बिजनेस न्यूज़
.png)
4 min read | अपडेटेड April 07, 2026, 12:15 IST
सारांश
प्रवासी मजदूरों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने 5 किलो के सिलेंडरों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया है। नए नियमों के मुताबिक, राज्यों को अब पहले के मुकाबले दोगुनी मात्रा में ये सिलेंडर मिलेंगे।

सरकार के नए फैसले से अब प्रवासी मजदूरों को 5 किलो के एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत नहीं होगी।
केंद्र सरकार ने देश के लाखों प्रवासी मजदूरों के हित में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है। भारत सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो के फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडरों के दैनिक आवंटन को दोगुना करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक आधिकारिक पत्र लिखकर सूचित किया है। सरकार का यह कदम उन मजदूरों के लिए जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है जो अपने घरों से दूर दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, सिलेंडरों की इस बढ़ी हुई मात्रा का निर्धारण एक खास फार्मूले के आधार पर किया जाएगा। इसमें 2 और 3 मार्च 2026 के दौरान प्रवासी मजदूरों को दी गई सिलेंडरों की औसत दैनिक आपूर्ति को आधार बनाया गया है। अब राज्यों में हर दिन वितरित किए जाने वाले 5 किलो के सिलेंडरों की संख्या इस औसत से दोगुनी कर दी जाएगी। यह बढ़ी हुई सप्लाई पूरी तरह से प्रवासी मजदूरों की जरूरतों को पूरा करने के लिए समर्पित होगी। सरकार चाहती है कि काम के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले मजदूरों को खाना पकाने के ईंधन के लिए किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पहले से तय की गई सीमाओं से ऊपर और अतिरिक्त होगा। इससे पहले 21 मार्च 2026 को मंत्रालय ने एक संचार के माध्यम से आवंटन पर 20 पर्सेट की एक सीमा तय की थी। लेकिन ताजा आदेश में साफ किया गया है कि अब सिलेंडरों की संख्या दोगुनी करने का यह फैसला उस पुरानी सीमा के दायरे से बाहर होगा। इसका मतलब है कि राज्यों के पास अब बहुत बड़ी मात्रा में सिलेंडरों का स्टॉक उपलब्ध होगा, जिससे वे बिना किसी तकनीकी रुकावट के अधिक से अधिक प्रवासी मजदूरों तक अपनी पहुंच बना सकेंगे।
इन 5 किलो के फ्री ट्रेड सिलेंडरों के वितरण की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकारों और उनके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के पास होगी। केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे केवल प्रवासी मजदूरों को ही इन सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करें। इस पूरी प्रक्रिया में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) राज्यों की हर संभव सहायता करेंगी। ओएमसी का काम यह सुनिश्चित करना होगा कि सिलेंडरों की रिफिलिंग और उपलब्धता में कोई कमी न आए। राज्य सरकारें अपने डेटाबेस के आधार पर पात्र प्रवासी मजदूरों की पहचान करेंगी और उन्हें बिना किसी देरी के ये सिलेंडर उपलब्ध कराएंगी।
सरकार का यह फैसला न केवल ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि यह मजदूरों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगा। अक्सर देखा गया है कि छोटे सिलेंडर उपलब्ध न होने की स्थिति में प्रवासी मजदूरों को अवैध तरीके से रिफिल किए गए सिलेंडर या महंगे और असुरक्षित विकल्पों का सहारा लेना पड़ता था। 5 किलो के आधिकारिक फ्री ट्रेड सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ने से उन्हें सुरक्षित और वाजिब दाम पर गैस मिलेगी। इससे उनके समय की बचत होगी और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य 'इज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा देना और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना है। आने वाले दिनों में सभी राज्य इस आदेश को लागू करने के लिए अपनी कार्ययोजना तैयार करेंगे।
संबंधित समाचार
लेखकों के बारे में
.png)
अगला लेख