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3 min read | अपडेटेड February 27, 2026, 13:49 IST
सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिन के राजकीय दौरे के बाद भारत और इजराइल ने 27 बड़े समझौतों का ऐलान किया है। इन समझौतों में डिजिटल पेमेंट, एआई, खेती और साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने अपने रिश्तों को अब 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' के लेवल पर पहुंचा दिया है।

भारत और इजराइल की दोस्ती का नया अध्याय
भारत और इजराइल के बीच रिश्तों का एक नया दौर शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिन के राजकीय दौरे के बाद दोनों देशों ने मिलकर कुल 27 बड़े नतीजों का ऐलान किया है। इसमें 17 मुख्य समझौते यानी एमओयू और 10 बड़ी रणनीतिक घोषणाएं शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इन समझौतों का असल मकसद तकनीक और सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है। भारत के लिए यह दौरा रणनीतिक और आर्थिक, दोनों नजरिए से बहुत ही फायदेमंद साबित होने वाला है क्योंकि इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि तकनीक का आदान-प्रदान भी होगा।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी और राहत भरी खबर डिजिटल पेमेंट को लेकर आई है। भारत के NPCI इंटरनेशनल और इजराइल की मासाव ने मिलकर एक समझौता किया है। इसके तहत भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI के जरिए एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना यानी क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस अब काफी आसान हो जाएगा। इससे उन लोगों को बहुत फायदा होगा जो काम के सिलसिले में दूसरे देश में रहते हैं और अपने घर पैसे भेजना चाहते हैं। यह कदम दोनों देशों के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था को जोड़ने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
खेती-बाड़ी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 'इंडिया-इजराइल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर' यानी आईआईएनसीए बनाया जाएगा। यह सेंटर अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी जैसे प्रिसिजन फार्मिंग, सैटेलाइट के जरिए सिंचाई, खेती की आधुनिक मशीनें और फसलों को बीमारियों से बचाने के उपायों पर काम करेगा। इसके अलावा, मछली पालन और समुद्र से जुड़ी खेती को बढ़ावा देने के लिए भी एक समझौता किया गया है। इसमें एडवांस्ड सिस्टम और बीमारियों के मैनेजमेंट में इजराइल की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे भारतीय किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और साइबर सुरक्षा बहुत जरूरी हो गई है। दोनों देशों ने मिलकर एआई के जरिए शिक्षा को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसमें टीचर्स का विकास और रिसर्च पर खास जोर दिया जाएगा ताकि हर किसी को शिक्षा का समान अवसर मिल सके। साथ ही, साइबर सुरक्षा के मामले में दुनिया के बेहतरीन तरीकों को सीखने के लिए भारत में 'इंडो-इजराइल साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनाया जाएगा। यह सेंटर डिजिटल दुनिया में आने वाली चुनौतियों और साइबर हमलों से निपटने में भारत की काफी मदद करेगा।
भारत और इजराइल के सांस्कृतिक रिश्तों को और गहरा करने के लिए साल 2026 से 2029 तक एक खास कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम चलेगा। इसमें म्यूजिक, थिएटर, डांस और विजुअल आर्ट्स जैसे क्षेत्रों में कलाकारों का आना-जाना होगा। गुजरात के लोथल में बनने वाले नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में भी इजराइल रिसर्च और प्रदर्शनी के जरिए सहयोग करेगा। इसके अलावा, नालंदा यूनिवर्सिटी और जेरूसलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी के बीच छात्रों और टीचर्स के एक्सचेंज को लेकर भी समझौता हुआ है, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में नए रास्ते खुलेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा यह है कि अब दोनों देशों के बीच 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' होगी, जो आपसी रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाएगी। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर की लीडरशिप में उभरती हुई तकनीकों पर एक नई पहल शुरू की गई है। इसके साथ ही, अगले पांच सालों में 50,000 तक भारतीय वर्कर्स के लिए कोटा तय किया गया है, जो इजराइल जाकर काम कर सकेंगे। साइंस और टेक्नोलॉजी पर बनी जॉइंट कमेटी को अब मंत्री स्तर तक बढ़ा दिया गया है, जिससे भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स और निवेश के फैसलों में काफी तेजी आएगी।
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