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Budget 2026: देश की महिलाओं और बेटियों को इस बजट में क्या मिला? 4 प्वाइंट्स में समझें सारी डीटेल्स

विकास तिवारी

3 min read | अपडेटेड February 01, 2026, 15:16 IST

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सारांश

बजट 2026 में महिलाओं की तरक्की पर खास जोर दिया गया है। अक्सर लड़कियां घर से दूर कॉलेज तो मिल जाने पर भी रहने की जगह न होने से पढ़ाई छोड़ देती हैं। अब हर जिले में हॉस्टल बनने से यह समस्या दूर होगी। साथ ही महिला स्टार्टअप्स और कारीगरों के लिए शी मार्ट्स की शुरुआत की गई है।

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बजट 2026 में महिलाओं की तरक्की पर खास जोर दिया गया है।

आज बजट के दिन सरकार ने देश की आधी आबादी यानी महिलाओं और छात्राओं के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। हम सब जानते हैं कि हमारे देश में बहुत सी लड़कियां पढ़ने में बहुत तेज होती हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई अक्सर प्रतिभा की कमी से नहीं बल्कि घर से दूर रहने की सुरक्षित जगह न मिलने की वजह से रुक जाती है। इसी बड़ी समस्या को समझते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज ऐलान किया कि अब देश के हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए खास तौर पर गर्ल्स हॉस्टल बनाए जाएंगे। यह खबर उन लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो अपनी बेटियों को बाहर पढ़ाना तो चाहते हैं लेकिन सुरक्षा की चिंता में पीछे हट जाते थे।

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बेटियों की पढ़ाई में अब नहीं आएगी कोई रुकावट

अक्सर देखा जाता है कि गांव या छोटे शहर की लड़कियों को बड़े कॉलेज में एडमिशन तो मिल जाता है, लेकिन वहां रहने का इंतजाम करना बहुत महंगा और मुश्किल होता है। बजट में लिया गया यह फैसला लड़कियों को कॉलेज तक पहुंचाने में बहुत मददगार साबित होगा। जब हर जिले में अपना एक हॉस्टल होगा, तो मां-बाप भी बिना किसी डर के अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए भेज सकेंगे। इससे न केवल पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या कम होगी, बल्कि लड़कियां खुद को ज्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करेंगी। यह कदम महिला शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति की तरह देखा जा रहा है।

महिला उद्यमियों के लिए शी मार्ट्स का नया तोहफा

पढ़ाई के साथ-साथ जो महिलाएं अपना छोटा-मोटा काम करती हैं या स्टार्टअप चलाती हैं, उनके लिए भी बजट में एक कमाल की घोषणा हुई है। सरकार ने 'शी मार्ट्स' (SHE Marts) शुरू करने का फैसला किया है। ये ऐसे बाजार या प्लेटफॉर्म होंगे जहां सिर्फ महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और महिला कारीगर अपना सामान बेच सकेंगी। अक्सर महिलाओं को अपना बनाया हुआ सामान बेचने के लिए बिचौलियों के चक्कर काटने पड़ते थे और उन्हें सही दाम भी नहीं मिलता था। अब इन मार्ट्स के जरिए महिलाएं सीधे ग्राहकों से जुड़ेंगी और अपनी मेहनत का पूरा पैसा खुद कमाएंगी।

बिचौलियों का खेल खत्म और कमाई होगी ज्यादा

शी मार्ट्स का असली मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से आजाद बनाना है। यहां हस्तशिल्प, हाथ से बने कपड़े, घर का बना खाना और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स जैसे बहुत से सामान बेचे जा सकेंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां महिला स्टार्टअप्स को भी अपने नए और यूनिक प्रोडक्ट्स दिखाने का मौका मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और महिलाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी। जब महिलाएं सीधे बाजार से जुड़ेंगी, तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी भूमिका निभा सकेंगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस कदम

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में साफ कर दिया कि 'सबका साथ, सबका विकास' तभी पूरा होगा जब महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेंगी। हर जिले में हॉस्टल बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके भी पैदा होंगे, क्योंकि इन हॉस्टलों को चलाने और वहां सुविधाएं देने के लिए भी लोगों की जरूरत होगी। कुल मिलाकर देखें तो यह बजट लड़कियों के सपनों को नई उड़ान देने वाला है। अब रहने की चिंता खत्म होगी और कमाई के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे देश की हर बेटी और महिला खुद को ज्यादा सशक्त महसूस करेगी।

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लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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