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3 min read | अपडेटेड March 19, 2026, 14:55 IST
सारांश
सरकारी बैंकों में नौकरी पाने के लिए अब आपकी साख यानी सिबिल स्कोर भी देखा जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि खराब क्रेडिट हिस्ट्री की वजह से पिछले 3 सालों में 20 उम्मीदवारों की जॉइनिंग रोक दी गई है। अगर आप भी बैंक में करियर बनाना चाहते हैं, तो अपने लोन और क्रेडिट कार्ड के बिल समय पर चुकाएं।

लोन के साथ बैंक में नौकरी के लिए भी चाहिए होगा बेहतर सिबिल स्कोर।
अगर आप भी उन लाखों युवाओं में शामिल हैं जो सरकारी बैंक में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं और दिन-रात पढ़ाई में जुटे हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। अब सरकारी बैंक में अधिकारी या क्लर्क बनने के लिए केवल लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करना ही काफी नहीं होगा। केंद्र सरकार ने अब साफ कर दिया है कि बैंक उम्मीदवारों की नियुक्ति करने से पहले उनके सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर पर भी पैनी नजर रखेंगे। अगर आपका वित्तीय रिकॉर्ड खराब पाया जाता है, तो परीक्षा पास करने के बावजूद आपको नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
हाल ही में राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस बारे में बेहद चौंकाने वाली जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों के दौरान करीब 20 ऐसे उम्मीदवार थे, जिनकी नियुक्ति सिर्फ इसलिए रद्द कर दी गई या उनके ऑफर लेटर वापस ले लिए गए क्योंकि उनकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब थी। यानी इन युवाओं ने परीक्षा तो पास कर ली थी, लेकिन जब उनके बैंक रिकॉर्ड की जांच हुई, तो वे बैंकों के मानकों पर खरे नहीं उतरे। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह संख्या कुल भर्ती होने वाले उम्मीदवारों का महज 0.02 पर्सेंट ही है, लेकिन यह नियम भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत है।
बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान यानी आईबीपीएस के माध्यम से होने वाली सभी भर्तियों में अब यह नियम सख्ती से लागू किया जा रहा है। उम्मीदवारों को जॉइनिंग के समय एक अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री दिखानी होगी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कितना स्कोर होना चाहिए? सरकार के मुताबिक, हर बैंक अपनी नीति के हिसाब से एक न्यूनतम कट-ऑफ स्कोर तय करता है। सामान्य तौर पर बैंकिंग सेक्टर में 650 या उससे ज्यादा के क्रेडिट स्कोर को अच्छा माना जाता है। अगर आपका स्कोर इससे कम है, तो बैंक आपकी जॉइनिंग पर रोक लगा सकते हैं। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि बैंक कर्मचारियों के बीच जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सके।
हालांकि, इस नियम को लेकर उन युवाओं को घबराने की जरूरत नहीं है जिन्होंने कभी कोई लोन नहीं लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम उन उम्मीदवारों पर लागू नहीं होता जिनका कोई बैंक खाता नहीं है या जिनकी कोई पिछली क्रेडिट हिस्ट्री ही नहीं है। अगर आपने कभी क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं किया या कभी कोई छोटा-बड़ा लोन नहीं लिया है, तो आपके लिए यह शर्त अनिवार्य नहीं होगी। यह नियम मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिन्होंने कर्ज तो लिया लेकिन उसे समय पर वापस नहीं किया, जिससे उनकी वित्तीय साख खराब हो गई।
बैंकों का तर्क बहुत सीधा और साफ है। बैंक कर्मचारियों को जनता के पैसे और देश की जमा पूंजी की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। बैंकों का मानना है कि जो व्यक्ति अपने निजी जीवन में पैसों को लेकर लापरवाह है और समय पर अपने लोन की ईएमआई या क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं भर सकता, उसे जनता का पैसा सौंपना जोखिम भरा हो सकता है। एक जिम्मेदार कर्मचारी वही हो सकता है जो खुद भी आर्थिक रूप से अनुशासित हो। चर्चा तो यहां तक चल रही है कि आने वाले समय में केवल लोन ही नहीं, बल्कि बिजली और पानी जैसे बिलों के भुगतान को भी क्रेडिट स्कोर से जोड़ा जा सकता है ताकि व्यक्ति की पूरी ईमानदारी का पता चल सके।
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