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3 min read | अपडेटेड January 05, 2026, 10:44 IST
सारांश
एचडीएफसी एएमसी और वर्ल्ड बैंक ग्रुप की संस्था आईएफसी (IFC) ने भारत की मिड साइज की कंपनियों को कर्ज की सुविधा देने के लिए हाथ मिलाया है। आईएफसी ने एचडीएफसी एएमसी के 'स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट फंड-1' में 220 करोड़ रुपये निवेश करने का समझौता किया है, जिससे कंपनियों को विकास के लिए फंड मिल सकेगा।

एचडीएफसी एएमसी और आईएफसी के बीच हुई साझेदारी से भारतीय कंपनियों को मिलेगा नया सहारा।
भारत की आर्थिक प्रगति में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले मिड-मार्केट कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (HDFC AMC) और वर्ल्ड बैंक ग्रुप की सदस्य संस्था इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) ने एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत आईएफसी, एचडीएफसी एएमसी के 'स्ट्रक्चर्ड क्रेडिट फंड-1' में एक एंकर निवेशक के रूप में शामिल हुई है। इस फंड का मुख्य उद्देश्य उन मध्यम आकार की कंपनियों को कर्ज उपलब्ध कराना है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग चैनलों से फंड जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इस महत्वपूर्ण साझेदारी में आईएफसी ने फंड के लिए 220 करोड़ रुपये देने का वादा किया है। एचडीएफसी एएमसी का यह फंड एक कैटेगरी-2 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) है। फंड ने अपनी पहली क्लोजिंग घोषित कर दी है और अब तक संस्थागत निवेशकों, फैमिली ऑफिस और बड़े निवेशकों से लगभग 1,290 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं। फंड का कुल लक्ष्य 1,500 करोड़ रुपये का है, जिसमें 1,000 करोड़ रुपये का ग्रीन-शू विकल्प भी शामिल है। एचडीएफसी एएमसी खुद भी इस फंड में कुल कॉर्पस का 14 प्रतिशत हिस्सा स्पॉन्सर के रूप में निवेश कर रही है। यह फंड मुख्य रूप से 4 से 6 साल की अवधि के लिए सुरक्षित क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करेगा।
भारत का मिड-मार्केट सेक्टर देश के औद्योगिक उत्पादन और रोजगार में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। आईएफसी के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय निदेशक इमाद एन. फखूरी के अनुसार, यह निवेश कंपनियों को अपना संचालन बढ़ाने, इनोवेशन करने और आवश्यक सेवाओं का विस्तार करने में मदद करेगा। यह फंड विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और ई-मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा। इससे न केवल कंपनियों को समय पर और लिक्विड कर्ज मिलेगा, बल्कि यह भारत सरकार के विकसित भारत के विजन को भी मजबूती प्रदान करेगा। यह फंड अब तक तीन अलग-अलग सौदों के जरिए 380 करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है।
एचडीएफसी एएमसी के एमडी और सीईओ नवनीत मुनोत ने इस साझेदारी पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत का मिड-मार्केट सेगमेंट बहुत ही गतिशील है, लेकिन इसे पर्याप्त फंड नहीं मिल पाता है। आईएफसी के साथ जुड़ने से फंड को न केवल पूंजी मिलेगी, बल्कि ग्लोबल लेवल के गवर्नेंस स्टैंडर्ड और रिस्क फ्रेमवर्क भी मिलेंगे। कंपनी का उद्देश्य उन अच्छी तरह से संचालित व्यवसायों को अनुकूलित पूंजी समाधान प्रदान करना है, जिनके पास मजबूत बिजनेस मॉडल और विकास की संभावनाएं हैं। यह फंड रियल एस्टेट को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्रों में निवेश के लिए तैयार है और निवेशकों को बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न देने का लक्ष्य रखता है।
भारत में प्राइवेट क्रेडिट मार्केट का भविष्य बहुत ही उज्ज्वल नजर आ रहा है। अनुमानों के मुताबिक, यह बाजार जो 2023 में 19 अरब डॉलर का था, साल 2028 तक बढ़कर 60 से 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में आईएफसी और एचडीएफसी एएमसी जैसी बड़ी संस्थाओं का साथ आना बाजार के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। एचडीएफसी एएमसी, जो देश के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड्स में से एक है, वर्तमान में 8.73 ट्रिलियन रुपये की संपत्ति को मैनेज कर रही है। इस नए फंड के जरिए कंपनी अब प्राइवेट क्रेडिट के क्षेत्र में भी अपनी पकड़ मजबूत करने जा रही है, जिससे भारतीय कंपनियों को विकास के अगले चरण में जाने के लिए जरूरी वित्तीय पुल मिल सकेगा।
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