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Gold Price Crash: 1983 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, एक हफ्ते में 11% टूटा सोना

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 21, 2026, 13:05 IST

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सारांश

Gold Price: इस हफ्ते सोना करीब 11% गिरा है, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं जंग शुरू होने के बाद से गोल्ड कुल मिलाकर 14% से ज्यादा नीचे आ चुका है। आमतौर पर जब महंगाई बढ़ने, करेंसी गिरने या संकट का डर होता है, तो निवेशक सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन इस बार उल्टा हो रहा है।

Gold Price

Gold Price: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी है।

Gold Price: आमतौर पर यह माना जाता है कि सोना सुरक्षित निवेश है और जब भी जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ता है तो इसकी कीमत भी बढती है। लेकिन इस बार उल्टा हुआ है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी है। इस जंग की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है, ऊर्जा ढांचा नुकसान झेल रहा है। लेकिन इसी दौरान सोने की कीमतों में गिरावट भी देखी गई है।
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इस हफ्ते 11 फीसदी टूटा सोना

इस हफ्ते सोना करीब 11% गिरा है, जो 1983 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं जंग शुरू होने के बाद से गोल्ड कुल मिलाकर 14% से ज्यादा नीचे आ चुका है। आमतौर पर जब महंगाई बढ़ने, करेंसी गिरने या संकट का डर होता है, तो निवेशक सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन इस बार तेल की कीमतें बढ़ने से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। और यही सोने के लिए सबसे बड़ा कारण बन गया है।

प्रॉफिट बुकिंग भी एक बड़ी वजह

एक और वजह है कि सोना पहले ही बहुत तेजी से ऊपर जा चुका था। 2025 में सोना 64% चढ़ा और 1979 के बाद का सबसे अच्छा साल रहा। जनवरी में पहली बार $5000 प्रति औंस तक पहुंच गया। लेकिन इतनी तेजी के बाद अब प्रॉफिट बुकिंग हो रही है।

फिर भी, कई एक्सपर्ट अभी भी लंबे समय के लिए सोने को लेकर पॉजिटिव हैं। उनका मानना है कि डॉलर की मजबूती अस्थायी हो सकती है, जियोपॉलिटिकल तनाव बना हुआ है और महंगाई व सरकारी कर्ज बढ़ रहा है। ये सब सोने के लिए अच्छे संकेत हैं।

US Fed की पॉलिसी का असर

सबसे बड़ा असर Federal Reserve की पॉलिसी से आया है। ट्रेडर्स को अब उम्मीद है कि इस साल ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं होगी। Fed लगातार दूसरी मीटिंग में दरें स्थिर रख चुका है और मार्केट मान रहा है कि आगे भी ऐसा ही रहेगा। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो बॉन्ड जैसे निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं क्योंकि उनमें ब्याज मिलता है, जबकि सोना कोई आय (income) नहीं देता। इसलिए लोग सोना छोड़कर बॉन्ड की तरफ जा रहे हैं।

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भी यही कर रहे हैं। ईरान युद्ध और तेल कीमतों के कारण महंगाई का खतरा बढ़ा है, इसलिए कई देश ब्याज दरें स्थिर रख रहे हैं या बढ़ा भी रहे हैं। इसका भी दबाव सोने पर पड़ रहा है।

डॉलर की मजबूती

एक और बड़ा कारण है अमेरिकी डॉलर की मजबूती। US Dollar हाल के समय में फिर मजबूत हुआ है। जंग शुरू होने के बाद डॉलर इंडेक्स करीब 2% ऊपर है। क्योंकि सोना डॉलर में कीमत तय होता है, इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है तो दुनिया के बाकी निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे सोने की मांग घटती है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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