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5 min read | अपडेटेड February 07, 2026, 08:49 IST
सारांश
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है। गोयल के मुताबिक मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां, मांस आदि सहित संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है।

India-US Trade Deal: अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर 18 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा।
इस भविष्य के समझौते में बाजार तक बेहतर पहुंच, सप्लाई चेन को मजबूत बनाना और दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखना शामिल होगा। अंतरिम समझौते को दोनों देश अपने रिश्तों में एक ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं, क्योंकि इसमें बराबरी, आपसी फायदे और ठोस नतीजों पर जोर दिया गया है। आइए समझते हैं इस समझौते की मुख्य बातें।
भारत ने यह सहमति दी है कि वह अमेरिका से आने वाले लगभग सभी औद्योगिक सामानों पर और कई तरह के खाद्य व कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क यानी टैरिफ को खत्म करेगा या कम करेगा। इसमें पशु चारे के लिए इस्तेमाल होने वाले अनाज, ड्राय फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और शराब जैसे कई प्रोडक्ट्स शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि अमेरिका के ये सामान भारत में पहले से सस्ते और आसानी से मिल सकेंगे
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है। गोयल के मुताबिक मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां, मांस आदि सहित संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है।
अमेरिका भारत से आने वाले सामानों पर 18 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा, जो एक खास राष्ट्रपति आदेश के तहत तय किया गया है। यह टैरिफ भारत के कपड़ा, रेडीमेड कपड़े, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक, रबर, केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी उत्पादों पर लागू होगा। हालांकि, अगर अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है, तो अमेरिका आगे चलकर कई भारतीय उत्पादों पर यह टैरिफ हटाने के लिए भी तैयार है। इनमें जेनेरिक दवाइयां, हीरे-जवाहरात और विमान के पुर्जे शामिल हैं।
एक बहुत अहम बात यह है कि भारत ने अगले 5 सालों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदने की मंशा जताई है। साथ ही, दोनों देश टेक्नोलॉजी ट्रेड को तेजी से बढ़ाएंगे, खासकर डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होने वाले GPU और अन्य हाई-टेक सामानों में, और तकनीकी सहयोग को भी मजबूत करेंगे
अमेरिका ने यह भी कहा है कि वह भारत से आने वाले कुछ विमान और विमान के पुर्जों पर लगाए गए पुराने सुरक्षा संबंधी टैरिफ हटा देगा, जो पहले एल्यूमिनियम, स्टील और तांबे के आयात को लेकर लगाए गए थे।
अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा शर्तों के तहत भारत को ऑटोमोबाइल पार्ट्स के लिए एक विशेष और रियायती टैरिफ कोटा देगा, जिससे भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियों को फायदा मिलेगा।
दवाइयों के मामले में यह कहा गया है कि अगर अमेरिका की जांच में यह साफ होता है कि जेनेरिक दवाइयों और उनके कच्चे माल से कोई सुरक्षा खतरा नहीं है, तो भारत को इस सेक्टर में बातचीत के जरिए बेहतर शर्तें दी जाएंगी। दोनों देश यह भी मानते हैं कि वे एक-दूसरे को लगातार और लंबे समय तक प्राथमिक बाजार पहुंच देंगे, यानी दोनों के लिए एक-दूसरे का बाजार ज्यादा खुला रहेगा
समझौते में यह भी तय हुआ है कि रूल्स ऑफ ओरिजिन बनाए जाएंगे, ताकि समझौते का फायदा मुख्य रूप से सिर्फ भारत और अमेरिका को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को। इसके साथ ही, दोनों देश उन गैर-टैरिफ बाधाओं को भी दूर करेंगे जो व्यापार में रुकावट बनती हैं।
भारत ने खास तौर पर यह वादा किया है कि वह अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेज के लिए पुराने नियमों और अड़चनों को खत्म करेगा, आईटी और कम्युनिकेशन से जुड़े अमेरिकी उत्पादों के लिए आयात लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया को सरल करेगा और छह महीने के भीतर यह तय करेगा कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों को भारत में स्वीकार किया जा सकता है या नहीं।
खाद्य और कृषि उत्पादों को लेकर भी भारत ने यह माना है कि अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों को हल किया जाएगा। इसके अलावा, दोनों देश अपने-अपने तकनीकी मानकों और जांच प्रक्रियाओं पर आपस में चर्चा करेंगे, ताकि नियमों का पालन करना आसान हो सके। अगर भविष्य में किसी भी देश द्वारा टैरिफ में बदलाव किया जाता है, तो दूसरे देश को भी अपने वादों में बदलाव करने का अधिकार होगा
अमेरिका और भारत ने यह भी कहा है कि वे BTA की बातचीत के जरिए बाजार तक पहुंच को और बढ़ाएंगे। अमेरिका ने यह भरोसा दिलाया है कि वह भविष्य की बातचीत में भारत की इस मांग पर भी विचार करेगा कि भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ और कम किए जाएं। दोनों देश तीसरे देशों की अनुचित व्यापार नीतियों से निपटने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और निवेश व निर्यात नियंत्रण जैसे मामलों में भी साथ मिलकर काम करेंगे।
डिजिटल व्यापार को लेकर भी दोनों देशों ने सहमति जताई है कि वे भेदभावपूर्ण या बोझिल नियमों को हटाएंगे और भविष्य के BTA में एक मजबूत और आधुनिक डिजिटल ट्रेड फ्रेमवर्क बनाएंगे। अंत में, दोनों देशों ने कहा है कि वे इस ढांचे को जल्दी लागू करेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देकर एक पूर्ण और आपसी फायदे वाला द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
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