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Crude Oil: US-Iran वॉर में हूती की एंट्री, क्रूड ऑयल में फिर लगी आग

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 30, 2026, 11:58 IST

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सारांश

Crude Oil में यह तेजी इसलिए आई क्योंकि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध 1 महीने बाद भी जारी है। इस युद्ध की वजह से दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है।

Crude Oil

Crude Oil: हूतियों के शामिल होने से Bab al-Mandeb Strait पर खतरा बढ़ गया है।

Crude OIl: अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के बीच क्रूड ऑयल में आज 30 मार्च को एक बार फिर तेजी नजर आ रही है। आज वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा का उछाल देखा गया। रिपोर्ट लिखे जाने के समय ब्रेंट क्रूड ऑयल का मई कॉन्ट्रैक्ट 2.12 फीसदी की बढ़त के साथ 107.59 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, West Texas Intermediate (WTI) का मई कॉन्ट्रैक्ट 0.94% बढ़कर $100.53 प्रति बैरल हो गया।
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1 महीने बाद भी युद्ध जारी

क्रूड ऑयल में यह तेजी इसलिए आई क्योंकि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध 1 महीने बाद भी जारी है। इस युद्ध की वजह से दुनिया की करीब 20% तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है। सप्लाई चेन में रुकावटें आई हैं, कई तेल-गैस सुविधाएं, रिफाइनरी और फील्ड्स को नुकसान पहुंचा है, जिससे लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने का खतरा बढ़ गया है।

हूती विद्रोहियों की एंट्री

स्थिति और गंभीर तब हो गई जब यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस युद्ध में एंट्री कर ली। उन्होंने शनिवार को 24 घंटे के भीतर इजराइल पर दो बार मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। हालांकि इजराइल की सेना ने इन हमलों को इंटरसेप्ट कर दिया, लेकिन हूती ग्रुप ने साफ कहा है कि वे फिलिस्तीन, लेबनान, इराक और ईरान के समर्थन में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

हूतियों के शामिल होने से Bab al-Mandeb Strait पर खतरा बढ़ गया है। यह दुनिया के लिए बहुत अहम समुद्री रास्ता है, जो रेड सी को हिंद महासागर से जोड़ता है और यहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है। अगर यहां बाधा आती है, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

Strait of Hormuz में भी खतरा

इससे पहले Strait of Hormuz में भी रुकावट और ब्लॉकेड की खबरें सामने आई थीं, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। इन दोनों रास्तों पर खतरा बढ़ने से बाजार में डर और कीमतों में तेजी देखी जा रही है।

भारत पर क्या हो सकता है असर

भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि देश करीब 80% से ज्यादा तेल जरूरतें आयात करता है। कीमतें बढ़ती रहीं तो भारत का इम्पोर्ट बिल तेजी से बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस क्षेत्र में यह युद्ध चल रहा है, वहीं से भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल का संकट पैदा हो सकता है। हालांकि सरकार का ये भी कहना है कि देश में फिलहाल कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और घबराने की जरूरत नहीं है।

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