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Budget 2026: एग्री सेक्टर ने की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट खेती में निवेश की मांग, नई टेक्नोलॉजी पर भी जोर

Upstox

4 min read | अपडेटेड January 15, 2026, 14:42 IST

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सारांश

Budget 2026: उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि 2026-27 का बजट इस सेक्टर को केवल एक कल्याणकारी चिंता के बजाय आर्थिक वृद्धि के इंजन के रूप में फिर से स्थापित करने का एक अहम अवसर है। यहां बताया गया है कि एग्रीकल्चर को बजट से क्या उम्मीदें हैं।

Budget 2026

Budget 2026: एग्रीकल्चर सेक्टर देश की लगभग आधी आबादी को रोजगार देता है।

Budget 2026: एग्रीकल्चर इंडस्ट्री से जुड़े लोग और एक्सपर्ट्स आगामी बजट से पहले डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, जलवायु-अनुकूल खेती पद्धतियों और टेक्नोलॉजी को अपनाने में अधिक निवेश की जोरदार वकालत कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे ऐसे सेक्टर में बदलाव लाया जा सकता है जो देश की लगभग आधी आबादी को रोजगार देता है लेकिन राष्ट्रीय उत्पादन में इसका योगदान पांचवें हिस्से से भी कम है। भारत के करीब 45 फीसदी वर्कफोर्स को एग्रीकल्चर और इससे जुड़े सेक्टर्स सहारा देते हैं, जबकि ग्रॉस वैल्यू एडेड में इनका योगदान केवल 18 फीसदी के आसपास है।
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क्या है एक्सपर्ट्स की राय

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि 2026-27 का बजट इस सेक्टर को केवल एक कल्याणकारी चिंता के बजाय आर्थिक वृद्धि के इंजन के रूप में फिर से स्थापित करने का एक अहम अवसर है। EY India में जीपीएस-एग्रीकल्चर, आजीविका, सोशल एंड स्किल के प्रमुख अमित वत्स्यायन ने कहा, "कृषि को न केवल एक कल्याणकारी क्षेत्र के रूप में बल्कि आर्थिक वृद्धि के एक विश्वसनीय इंजन के रूप में तेजी से मान्यता मिल रही है। एक ऐसा इंजन जो उत्पादकता, रोजगार, ग्रामीण मांग और जुझारूपन को बढ़ावा दे सकता है।"

डेयरी सेक्टर को सपोर्ट की जरूरत

हेरिटेज फूड्स लिमिटेड की कार्यकारी निदेशक ब्राह्मणी नारा ने सितंबर 2025 में GST रेशनलाइजेशन से उत्पन्न अनुकूल परिस्थितियों की ओर इशारा किया, जिसने संगठित डेयरी सेक्टर में पनीर, ‘चीज’, घी और मक्खन जैसे उच्च प्रोटीन और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि को गति दी है। सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन और नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन जैसी पहलों से अब तक 3 लाख से ज्यादा किसान संगठित सिस्टम से जुड़ चुके हैं।

बजट से 3 बड़ी मांगें

नारा ने बजट से तीन बड़ी मांगें रखीं है। पहली, पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को अच्छे क्वालिटी के चारे और क्रोमोसोम-सॉर्टेड सीमन पर सब्सिडी दी जाए। दूसरी, देश में पंजीकृत पशु चिकित्सकों की संख्या करीब 68 हजार है, जबकि जरूरत 1.10 से 1.20 लाख की है, इसलिए वेटरनरी कॉलेजों की क्षमता बढ़ाने की मांग की गई। तीसरी, खासकर महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए मिनी डेयरी यूनिट्स पर ज्यादा कैपिटल सब्सिडी दी जाए।

एग्री एसेट्स में निवेश बढ़ाने की जरूरत

ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को लेकर वत्स्यायन ने कहा कि माइक्रो इरिगेशन, वाटरशेड मैनेजमेंट, एक्विफर रिचार्ज और रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले एग्री एसेट्स में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। इससे न सिर्फ जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटा जा सकेगा, बल्कि ग्रामीण मांग बढ़ेगी, किसानों की आय स्थिर होगी और फूड सिक्योरिटी मजबूत होगी। उन्होंने भंडारण, लॉजिस्टिक्स और कृषि रिसर्च में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप बढ़ाने की भी बात कही, ताकि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान कम हों और दालों जैसी पोषण से जुड़ी फसलों में आत्मनिर्भरता बढ़े।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देते हुए MapMyCrop के फाउंडर और सीईओ स्वप्निल जाधव ने कहा कि एग्री-ड्रोन, IoT सेंसर और AI आधारित एनालिटिक्स खेती को पूरी तरह बदल सकते हैं। इससे पैदावार बढ़ेगी, पानी और खाद का बेहतर इस्तेमाल होगा और जलवायु जोखिमों से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने इसके लिए टार्गेटेड सब्सिडी, मजबूत पीपीपी मॉडल और आरएंडडी पर टैक्स इंसेंटिव देने की मांग की, ताकि खेती इनपुट-हैवी सब्सिडी से हटकर टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम की ओर बढ़ सके।

एग्रीकल्चर सेक्टर में इन सुधारों की जरूरत

BDO इंडिया के सौम्यक बिस्वास ने कृषि क्षेत्र की संरचनात्मक समस्याओं पर बात करते हुए कहा कि छोटे और बिखरे हुए खेत, सहयोगी क्षेत्रों में कम निवेश, पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस और कमजोर रिसर्च फंडिंग अब भी बड़ी चुनौती हैं। उन्होंने क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर के लिए ज्यादा फंड, पशुपालन और मत्स्य जैसे सहयोगी क्षेत्रों को मजबूत करने, FPOs को मार्केट और क्रेडिट से जोड़ने, और पानी ज्यादा खपत करने वाली फसलों पर निर्भरता कम करने के लिए बागवानी, दालों और तिलहनों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।

वत्स्यायन ने कहा कि अगर AGRISTACK को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह पूरे कृषि बदलाव की रीढ़ बन सकता है। किसान डेटा, जमीन रिकॉर्ड, क्रेडिट, बीमा, एक्सटेंशन और मार्केट प्लेटफॉर्म को एक साथ जोड़कर यह सिस्टम न सिर्फ सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करेगा, बल्कि निजी निवेश को भी आकर्षित करेगा और किसानों के लिए लेन-देन की लागत कम करेगा।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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