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3 min read | अपडेटेड February 06, 2026, 15:18 IST
सारांश
भारतीय रिजर्व बैंक ने रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बैंकों को 'रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट' (REITs) को कर्ज देने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया है। अब तक बैंकों को केवल InvITs को कर्ज देने की छूट थी। इस फैसले से रियल एस्टेट बाजार में कैश फ्लो की समस्या कम होगी।

आरबीआई के नए नियमों से रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट को बैंकों से कर्ज मिलना होगा आसान।
भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के रियल एस्टेट सेक्टर में नई जान फूंकने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आरबीआई ने अब कमर्शियल बैंकों को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs को कर्ज देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि सेक्टर में फंडिंग के सोर्स को और गहरा करने के लिए कुछ जरूरी सुरक्षा नियमों के साथ यह कदम उठाया जा रहा है। अब तक बैंकों को इन संस्थाओं को सीधे कर्ज देने की अनुमति नहीं थी, लेकिन बदलते आर्थिक परिवेश को देखते हुए नियमों में यह बड़ा बदलाव किया गया है।
REITs एक ऐसी निवेश व्यवस्था है जिसके जरिए बड़ी और कमाई करने वाली रियल एस्टेट संपत्तियों का संचालन किया जाता है। इसमें छोटे निवेशक भी बिना पूरी प्रॉपर्टी खरीदे रियल एस्टेट से होने वाली आय का हिस्सा बन सकते हैं। भारत में REITs और InvITs की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि बैंकों के फंसे हुए फंड को पूरा हो चुके प्रोजेक्ट्स से मुक्त कराया जा सके। पहले चरण में आरबीआई ने केवल बुनियादी ढांचा निवेश ट्रस्ट यानी InvITs को बैंक लोन की अनुमति दी थी, लेकिन अब REITs को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है ताकि रियल एस्टेट परियोजनाओं को और अधिक वित्तीय मजबूती मिल सके।
आरबीआई का यह फैसला केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिए गए प्रस्तावों के अनुरूप ही है। बजट में सरकारी उद्यमों की संपत्तियों के पुनर्चक्रण के लिए समर्पित REITs बनाने की बात कही गई थी। आरबीआई ने कहा है कि सूचीबद्ध REITs के लिए मजबूत नियामक और शासन ढांचे को देखते हुए अब बैंकों को इन्हें वित्तपोषित करने की अनुमति देना सही समय है। इसके लिए जल्द ही ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की जाएंगी। वर्तमान में भारत में ब्रुकफील्ड इंडिया, एम्बैसी ऑफिस पार्क्स और माइंडस्पेस जैसे पांच बड़े लिस्टेड REITs काम कर रहे हैं जिन्हें इस फैसले से सीधा फायदा होगा।
रियल एस्टेट के अलावा आरबीआई ने वित्तीय बाजार को और आधुनिक बनाने के लिए कई अन्य प्रस्ताव भी दिए हैं। कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को और सक्रिय बनाने के लिए डेरिवेटिव उत्पादों को पेश किया जाएगा। इससे कंपनियों के लिए बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाना और जोखिमों का प्रबंधन करना आसान होगा। साथ ही आरबीआई ने विदेशी मुद्रा बाजार में काम करने वाले डीलरों के लिए भी नियमों को सरल बनाने की बात कही है। बैंकों और प्राइमरी डीलरों को विदेशी मुद्रा लेनदेन में अब अधिक लचीलापन मिलेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के हिसाब से काम करना आसान हो जाएगा।
रिजर्व बैंक ने वॉलंटरी रिटेंशन रूट यानी VRR के तहत निवेश की 2.5 लाख करोड़ रुपये की सीमा को हटाने का भी प्रस्ताव दिया है। अब इस कैटेगरी में निवेश को जनरल रूट के तहत तय की गई निवेश सीमाओं के दायरे में लाया जाएगा। इन सभी कदमों का मूल उद्देश्य भारतीय वित्तीय बाजार में पारदर्शिता लाना और अधिक से अधिक निवेश को आकर्षित करना है। आरबीआई के इन फैसलों से न केवल रियल एस्टेट कंपनियों को कम लागत पर फंड मिल सकेगा, बल्कि आम निवेशकों के लिए भी बाजार में लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होगी।
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