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4 min read | अपडेटेड February 25, 2026, 14:05 IST
सारांश
काउंटरवेलिंग ड्यूटी वह टैक्स होता है, जो किसी देश द्वारा विदेशी सरकार की सब्सिडी के असर को खत्म करने के लिए लगाया जाता है। अगर किसी देश की सरकार अपने एक्सपोर्टर्स को सब्सिडी देती है और वे दूसरे देश में बहुत सस्ता माल बेचते हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए CVD लगाई जाती है।

Solar Imports: अमेरिकी व्यापार अधिकारियों का कहना है कि भारतीय सोलर कंपनियों को सरकारी सब्सिडी मिलती है।
अमेरिका ने भारत से होने वाले सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल के निर्यात पर बड़ा झटका दिया है। US Department of Commerce ने मंगलवार को भारत से आने वाले सोलर उत्पादों पर करीब 126% की शुरुआती काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाने का फैसला किया। इससे भारत के तेजी से बढ़ते क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा नुकसान हो सकता है।
यह काउंटरवेलिंग ड्यूटी इसलिए लगाई गई है क्योंकि अमेरिकी व्यापार अधिकारियों का कहना है कि भारतीय सोलर कंपनियों को सरकारी सब्सिडी मिलती है, जिससे वे अमेरिकी कंपनियों के मुकाबले सस्ते दाम पर सामान बेच पाती हैं। अमेरिका का कहना है कि इससे वहां की घरेलू सोलर इंडस्ट्री को नुकसान हो रहा है।
यह फैसला 24 फरवरी को घोषित किया गया और यह भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयात होने वाले क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक (PV) सेल्स की जांच का हिस्सा है। शुरुआती रिपोर्ट के तहत भारत की कंपनियों पर 125.87% की एक समान सब्सिडी दर लगाई गई है।
इसमें भारत की प्रमुख निर्यातक कंपनियां जैसे Mundra Solar Energy और Mundra Solar PV शामिल हैं। इतना ही नहीं, भारत की बाकी सभी सोलर कंपनियों पर भी यही दर लागू की गई है। अमेरिकी विभाग ने इसे “उपलब्ध तथ्यों और प्रतिकूल निष्कर्षों” के आधार पर तय किया है।
भारत के अलावा, इंडोनेशिया और लाओस पर भी भारी ड्यूटी लगाई गई है। इन देशों के कुछ निर्यातकों पर 80% से लेकर 140% से ज्यादा तक की शुरुआती सब्सिडी ड्यूटी तय की गई है।
काउंटरवेलिंग ड्यूटी वह टैक्स होता है, जो किसी देश द्वारा विदेशी सरकार की सब्सिडी के असर को खत्म करने के लिए लगाया जाता है। अगर किसी देश की सरकार अपने एक्सपोर्टर्स को सब्सिडी देती है और वे दूसरे देश में बहुत सस्ता माल बेचते हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए CVD लगाई जाती है।
इस मामले में, US Customs and Border Protection को निर्देश दिया जाएगा कि जैसे ही यह फैसला Federal Register में प्रकाशित होगा, वह भारतीय सोलर आयात पर 126% की दर से कैश डिपॉजिट वसूलना शुरू करे।
यह मामला Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने दर्ज कराया था। इस संगठन में Hanwha Q CELLS, First Solar और Mission Solar Energy (जो OCI Holdings की मालिकाना कंपनी है) शामिल हैं।
इस संगठन के मुख्य वकील Tim Brightbill ने कहा कि यह फैसला निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बहाल करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां घरेलू सोलर क्षमता बढ़ाने और नौकरियां पैदा करने के लिए अरबों डॉलर निवेश कर रही हैं, लेकिन अगर सस्ते और सब्सिडी वाले आयात जारी रहे तो ये निवेश सफल नहीं हो सकते।
पिछले कुछ सालों में अमेरिका, भारतीय सोलर कंपनियों के लिए बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट बनकर उभरा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में भारत से अमेरिका को सोलर सेल और मॉड्यूल का निर्यात 232 मिलियन वॉट था, जो 2024 में बढ़कर 2.29 बिलियन वॉट हो गया।
मूल्य के हिसाब से देखें तो यह निर्यात 84 मिलियन डॉलर से बढ़कर करीब 793 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। अब इतनी ज्यादा ड्यूटी लगने से भारतीय सोलर उत्पाद अमेरिका में बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे वहां बिक्री लगभग रुक सकती है। इससे उन कंपनियों पर ज्यादा दबाव पड़ेगा जिन्होंने भारत सरकार की PLI (Production Linked Incentive) स्कीम के तहत नए कारखानों में भारी निवेश किया है।
US Department of Commerce इस मामले में 6 जुलाई 2026 तक अपना अंतिम फैसला सुनाएगा, जब तक समयसीमा आगे न बढ़ाई जाए। साथ ही, अमेरिका एंटी-डंपिंग (AD) जांच भी कर रहा है।
इसके अलावा, US International Trade Commission (ITC) यह जांच कर रहा है कि क्या इन आयातों से अमेरिकी घरेलू उद्योग को नुकसान हुआ है। अगर Commerce Department और ITC दोनों अंतिम रूप से दोषी मानते हैं, तो अमेरिका स्थायी ड्यूटी लागू कर देगा।
हां। यह फैसला अभी प्रारंभिक है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक, सभी संबंधित पक्षों को आपत्ति दर्ज कराने, दस्तावेज जमा करने और सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने का मौका मिलेगा। इसलिए अंतिम ड्यूटी कम या ज्यादा भी हो सकती है।
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