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गेहूं के निर्यात को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, 25 लाख टन एक्सपोर्ट को मिली मंजूरी

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 25, 2026, 12:53 IST

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सारांश

DGFT ने साफ किया है कि तय सीमा से ज्यादा गेहूं का निर्यात भी संभव है, लेकिन इसके लिए हर मामले में अलग-अलग अनुमति लेनी होगी। ऐसी अनुमति तभी दी जाएगी जब किसी दूसरे देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना हो और उस देश की सरकार की तरफ से खास अनुरोध आए।

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सरकार ने पहली बार 13 फरवरी को गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने का ऐलान किया था।

सरकार ने गेहूं के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं और इसके अलावा 5 लाख टन गेहूं के आटे और उससे बने उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। यह फैसला इस महीने की शुरुआत में लिया गया था, लेकिन इसकी आधिकारिक अधिसूचना 24 फरवरी को Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने जारी की।

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DGFT ने साफ किया है कि तय सीमा से ज्यादा गेहूं का निर्यात भी संभव है, लेकिन इसके लिए हर मामले में अलग-अलग अनुमति लेनी होगी। ऐसी अनुमति तभी दी जाएगी जब किसी दूसरे देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना हो और उस देश की सरकार की तरफ से खास अनुरोध आए।

DGFT ने लिए ये फैसले

सरकार ने यह भी अनुमति दी है कि पहले से तय सीमा के अलावा 5 लाख टन अतिरिक्त गेहूं का आटा और उससे जुड़े उत्पाद निर्यात किए जा सकते हैं। इसमें आटा (atta), मैदा (maida), सूजी (semolina) और होलमील आटा शामिल हैं।

हालांकि DGFT ने यह भी साफ कहा है कि गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात सामान्य तौर पर प्रतिबंधित ही रहेगा, लेकिन खास तौर पर 5 लाख टन की अतिरिक्त छूट दी जा रही है।

क्यों दी गई निर्यात की अनुमति

सरकार ने पहली बार 13 फरवरी को गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने का ऐलान किया था। सरकार का कहना था कि देश में गेहूं की उपलब्धता अच्छी है और निर्यात की अनुमति देने से किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।

यह फैसला मौजूदा स्टॉक की स्थिति और कीमतों के रुझान का आकलन करने के बाद लिया गया। Ministry of Consumer Affairs, Food & Public Distribution के अनुसार, साल 2025–26 में निजी व्यापारियों के पास गेहूं की उपलब्धता करीब 75 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 32 लाख टन ज्यादा है।

गेहूं का कुल स्टॉक कितना है?

सरकारी भंडार की बात करें तो Food Corporation of India (FCI) के पास 1 अप्रैल 2026 तक गेहूं का कुल स्टॉक करीब 182 लाख टन रहने का अनुमान है। मंत्रालय ने कहा कि इतने बड़े स्टॉक के कारण निर्यात से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

रकबा भी बढ़ा

इसके अलावा, रबी 2026 में गेहूं की बोआई का रकबा भी बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह दिखाता है कि किसानों का गेहूं की खेती पर भरोसा बढ़ा है, जिसकी वजह पक्का MSP और सरकारी खरीद व्यवस्था है। इससे एक और अच्छी फसल की उम्मीद भी बन रही है।

सरकार ने कहा कि ज्यादा स्टॉक, कीमतों में नरमी, बेहतर उत्पादन की उम्मीद और फसल के समय किसानों को नुकसान से बचाने के लिए यह फैसला जरूरी था। 25 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात से घरेलू कीमतें स्थिर रहेंगी, बाजार में नकदी बढ़ेगी, पुराने स्टॉक की सही खपत होगी और किसानों की आमदनी मजबूत होगी, जबकि देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रहेगी।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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