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FY 2025-26 में GDP वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान, दुनिया में सबसे तेज, क्या हैं इसके मायने, सरकारी आंकड़ों में क्या बातें आईं सामने?

Upstox

4 min read | अपडेटेड January 08, 2026, 07:44 IST

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सारांश

यह भारतीय रिजर्व बैंक के 7.3% के अनुमान और सरकार के 6.3–6.8% वृद्धि के शुरुआती आकलन से अधिक है। भारतीय अर्थव्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 6.5% की दर से बढ़ी थी। घरेलू अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक का टैरिफ लगाया हुआ है।

जीडीपी

फाइनेंशिल ईयर 2025-26 में जीडीपी ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान

अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि और ग्लोबल जियो पॉलिटिकल तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है। इस तरह भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। बुधवार को आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation, MoSPI) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product, GDP) की वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के 7.3% के अनुमान और सरकार के 6.3–6.8% वृद्धि के शुरुआती आकलन से अधिक है। भारतीय अर्थव्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में 6.5% की दर से बढ़ी थी।

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घरेलू अर्थव्यवस्था का बेहतर प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक का टैरिफ लगाया हुआ है। इसकी वजह से ट्रेड टेंशन बढ़ी है और कुछ प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टरों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इन चुनौतियों के बीच, सरकार ने जीएसटी ढांचे में व्यापक बदलाव, सैकड़ों वस्तुओं पर टैक्स दरों में कटौती, श्रम सुधारों के क्रियान्वयन और इनकम टैक्स बोझ में राहत देकर आर्थिक गतिविधियों को गति दी है। इसके अलावा ब्याज दरों में कटौती, कम महंगाई और मजबूत ग्रामीण मांग ने भी इसमें सहयोग दिया है।

IMF के अनुमान से कितना अलग है यह सरकारी आंकड़ा?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पिछले महीने अनुमान जताया था कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.6% रह सकती है, जो फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में घटकर 6.2% रह जाएगी। यह अनुमान अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में देरी की आशंका को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है। गौरतलब है कि फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 9.2% की मजबूत वृद्धि दर्ज की थी।

किन सेक्टरों में वृद्धि दर बढ़ने का अनुमान?

मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी राष्ट्रीय आय के प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, चालू फाइनेंशियल ईयर में सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added, GVA) की वृद्धि दर 7.3% रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 6.4% थी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में जीवीए वृद्धि दर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 7% रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में 4.5% थी। वहीं, सर्विस सेक्टर की वृद्धि दर 9.1% आंकी गई है, जो पिछले साल 7.2% रही थी।

कृषि और संबद्ध सेक्टरों में घटा वृद्धि दर का अनुमान

हालांकि कृषि एवं संबद्ध सेक्टरों की वृद्धि दर घटकर 3.1% रहने का अनुमान है, जो एक साल पहले 4.6% थी। एनएसओ ने कहा कि स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 2025-26 में बढ़कर 201.90 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 187.97 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी का साइज 2025-26 में 8% बढ़कर 357.14 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 में 330.68 लाख करोड़ रुपये थी। हालांकि सरकार ने फरवरी 2025 में पेश किए गए केंद्रीय बजट में 10.1% वृद्धि का अनुमान लगाया था।

कब पेश किया जाना है केंद्रीय बजट 2026-27?

प्रथम अग्रिम अनुमानों का इस्तेमाल आम तौर पर केंद्रीय बजट की तैयारी में किया जाता है। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है। अमेरिकी डॉलर के लिहाज से भारत की जीडीपी फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में करीब 3.97 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। इसके लिए एक डॉलर का मूल्य 90 रुपये आंका गया है। एनएसओ का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 7.3% वृद्धि के अनुमान से थोड़ा अधिक है।

PFCE और GFCE को लेकर क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के मुताबिक, निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure, PFCE) की वास्तविक वृद्धि 7% रहने का अनुमान है, जबकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण (Gross Fixed Capital Formation, GFCF) में 7.8% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने इन आंकड़ों पर कहा कि गैर-कर राजस्व में बजट से अधिक प्राप्तियों और व्यय में संभावित बचत को देखते हुए सरकार के राजकोषीय घाटे के 4.4% के लक्ष्य से भटकने की आशंका नहीं है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वृद्धि गति बनी हुई है।

PTI इनपुट के साथ
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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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