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  1. यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस से भारत ने खरीदा है 112.5 अरब यूरो का कच्चा तेल

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यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस से भारत ने खरीदा है 112.5 अरब यूरो का कच्चा तेल

Upstox

2 min read | अपडेटेड March 06, 2025, 17:05 IST

सारांश

India-Russia Crude Oil: फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगा दिए जिससे यहां से आने वाले कच्चे तेल की कीमत कम हो गई। भारत ने इसके बाद से रूस से 112 अरब यूरो कच्चा तेल खरीद लिया है।

रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल के दाम कम हो गए थे।

रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल के दाम कम हो गए थे।

रूस ने यूक्रेन पर हमले के बाद से जीवाश्म ईंधन के निर्यात से कुल 835 अरब यूरो की आमदनी हासिल कर ली है। अकेले भारत ने ही रूस से 112.5 अरब यूरो का कच्चा तेल खरीद लिया है।

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एक यूरोपियन रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुताबिक 24 फरवरी 2022 के बाद से दुनिया के तीसरे बड़े कच्चे तेल उपभोक्ता और आयातक भारत ने रूस से खरीद पर इतना खर्च किया है।

‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से दो मार्च, 2025 तक के तीन वर्षों में रूस से कुल 205.84 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन खरीदे। इसमें कच्चे तेल की खरीद 112.5 अरब यूरो की रही जबकि कोयले के लिए 13.25 अरब यूरो का भुगतान किया गया।

अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए 85 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भर भारत ने वित्त वर्ष 2022-23 में कच्चे तेल के आयात पर 232.7 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2023-24 में 234.3 अरब डॉलर खर्च किए।

चालू वित्त वर्ष के पहले 10 माह में भी भारत ने तेल आयात पर 195.2 अरब डॉलर खर्च किए हैं। अमेरिका की तरफ से हाल ही में रूसी तेल के मालवहन पर पाबंदियां लगाए जाने के बाद भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट आई है लेकिन रूस अब भी भारत का शीर्ष तेल स्रोत बना हुआ है।

वहीं, इस मामले में चीन 235 अरब यूरो (तेल के लिए 170 अरब यूरो, कोयले के लिए 34.3 अरब यूरो और गैस के लिए 30.5 अरब यूरो) के साथ सबसे आगे रहा।

भारत ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के तत्काल बाद रूस से बड़ी मात्रा में तेल आयात करना शुरू कर दिया। इसका बड़ा कारण यह है कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और कुछ यूरोपीय देशों द्वारा खरीद से परहेज करने के कारण रूसी तेल काफी रियायती दाम पर मिल रहा था।

इसकी वजह से भारत के रूसी तेल के आयात में नाटकीय वृद्धि देखी गई। यह भारत के कच्चे तेल के कुल आयात के एक प्रतिशत से बढ़कर कुछ ही समय में 40 प्रतिशत हो गया।

सीआरईए की रिपोर्ट कहती है कि भारत की कुछ रिफाइनरियों ने रूसी कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदल दिया और उसे यूरोप और अन्य जी-7 देशों को निर्यात किया गया।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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