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Gold-Silver में भारी उछाल पर इकोनॉमिक सर्वे का अलर्ट, तेजी बता रही है दुनिया का डर

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 29, 2026, 13:49 IST

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सारांश

Economic Survey: सर्वे बताता है कि 2025 के दौरान सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिसकी बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना, लंबे समय तक रियल इंटरेस्ट रेट का निगेटिव रहने की उम्मीद और दुनिया भर में बढ़ते राजनीतिक तनाव व वित्तीय जोखिम हैं।

Economic Survey

Economic Survey ने साफ कहा है कि सोना और चांदी की तेजी को बाजार की प्रतिक्रिया माना जाना चाहिए।

Gold-Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला पिछले साल के अलावा नए साल यानी 2026 में भी जारी है। हालांकि, Economic Survey 2025–26 में कहा गया है कि यह तेज उछाल दुनिया में बढ़ती आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का संकेत है। सर्वे के मुताबिक, यह दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम बढ़ रहा है और निवेशक अपने पैसे को सुरक्षित जगहों पर ले जाना पसंद कर रहे हैं।

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2025 में तेजी से बढ़ी सोने की कीमत

सर्वे बताता है कि 2025 के दौरान सोने की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिसकी बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना, लंबे समय तक रियल इंटरेस्ट रेट का निगेटिव रहने की उम्मीद और दुनिया भर में बढ़ते राजनीतिक तनाव व वित्तीय जोखिम हैं। इन हालात में निवेशक शेयर या जोखिम वाले एसेट छोड़कर गोल्ड और सिल्वर जैसे “सेफ हैवन” में पैसा डाल रहे हैं।

Economic Survey ने साफ कहा है कि सोना और चांदी की तेजी को बाजार की प्रतिक्रिया माना जाना चाहिए, जो दुनिया की बढ़ती नाजुक स्थिति को दिखाती है। यानी यह रैली घरेलू मांग से ज्यादा, वैश्विक डर और अनिश्चितता की वजह से हो रही है।

कोर इनफ्लेशन की गणना में सोना-चांदी शामिल नहीं

इकोनॉमिक सर्वे ने कोर इनफ्लेशन की गणना से सोना और चांदी को बाहर रखा है। इसका मतलब यह है कि इन धातुओं की कीमतें भारत की घरेलू मांग-आपूर्ति से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय हालात से तय हो रही हैं। सर्वे यह भी कहता है कि अगर गोल्ड और सिल्वर को हटाकर देखा जाए, तो भारत में कोर इनफ्लेशन कम है, जो बताता है कि देश के भीतर सप्लाई साइड की स्थिति सुधर रही है।

वैश्विक सिस्टम में हो रहे बड़े बदलाव

Economic Survey ने यह भी जोड़ा कि कीमती धातुओं की कीमतों में उछाल केवल एक अलग घटना नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सिस्टम में हो रहे बड़े बदलावों से जुड़ा है। दुनिया भर के वित्तीय बाजार अब ज्यादा अनिश्चितता को कीमतों में शामिल कर रहे हैं, क्योंकि देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, ट्रेड फ्रिक्शन बढ़ रहे हैं और टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बड़े निवेशों में ज्यादा कर्ज होने की चिंता भी बढ़ रही है।

वैश्विक व्यापार पर सर्वे में क्या कहा गया?

व्यापार को लेकर सर्वे ने कहा कि अब वैश्विक व्यापार सिर्फ दक्षता या बहुपक्षीय नियमों से नहीं चल रहा। इसके बजाय राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े फैसले ज्यादा असर डाल रहे हैं। देश अब ज्यादा टैरिफ, प्रतिबंध और जवाबी कदम उठा रहे हैं। इससे वैश्विक व्यापार ज्यादा बंटा हुआ, अनिश्चित और बार-बार झटके खाने वाला बन गया है।

Economic Survey ने चेतावनी दी है कि ऐसे माहौल में पूंजी का आना-जाना, करेंसी की कीमतें और देशों के बाहरी खाते ज्यादा जोखिम में आ जाते हैं, खासकर उन देशों के लिए जिनका माल का व्यापार घाटे में रहता है। सर्वे ने माना कि भारत को सर्विस एक्सपोर्ट और विदेश से आने वाले पैसे से कुछ राहत मिलती है, लेकिन लंबे समय में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग आधारित निर्यात सिस्टम बनाना जरूरी है, ताकि व्यापार और रुपये की स्थिरता कायम रह सके।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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