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  1. टाटा मोटर्स फाइनेंस और पीरामल इंटप्राइजेज समेत छह अन्य NBFCs ने RBI को वापस किया लाइसेंस, क्या है वजह?

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टाटा मोटर्स फाइनेंस और पीरामल इंटप्राइजेज समेत छह अन्य NBFCs ने RBI को वापस किया लाइसेंस, क्या है वजह?

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 11, 2026, 07:59 IST

सारांश

आरबीआई ने उन नियमों के मसौदे पर जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिनमें कुछ खास एनबीएफसी को पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने इन संशोधनों का मसौदा 6 फरवरी को घोषित मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद जारी किया है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

टाटा मोटर्स फाइनेंस और पीरामल इंटरप्राइजेज ने RBI को लौटाया लाइसेंस

भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India, RBI) ने मंगलवार, 10 फरवरी को बताया कि टाटा मोटर्स फाइनेंस और पीरामल एंटरप्राइजेज ने अपने NBFC लाइसेंस वापस कर दिए हैं। यह कदम इन दोनों संस्थाओं का उनकी ग्रुप कंपनियों के साथ हुए विलय के बाद उठाया गया है। टाटा मोटर्स फाइनेंस का टाटा कैपिटल के साथ विलय 8 मई, 2025 को पूरा हुआ था, जबकि पीरामल एंटरप्राइजेज का पीरामल फाइनेंस के साथ विलय सितंबर 2025 में हुआ था। इन दोनों प्रमुख कंपनियों के अलावा छह अन्य गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non-banking Finance Companies, NBFC) ने भी अपने लाइसेंस आरबीआई को सौंप दिए हैं। इनमें एएआर श्याम इंडिया इन्वेस्टमेंट कंपनी, रामा इन्वेस्टमेंट कंपनी, श्री रामचंद्र एंटरप्राइजेज, श्री निर्माण, अंकिता प्रतिष्ठान और मयुका इन्वेस्टमेंट शामिल हैं।

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एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में आरबीआई ने उन नियमों के मसौदे पर जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिनमें कुछ खास एनबीएफसी को पंजीकरण की अनिवार्यता से छूट देने का प्रस्ताव है। आरबीआई ने इन संशोधनों का मसौदा 6 फरवरी को घोषित मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों को 'भारतीय रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी पंजीकरण, छूट और पैमाना आधारित विनियमन ढांचा) संशोधन निर्देश, 2026' का नाम दिया गया है।

क्या हैं प्रस्तावित नियम?

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ऐसी एनबीएफसी जो जनता से फंड स्वीकार नहीं करतीं और जिनका ग्राहकों से कोई सीधा संपर्क नहीं है, उन्हें अब आरबीआई के पास पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। यह छूट केवल उन्हीं कंपनियों को मिलेगी जिनकी संपत्ति का आकार 1,000 करोड़ रुपये से कम है। केंद्रीय बैंक ने इन्हें 'टाइप-1 एनबीएफसी' की कैटेगरी में रखा है। आरबीआई का मानना है कि इस तरह की कंपनियों में जोखिम कम होता है, इसलिए उन्हें नियमों में थोड़ी ढील दी जा सकती है। इन मसौदा निर्देशों पर सुझाव देने की अंतिम तिथि 4 मार्च, 2026 तय की गई है।

कब से मिलेगी छूट?

मसौदा अधिसूचना के अनुसार ऐसी एनबीएफसी को 1 अप्रैल, 2026 से आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45आईए के प्रावधानों से छूट दी जाएगी। अब तक इन कंपनियों के लिए उक्त धारा के तहत पंजीकरण कराना वैधानिक रूप से अनिवार्य था। आरबीआई ने साफ किया कि ऐसी संस्थाओं को अब 'गैर-पंजीकृत टाइप-1 एनबीएफसी' के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। आरबीआई ने कहा, 'क्योंकि ये कंपनियां पब्लिक फंड का इस्तेमाल किए बिना और आम ग्राहकों से सीधे संपर्क में आए बिना काम करती हैं, इसलिए इनके मामले में प्रणालीगत जोखिम और उपभोक्ता संरक्षण जैसे नियामक मुद्दे प्रासंगिक नहीं रह जाते हैं।' ये कंपनियां आमतौर पर अपने खुद के कोष से निवेश करती हैं, जिससे वित्तीय स्थिरता को खतरा होने की संभावना बहुत कम होती है।

PTI इनपुट के साथ

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