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ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स में तेजी बरकरार, क्या भारत में पड़ा पेट्रोल और डीजल के दामों पर असर?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड March 05, 2026, 12:33 IST

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सारांश

Petrol-Diesel Rates: इसके अलावा रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो तेल आयात महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतें बढ़ जाती हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

पेट्रोल-डीजल के दाम

क्या भारत में बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम?

Petrol-Diesel Rates: दुनियाभर में जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ने के साथ-साथ ब्रेंट ऑयल फ्यूचर में भी तेजी देखी जा रही है। ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ा है और इसकी चपेट में पश्चिमी एशिया के ज्यादातर देश आ गए हैं। ऐसे में दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई पर इसका नेगेटिव इम्पैक्ट देखने को मिल रहा है। ब्रेंट ऑयल फ्यूचर की बात करें तो आज यह 2.10% यानी की 1.75 डॉलर बढ़कर 84.25 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आस-पास पहुंच गया है। ऐसे में क्या भारत में इसका असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ा है? भारत के लोगों के लिए अच्छी बात यह है कि देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया है। दिल्ली की बात करें तो यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और एक लीटर डीजल की कीमत 87.67 रुपये बनी हुई है।

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भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले कुछ सालों से लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ता है। पेट्रोल और डीजल न केवल प्राइवेट गाड़ियों के लिए नहीं बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट, कृषि, उद्योग और कई अन्य सेक्टरों की रीढ़ भी हैं। इसलिए इनकी कीमतों में थोड़ी-सी बढ़ोतरी भी व्यापक असर डालती है। भारत में ईंधन की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में तेल महंगा होने पर देश में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ जाते हैं, हालांकि अभी ऐसी स्थिति नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से जियो पॉलिटिकल टेंशन बनी हुई है, आने वाले समय में ऐसा देखने को मिल भी सकता है।

किन वजहों से बढ़ते हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?

इसके अलावा रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो तेल आयात महंगा हो जाता है, जिससे घरेलू कीमतें बढ़ जाती हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। एक्साइज ड्यूटी, वैट और अन्य टैक्स मिलकर ईंधन की अंतिम कीमत को काफी बढ़ा देते हैं। कई बार सरकारें रेवेन्यू बढ़ाने के लिए टैक्स कम नहीं करतीं, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। हालांकि कुछ मौकों पर सरकारें टैक्स में कटौती करके जनता को राहत भी देती हैं।

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लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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