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  1. वो 4 सवाल जिनके जवाब आने अभी बाकी हैं... भारत के नजरिए से समझिए टैरिफ को 18% तक करने के मायने

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वो 4 सवाल जिनके जवाब आने अभी बाकी हैं... भारत के नजरिए से समझिए टैरिफ को 18% तक करने के मायने

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड February 03, 2026, 11:40 IST

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सारांश

अमेरिका ने भारत पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है, जिससे निर्यातकों को राहत मिली है। लेकिन ट्रंप और पीएम मोदी के बयानों में अंतर है। क्या भारत ने रूस से तेल न खरीदने और 500 अरब डॉलर की खरीदारी की शर्त मान ली है? ऐसे और कई सवाल हैं, जिनके जवाब आने अभी बाकी हैं।

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पीएम मोदी और ट्रंप की दोस्ती के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से हुए ऐलानों ने भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। अमेरिका ने भारत पर लगने वाले 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, पिछले साल अगस्त में लगाया गया 25 फीसदी का पेनल्टी टैरिफ भी हटा दिया गया है, जिसने कुल टैक्स को 50 फीसदी तक पहुंचा दिया था। यह किसी भी देश पर लगने वाला सबसे ज्यादा टैक्स में से एक था। ट्रंप ने इसे पीएम मोदी के सम्मान में लिया गया फैसला बताया है। लेकिन ट्रंप और पीएम मोदी के बयानों में काफी अंतर है, जिससे चार बड़े सवाल खड़े हो गए हैं जिनके जवाब अभी मिलने बाकी हैं।

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क्या यह सिर्फ टैरिफ कटौती है या कोई बड़ी डील?

सबसे पहला और बड़ा सवाल यह है कि असल में डील है क्या? राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि भारत अमेरिका के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को घटाकर 'शून्य' कर देगा। लेकिन भारत सरकार की तरफ से अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि किन चीजों पर टैक्स जीरो होगा। क्या इसका मतलब यह है कि सोयाबीन और डेयरी जैसे कृषि उत्पादों के लिए भारत अपना बाजार पूरी तरह खोल देगा? जिसका विरोध भारत हमेशा करता आया है। वहीं, पीएम मोदी ने अपने बयान में ट्रंप की किसी भी शर्त का जिक्र नहीं किया है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ कम करने तक सीमित है या फिर यह उस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की शुरुआत है जिसकी चर्चा लंबे समय से हो रही थी।

क्या 18 फीसदी टैरिफ से भारत को फायदा होगा?

दूसरा सवाल यह है कि क्या 18 फीसदी का टैरिफ भारतीय निर्यातकों को एशियाई बाजार में टिकने में मदद करेगा। अमेरिकी टैरिफ 25 फीसदी होना भारत के लिए दोहरी मार थी, क्योंकि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों पर अमेरिका 20 फीसदी और पाकिस्तान पर 19 फीसदी टैक्स लगाता है। अब 18 फीसदी टैक्स होने से कपड़ा और ज्वैलरी निर्यातकों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत के पड़ोसी देशों को जीएसपी (GSP) के तहत 5 फीसदी की अतिरिक्त छूट मिलती है, जो ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में भारत से छीन ली थी। भारतीय निर्यातक उम्मीद कर रहे थे कि टैरिफ 15 फीसदी तक कम होगा ताकि वे मुकाबले में बने रहें।

रूसी तेल और भारत की ऊर्जा सुरक्षा का क्या होगा?

तीसरा सबसे अहम सवाल रूसी तेल को लेकर है। ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ लिखा है कि पीएम मोदी रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका-वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय हमेशा यह कहता आया है कि तेल खरीदना एक कमर्शियल फैसला है और यह ऊर्जा सुरक्षा पर निर्भर करता है। लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल के ऑर्डर में भारी कटौती की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तो यहां तक कह दिया है कि उसे जनवरी 2026 में रूस से कोई तेल नहीं मिला। क्या भारत ने अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद करने का फैसला कर लिया है?

500 अरब डॉलर का वादे का क्या मतलब?

चौथा सवाल भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और निवेश से जुड़ा है। ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने का वादा किया है, जिसमें ऊर्जा और तकनीक शामिल हैं। यह एक बहुत बड़ी रकम है, क्योंकि अभी दोनों देशों का कुल व्यापार ही 131 अरब डॉलर के आसपास है। इसके अलावा, बजट में ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है, जो संकेत देता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट रहा है। ट्रंप ने वेनेजुएला से तेल खरीदने की बात भी कही है, जो यह दिखाता है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें अब अमेरिकी फैसलों से तय हो रही हैं। क्या भारत अपनी शर्तों पर व्यापार करने के बजाय अमेरिकी दबाव में फैसले ले रहा है?

सबसे जरूरी बात कि ये सारे इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि इसके तार ट्रंप के टैरिफ ऐलान वाले पोस्ट और हाल के आंकड़ों से जुड़ रहे हैं, जिनके जवाब अभी भारत सरकार के तरफ से नहीं दिए गए हैं।

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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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