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3 min read | अपडेटेड February 20, 2026, 19:18 IST
सारांश
पीयूष गोयल ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ताकत ही इस मिशन की नींव है। उनके मुताबिक यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नए भविष्य का मंच तैयार करेगा। यह मिशन Union Budget 2025–26 में घोषित किया गया था और इसे 6 साल में लागू किया जाएगा।

सरकार उन निर्यातकों की मदद करेगी जो नए या ज्यादा जोखिम वाले देशों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं।
भारत सरकार ने शुक्रवार को निर्यात (Export) बढ़ाने के लिए 7 बड़े कदमों का ऐलान किया है। इनका मकसद खासतौर पर MSME और नए उभरते विदेशी बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच बढ़ाना है। ये सभी कदम ₹25,060 करोड़ की Export Promotion Mission (EPM) के तहत लाए गए हैं, जिसे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने लॉन्च किया।
पीयूष गोयल ने कहा कि 1.4 अरब भारतीयों की ताकत ही इस मिशन की नींव है। उनके मुताबिक यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नए भविष्य का मंच तैयार करेगा। यह मिशन Union Budget 2025–26 में घोषित किया गया था और इसे 6 साल में लागू किया जाएगा।
जो निर्यातक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशों में सामान बेचते हैं, उनके लिए सरकार ने दो खास क्रेडिट सुविधाएं शुरू की हैं। पहली, Direct E-Commerce Credit Facility, जिसमें ₹50 लाख तक का कर्ज मिलेगा और सरकार 90% तक गारंटी देगी। इससे छोटे निर्यातकों को बैंक से पैसा लेना आसान होगा। दूसरी, Overseas Inventory Credit Facility, जिसमें ₹5 करोड़ तक का कर्ज मिलेगा, 75% गारंटी होगी और 2.75% ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। इसका मकसद विदेशों में स्टॉक रखना और बिक्री को आसान बनाना है।
कई MSME को तुरंत कैश की जरूरत होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने export factoring को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके तहत Reserve Bank of India या International Financial Services Centres Authority से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के जरिए किए गए export factoring पर 2.75% ब्याज सब्सिडी दी जाएगी। हर MSME को सालाना ₹50 लाख तक का फायदा मिलेगा और पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।
सरकार उन निर्यातकों की मदद करेगी जो नए या ज्यादा जोखिम वाले देशों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। इसके लिए Letters of Credit और credit enhancement schemes जैसे टूल दिए जाएंगे, ताकि भुगतान न मिलने या डिफॉल्ट का खतरा कम हो सके।
विदेशों में सामान बेचने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरना जरूरी होता है, जो महंगा पड़ता है। इसे देखते हुए TRACE योजना के तहत टेस्टिंग, इंस्पेक्शन और सर्टिफिकेशन की लागत का हिस्सा सरकार वापस करेगी। Positive List में 60% और Priority Positive List में 75% तक खर्च की भरपाई होगी। हर निर्यातक को साल में अधिकतम ₹25 लाख तक का लाभ मिल सकेगा।
अब निर्यातकों को विदेशों में वेयरहाउस और फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक भी पहुंच मिलेगी। FLOW योजना के तहत सरकार तीन साल तक प्रोजेक्ट लागत का 30% तक सपोर्ट देगी। इससे डिलीवरी तेज होगी, खर्च कम होगा और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनेगी।
पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों के निर्यातकों को ज्यादा ट्रांसपोर्ट खर्च उठाना पड़ता है। LIFT योजना के तहत ऐसे निर्यातकों को योग्य फ्रेट खर्च का 30% तक रिफंड मिलेगा, जो सालाना ₹20 लाख तक सीमित होगा। इससे इन इलाकों के कारोबारियों को बराबरी का मौका मिलेगा।
विदेशी बाजार में सही फैसले लेने के लिए डेटा जरूरी होता है। INSIGHT कार्यक्रम के तहत सरकार प्रोजेक्ट लागत का 50% तक और सरकारी संस्थानों या भारतीय दूतावासों से जुड़े प्रस्तावों के लिए 100% तक मदद देगी। इससे मार्केट रिसर्च और ट्रेड इंटेलिजेंस आसान होगी।
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