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Kharg Island ईरान और चीन के लिए क्यों है इतना अहम, जिस पर हमले के बाद क्रूड ऑयल में फिर लगी आग

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड March 16, 2026, 13:46 IST

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सारांश

Kharg Island: भले ही यह द्वीप छोटा है, लेकिन यह ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। ईरान के लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है। ईरान से पाइपलाइन के जरिए तेल इस द्वीप तक लाया जाता है और फिर इसे टैंकर जहाजों में भरा जाता है।

Kharg Island

ईरान के खार्ग आइलैंड पर हमले का असर क्रूड ऑयल (Crude Oil) पर भी दिख रहा है। Photo Credit: AFP

Kharg Island अचानक से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का केंद्र बन गया है। यह छोटा-सा द्वीप ईरान के दक्षिणी तट से करीब 25 किलोमीटर दूर है। यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। अमेरिका ने हाल ही में इस द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर बमबारी की। हालांकि तेल से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं नष्ट किया गया।

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ईरान के खार्ग आइलैंड पर हमले का असर क्रूड ऑयल (Crude Oil) पर भी दिख रहा है। आज ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव में 2.62 फीसदी की तेजी नजर आ रही है और यह 105.78 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर ट्रेड कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान Strait of Hormuz को बंद रखता है, तो इस द्वीप के तेल ढांचे को भी नष्ट किया जा सकता है। ट्रंप ने आज एक और धमकी देते हुए कहा कि वे इस द्वीप पर “जस्ट फॉर फन” फिर से हमला कर सकते हैं।

Kharg Island क्यों इतना अहम

भले ही यह द्वीप छोटा है, लेकिन यह ईरान के तेल निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र है। ईरान के लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप से होता है। ईरान से पाइपलाइन के जरिए तेल इस द्वीप तक लाया जाता है और फिर इसे टैंकर जहाजों में भरा जाता है।

इस द्वीप का तट गहरे पानी के पास है, इसलिए यहां बहुत बड़े-बड़े तेल टैंकर आसानी से लग सकते हैं। ये जहाज लाखों-करोड़ों गैलन तेल लोड करके खाड़ी से दक्षिण की ओर निकलते हैं और फिर Strait of Hormuz से गुजरते हुए ज्यादातर एशिया, खासकर चीन तक पहुंचते हैं। इसी वजह से कई विश्लेषक Kharg Island को ईरान की “आर्थिक लाइफलाइन” कहते हैं।

इस द्वीप से होने वाली तेल कमाई ईरान की ताकतवर सेना Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के लिए भी एक बड़ा वित्तीय स्रोत मानी जाती है।

अमेरिका ने किया हमला

Donald Trump के अनुसार अमेरिकी सेना ने Kharg Island पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें मिसाइल स्टोरेज साइट, नौसेना की माइन बिछाने वाली सुविधाएं और अन्य रक्षा से जुड़ा ढांचा शामिल था। यह हमला United States Central Command (CENTCOM) द्वारा किया गया और इसमें 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। लेकिन जानबूझकर तेल से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

कहा जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान को एक मजबूत संदेश दिया है, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था को तुरंत पूरी तरह नुकसान नहीं पहुंचाया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि Kharg Island पर हमला करना ऐसा है जैसे ईरान की आर्थिक नस पर निशाना साधना। यानी अगर तनाव बढ़ा तो अमेरिका ईरान के तेल निर्यात को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

तेल टर्मिनल को क्यों नहीं उड़ाया गया

अगर Kharg Island के तेल टर्मिनल को नष्ट कर दिया जाता तो यह बहुत बड़ा युद्धक कदम होता। ऐसा करने से ईरान की ज्यादातर तेल आय तुरंत बंद हो सकती थी। लेकिन इसका दूसरा असर यह होता कि दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जातीं और पूरे मध्य-पूर्व में बड़े पैमाने पर जवाबी हमले शुरू हो सकते थे।

ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे पर हमला किया गया, तो वह उन कंपनियों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाएगा जो अमेरिका के साथ काम करती हैं। इसके अलावा ईरान के पास बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइल हैं, जिनसे वह खाड़ी के तेल ढांचे और जहाजों पर हमला कर सकता है। इससे यह युद्ध सिर्फ ईरान तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में फैल सकता है।

चीन के लिए भी है यह अहम

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान लगभग 13.7 मिलियन बैरल तेल निर्यात कर चुका है और हाल ही में कई टैंकर Kharg Island पर तेल लोड करते देखे गए। इस तेल का बड़ा हिस्सा चीन जाता है, जो दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। आंकड़ों के मुताबिक 2024 में ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 91% हिस्सा चीन ने खरीदा। पिछले साल चीन ने औसतन 1.38 मिलियन बैरल प्रतिदिन ईरानी तेल खरीदा।

चीन में खासकर शानडोंग प्रांत में मौजूद छोटे-छोटे निजी रिफाइनर ईरानी तेल के बड़े खरीदार हैं क्योंकि यह अन्य देशों के तेल के मुकाबले सस्ता मिलता है। युद्ध बढ़ने और Kharg Island पर हमले की खबर से चीन में घबराहट का माहौल बन गया। लोग तेजी से पेट्रोल भरवाने लगे, जिससे कई पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग गईं।

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