉइंट्स के आधार पर ही सीजफायर पर सहमति बनी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने बाद में कहा कि ईरान द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी किया गया प्लान निजी तौर पर बताए गए प्लान से अलग है।

ईरान अमेरिका के बीच पेपर पर तो हो गया सीजफायर, लेकिन कन्फ्यूजन नहीं हो रहा खत्म
ईरान द्वारा अमेरिका के साथ बातचीत के लिए प्रस्तावित 10 पॉइंट्स फ्रेमवर्क को लेकर पैदा हुई भारी उलझन ने दो सप्ताह के सीजफायर को खतरे में डाल दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों द्वारा जारी प्लान के एक वर्जन से सार्वजनिक रूप से खुद को अलग कर लिया है। सीजफायर के बाद इजरायल की ओर से लेबनान पर हमला किया गया, जिसे ईरान सीजफायर का उल्लंघन मान रहा है। वहीं इजरायल का कहना है कि लेबनान पर हमला नहीं करना सीजफायर की शर्तों में शामिल नहीं था। ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ पर लिखा, ‘कई समझौते, लिस्ट और लेटर्स ऐसे लोगों द्वारा भेजे जा रहे हैं जिनका अमेरिका/ईरान वार्ता से बिल्कुल भी कोई लेना-देना नहीं है... वे पूरी तरह से धोखेबाज, ठग और इससे भी बदतर हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘केवल कुछ मीनिंगफुल 'पॉइंट्स' हैं, जो अमेरिका को स्वीकार्य हैं, और हम इन वार्ताओं के दौरान बंद दरवाजों के पीछे उन पर चर्चा करेंगे।’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये शर्तें ही सीजफायर का आधार हैं।
सीजफायर की खबरों के बाद से दावा किया जा रहा था कि ईरान के 10 पॉइंट्स के आधार पर ही सीजफायर पर सहमति बनी है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने बाद में कहा कि ईरान द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी किया गया प्लान निजी तौर पर बताए गए प्लान से अलग है। प्रमुख मांगों पर तीखे मतभेद ईरान की मांगों में अमेरिका द्वारा गैर-आक्रामकता की प्रतिबद्धता, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के कंट्रोल की मान्यता, तेहरान के यूरेनियम संवर्धन प्रोग्राम की स्वीकृति और सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। प्रस्ताव में क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी, ईरान को लक्षित करने वाले संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के उपायों की समाप्ति और युद्ध से संबंधित नुकसान के मुआवजे की भी मांग की गई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इनमें से कई मुद्दे वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों के लिए शायद स्वीकार्य नहीं होंगे। दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल के परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के कंट्रोल की जिद का अमेरिका और ग्लोबल ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंतित खाड़ी अरब देशों द्वारा कड़ा विरोध किए जाने की आशंका है। इसी तरह, यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करने की मांग ट्रंप के बार-बार ‘शून्य संवर्धन’ के आह्वान के विपरीत है।
खबरों के मुताबिक, कुछ राजनयिकों ने समझौता करने के सुझाव दिए हैं, जैसे कि संवर्धन को न्यूनतम नागरिक स्तर तक सीमित करना, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वॉशिंगटन ऐसे विकल्पों पर विचार करेगा या नहीं। यह प्रस्ताव पिछले महीने अमेरिकी मध्यस्थों द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्रीय ढांचे से भी मेल नहीं खाता है। हिंसा के जारी रहने से संघर्ष विराम पर तनाव बातचीत की शर्तों को लेकर असमंजस की स्थिति ऐसे समय में पैदा हुई है जब बातचीत के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया दो सप्ताह का संघर्ष विराम पहले से ही तनाव में है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को कहा कि इजरायल ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को रोकने के ट्रंप के फैसले का समर्थन करता है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष विराम लेबनान पर लागू नहीं होता है। संघर्ष विराम की घोषणा के तुरंत बाद, इजरायली सेना ने बेरूत और लेबनान के अन्य हिस्सों पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें सेना के अनुसार 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। लेबनानी अधिकारियों ने कहा कि इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष के सबसे घातक दिन में कम से कम 182 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि यह विराम ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और पूरे क्षेत्र में हमले रोकने की शर्त पर आधारित है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जिन्होंने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है, ने कहा कि संघर्ष विराम उल्लंघन की खबरें पहले ही आ चुकी हैं और उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया। शरीफ ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘कुछ स्थानों पर सीजफायर उल्लंघन की खबरें आई हैं... जो शांति प्रक्रिया की भावना को कमजोर करती हैं।’ उन्होंने कूटनीति को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। संघर्ष के दौरान ईरान के सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है, लेकिन इस बात का कोई संकेत नहीं मिला है कि अमेरिकी अधिकारी तेहरान की मुआवजे की मांग पर विचार करने को तैयार हैं।
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