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  1. दिसंबर में थोक महंगाई बढ़कर .83%, किन वजहों से पड़ा असर, क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?

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दिसंबर में थोक महंगाई बढ़कर .83%, किन वजहों से पड़ा असर, क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?

Upstox

2 min read | अपडेटेड January 14, 2026, 13:46 IST

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सारांश

थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index, WPI)) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में शून्य से नीचे 0.32% और अक्टूबर में शून्य से नीचे 1.21% रही थी। इसके विपरीत, दिसंबर 2024 में थोक मुद्रास्फीति 2.57% थी।

थोक महंगाई दर

थोक मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़कर 0.83%

थोक मुद्रास्फीति में लगातार दूसरे महीने वृद्धि जारी रही और दिसंबर 2025 में यह 0.83% पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजें, गैर-खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में मासिक आधार पर बढ़ोतरी से इसमें वृद्धि दर्ज की गई। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index, WPI) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में शून्य से नीचे 0.32% और अक्टूबर में शून्य से नीचे 1.21% रही थी। इसके विपरीत, दिसंबर 2024 में थोक मुद्रास्फीति 2.57% थी।

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उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति दर मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, खनिजों, मशीनरी और उपकरणों के विनिर्माण, खाद्य उत्पादों के निर्माण और वस्त्र आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण बढ़ी।’ डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतें 0.43% कम हुईं जबकि नवंबर में यह दर 4.16% थी। सब्जियों की महंगाई दर में दिसंबर में 3.50% की गिरावट आई जबकि नवंबर में यह 20.23% थी। विनिर्मित उत्पादों के मामले में मुद्रास्फीति नवंबर 2025 के 1.33% के मुकाबले दिसंबर में 1.82% रही।

गैर-खाद्य वस्तुओं की कैटेगरी की मुद्रास्फीति दिसंबर में 2.95% रही जबकि नवंबर में यह 2.27% थी। ईंधन और बिजली क्षेत्रों में महंगाई दर दिसंबर में 2.31% रही जबकि नवंबर में यह 2.27% थी। सब्जी, अंडा और दाल समेत रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण बीते महीने दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33% पर पहुंच गई। नवंबर में मुद्रास्फीति 0.71% थी। इससे पहले पिछला उच्च स्तर सितंबर में 1.44% दर्ज किया गया था। सरकार ने इस सप्ताह ही इस संबंध में आंकड़े जारी किए थे।

RBI क्यों रखता है खुदरा मुद्रास्फीति पर नजर?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) खुदरा मुद्रास्फीति पर नजर रखता है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में अभी तक नीतिगत दर रेपो में 1.25% की कटौती है जो अब 5.5% है। आरबीआई ने पिछले महीने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को पहले के 2.6% से घटाकर 2% कर दिया था। भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अपना अनुमान पहले के 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। भारत ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2% और अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की थी।

भाषा इनपुट के साथ
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Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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