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4 min read | अपडेटेड February 16, 2026, 12:36 IST
सारांश
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज से 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट 2026' शुरू हो रहा है। पीएम मोदी शाम 5 बजे एआई इम्पैक्ट एक्सपो का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन में 300 से ज्यादा पवेलियन और 600 स्टार्टअप्स हिस्सा ले रहे हैं, जिसका मुख्य थीम 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन कर देश की तकनीकी ताकत दिखाएंगे।
आज से देश की राजधानी नई दिल्ली में तकनीक का एक बड़ा मेला शुरू होने जा रहा है। भारत आज से 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट 2026' की मेजबानी कर रहा है। यह एक ऐसा वैश्विक मंच है जहां दुनिया भर के दिग्गज मिलकर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार और बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 5 बजे दिल्ली के भारत मंडपम में 'इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी ने इस मौके पर खुशी जताते हुए कहा है कि दुनिया भर से लोगों का भारत आना हमारे देश के युवाओं की काबिलियत और साइंस-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हमारी तेज तरक्की का सबूत है। यह आयोजन इस बात का भी गवाह है कि भारत वैश्विक विकास में बड़ा योगदान दे रहा है।
इस बार के समिट का थीम 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' रखा गया है। इसका सीधा मतलब है कि एआई का इस्तेमाल सभी के कल्याण और खुशी के लिए किया जाएगा। पीएम मोदी के मुताबिक यह समिट इंसान को केंद्र में रखकर एआई के जरिए प्रोग्रेस करने के हमारे साझा संकल्प को दिखाता है। एक्सपो के दौरान तीन मुख्य थीम पर फोकस किया जाएगा जिन्हें पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस कहा गया है। इसमें 300 से ज्यादा पवेलियन लगाए गए हैं जहां एआई की ताकत का लाइव प्रदर्शन होगा। इसके अलावा 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स और 13 देशों के पवेलियन भी यहां अपनी तकनीक दिखाएंगे। इस आयोजन में सरकारी संस्थानों के साथ-साथ दुनिया भर की टेक कंपनियां और रिसर्चर भी शामिल हो रहे हैं।
समिट के पहले दिन का फोकस एआई के जरिए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने पर रहेगा। एक्सपर्ट्स इस बात पर चर्चा करेंगे कि कैसे डेटा के जरिए सड़क हादसों के पैटर्न को समझा जा सकता है और जोखिम का अंदाजा लगाकर उन्हें होने से पहले ही रोका जा सकता है। इसके अलावा देश की न्यायिक व्यवस्था में एआई के इस्तेमाल पर भी बड़ी बात होगी। जानकारों का मानना है कि एआई की मदद से अदालती कामकाज में पारदर्शिता आएगी और केसों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। एआई के जरिए कानूनी रिसर्च को आसान बनाने और वर्चुअल अदालतों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा ताकि आम आदमी को न्याय मिलने में आसानी हो।
इस समिट में खेती-किसानी को स्मार्ट और लचीला बनाने पर भी विशेष चर्चा होगी। एआई की मदद से खेती को कैसे मौसम की मार से बचाया जा सकता है और पैदावार कैसे बढ़ाई जा सकती है, इस पर वैज्ञानिक अपने विचार रखेंगे। साथ ही रोजगार के बदलते स्वरूप पर भी बातचीत होगी। एआई आने से फ्यूचर में काम करने का तरीका बदल रहा है, जिससे नई नौकरियों के मौके तो बनेंगे ही लेकिन कुछ पुरानी नौकरियों पर खतरा भी हो सकता है। इसलिए वर्कफोर्स की बड़े स्तर पर ट्रेनिंग और नई स्किल्स सिखाने यानी रिस्किलिंग पर फोकस किया जाएगा ताकि हर कोई एआई के इस दौर में खुद को तैयार रख सके। इसके अलावा कल्चरल वैल्यूज को ध्यान में रखकर एआई के इम्प्लीमेंटेशन पर भी बात की जाएगी।
यह अपनी तरह का पहला वैश्विक एआई समिट है जो ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों में आयोजित हो रहा है। इसका मकसद एक ऐसा फ्यूचर तैयार करना है जहां एआई का फायदा हर इंसान तक पहुंचे और इससे समाज का विकास हो। इस समिट की तैयारी पिछले काफी समय से चल रही थी और इसके लिए पेरिस, बर्लिन, न्यूयॉर्क और टोक्यो जैसे शहरों में कई दौर की मीटिंग्स भी की गई थीं। यह आयोजन पीपल, प्लेनेट और प्रोग्रेस के सूत्रों पर आधारित है, जो यह बताते हैं कि एआई को किस तरह इंसानियत की सेवा और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर यह आयोजन भारत को दुनिया के एआई नक्शे पर एक लीडर के तौर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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