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4 min read | अपडेटेड April 06, 2026, 07:38 IST
सारांश
इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड के दाम गिरने से घरेलू बाजार में भी बड़ा असर दिख रहा है। आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक सोने, चांदी और प्लैटिनम के रेट में कमी आई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका की सख्त बयानबाजी ने इनवेस्टर्स को डरा दिया है, जिससे सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की चमक फीकी पड़ रही है।

सोने-चांदी का भाव
सोने और चांदी की कीमतों में आज बड़ी गिरावट देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच घरेलू बाजार में भी सोने के दाम नीचे आ गए हैं। 2 अप्रैल 2026 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सोने की सभी कैटेगरी में गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान के साथ बढ़ता युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल माना जा रहा है। इनवेस्टर्स इस समय काफी डरे हुए हैं और बाजार की हर हलचल पर पैनी नजर रख रहे हैं।
इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड रेट में 0.77 पर्सेट की गिरावट देखी गई है और यह 4,639.64 डॉलर प्रति औंस के लेवल पर पहुंच गया है। अगर हम मार्च के महीने की बात करें तो स्पॉट गोल्ड की कीमतों में करीब 11.8 पर्सेट की भारी कमी आई है। इसकी मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में चल रहा युद्ध है, जिससे पूरी दुनिया के बाजार हिले हुए हैं। फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है, जो दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण जलमार्ग है। दुनिया के कुल तेल इस्तेमाल का लगभग पांचवा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के काफी ऊपर चली गई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का डर पैदा कर दिया है। इसी डर की वजह से दुनिया भर में ब्याज दरों के आउटलुक में बड़ा बदलाव आया है।
महंगाई के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब इनवेस्टर्स को लग रहा है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में जल्द कटौती नहीं करेगा। साल की शुरुआत में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि 2026 में कम से कम दो बार रेट कट होंगे, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि 2027 के दूसरे हिस्से से पहले किसी भी कटौती की उम्मीद नहीं दिख रही है। ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी नहीं मानी जाती हैं, क्योंकि इससे सोना रखने की लागत बढ़ जाती है। यही कारण है कि इनवेस्टर्स अब सोने के बजाय डॉलर को सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं।
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की लेटेस्ट डेडलाइन ने बाजार में घबराहट और बढ़ा दी है। सैक्सो की चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट चारू चनाना के मुताबिक, ट्रंप की डेडलाइन की वजह से इनवेस्टर्स को लग रहा है कि यह परेशानी और लंबी खिंच सकती है। उनका कहना है कि इनवेस्टर्स इसे तेल से होने वाली महंगाई और फिर ब्याज दरों की समस्या के तौर पर देख रहे हैं। यही वजह है कि डॉलर इस समय सबसे साफ और सुरक्षित विकल्प बना हुआ है, जबकि सोना, बॉन्ड और येन उतने भरोसेमंद नहीं लग रहे हैं।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक, 2 अप्रैल 2026 को 999 प्योरिटी वाले सोने का भाव 1,46,608 रुपये रहा, जो कि 1 अप्रैल को 1,50,853 रुपये के लेवल पर था। इसी तरह 995 प्योरिटी वाला सोना गिरकर 1,46,021 रुपये पर आ गया है। गहनों के लिए इस्तेमाल होने वाला 916 प्योरिटी वाला गोल्ड आज 1,34,293 रुपये के भाव पर बिक रहा है। वहीं 750 प्योरिटी वाले सोने का रेट 1,09,956 रुपये और 585 प्योरिटी वाले का रेट 85,766 रुपये दर्ज किया गया है। चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है और यह 2,27,813 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है, जबकि प्लैटिनम का भाव 62,861 रुपये रहा।
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