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Economic Survey: गिग वर्कर्स को लेकर आर्थिक समीक्षा में क्या कहा गया, क्या मिलेगी कुछ राहत?

Upstox

3 min read | अपडेटेड January 29, 2026, 15:21 IST

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सारांश

Economic Survey 2025-26: गिग वर्कर्स को लेकर आर्थिक समीक्षा में क्या कुछ कहा गया। पिछले चार सालों में किस तरह से गिग वर्कर्स को लेकर पूरा समीकरण बदला है, चलिए समझने की कोशिश करते हैं।

गिग वर्कर्स

इकोनॉमिक सर्वे में गिग वर्कर्स को लेकर क्या कुछ कहा गया?

Budget 2026 के पेश होने से तीन दिन पहले आज संसद में आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) टेबल किया गया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद के दोनों सदनों में इकोनॉमिक सर्वे पेश किया। इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया कि भारत में करीब 40% अस्थायी (गिग) वर्कर्स प्रति माह 15,000 रुपये से कम कमाते हैं। समीक्षा में इसमें महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप का आह्वान किया गया है। आमतौर पर ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को गिग वर्कर्स कहा जाता है। सर्वे में उचित मजदूरी सुनिश्चित करने और नियमित और अस्थायी (गिग) रोजगार के बीच लागत असमानता को कम करने के लिए प्रतीक्षा समय (वेटिंग टाइम) के मुआवजे सहित ‘मिनिमम प्रति घंटा या प्रति वर्किंग इनकम’ निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।

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गिग वर्कर्स के अहम मुद्दे

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ऑनलाइन प्लैटफॉर्म की हाल में हुई ग्रोथ और नीतिगत सुधारों से वर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को नया रूप मिल रहा है, जिससे नियमितीकरण और लचीलेपन को प्रोत्‍साहन मिल रहा है। श्रम संहिताओं ने ‘गिग’ और ‘ऑनलाइन’ श्रमिकों को औपचारिक रूप से मान्यता दी है। इससे सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार हुआ है और कल्याण कोष और लाभ को बढ़ावा मिला है। भारत में ‘गिग’ वर्कर्स (जिनमें क्विक कॉमर्स और खाद्य आपूर्ति के ‘राइडर्स’ शामिल हैं) ने हाल ही में बेहतर भुगतान, बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, देश के श्रम कानूनों के तहत औपचारिक मान्यता और 10 मिनट की ‘डिलिवरी’ समयसीमा को हटाने की मांग को लेकर अपने श्रम संघों के माध्यम से हड़ताल और विरोध प्रदर्शन किए। उनके संगठनों ने इस मुद्दे को केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय के समक्ष उठाया।

पिछले चार साल में इस सेक्टर में 55% दिखी है ग्रोथ

इस आंदोलन के परिणामस्वरूप, सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्लैटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी के दावे को हटाने का कहा। समीक्षा के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में 77 लाख कर्मियों की तुलना में फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में इस सेक्टर में 55% की वृद्धि हुई है और इनकी संख्‍या एक करोड़ 20 लाख हो गई है। इसके अंतर्गत 80 करोड़ से अधिक लोग ‘स्‍मार्ट फोन’ का इस्तेमाल कर रहे हैं और प्रति माह 15 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन किए जा रहे हैं। इसमें कहा गया कि भारत में ‘गिग’ वर्कर्स की संख्‍या कुल कार्यबल का 2% प्रतिशत से अधिक है। इसके साल 2029-30 तक 6.7% होने का अनुमान है जिससे सकल घरेलू उत्‍पाद में 2.35 लाख करोड़ रुपये के योगदान होने की संभावना है।

PTI इनपुट के साथ
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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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