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AI से किसकी नौकरी खतरे में और कौन है सुरक्षित? Anthropic की नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड March 06, 2026, 14:22 IST

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सारांश

पिछले कुछ समय में AI कंपनियों ने कई ऐसे ऐलान किए हैं, जिसके चलते IT समेत कई सेक्टर्स में लोगों की नौकरियों की सुरक्षा पर नई बहस छिड़ गई है। इसी को समझने के लिए AI कंपनी Anthropic ने एक नई रिसर्च में “Observed Exposure” नाम का एक नया मापदंड पेश किया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

AI से किसकी नौकरी खतरे में और कौन है सुरक्षित?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने आज के समय में नौकरीपेशा लोगों के मन में एक बड़ा डर पैदा कर दिया है। लोगों में इस बात का डर है कि कहीं उनकी नौकरी AI की वजह से न चली जाए। पिछले कुछ समय में AI कंपनियों ने कई ऐसे ऐलान किए हैं, जिसके चलते IT समेत कई सेक्टर्स में लोगों की नौकरियों की सुरक्षा पर नई बहस छिड़ गई है। इसी को समझने के लिए AI कंपनी Anthropic ने एक नई रिसर्च में “Observed Exposure” नाम का एक नया मापदंड पेश किया है।

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Observed Exposure तरीके में क्या है खास

Observed Exposure का मकसद यह समझना है कि किन नौकरियों में AI की वजह से काम कम हो सकता है या नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इस मापदंड की खास बात यह है कि यह सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं देता कि AI किसी काम को कर सकता है या नहीं, बल्कि यह भी देखता है कि असल दुनिया में लोग उस काम के लिए AI का इस्तेमाल कर भी रहे हैं या नहीं। यानी यह रिपोर्ट अनुमान पर नहीं बल्कि वर्तमान पर आधारित है।

किन नौकरियों पर AI का सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट के अनुसार जिन नौकरियों पर AI का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है, उनमें कंप्यूटर प्रोग्रामर सबसे ऊपर हैं। इसके अलावा कस्टमर सर्विस प्रतिनिधि और डेटा एंट्री से जुड़े काम भी काफी प्रभावित माने गए हैं। डेटा एंट्री जैसे कामों में AI पहले से ही बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन कर रहा है।

किन नौकरियों पर अभी AI का असर बहुत कम

दूसरी तरफ कई नौकरियां ऐसी हैं जिन पर AI का असर लगभग नहीं के बराबर है। लगभग 30 फीसदी नौकरियों में AI का उपयोग इतना कम मिला कि उन्हें शून्य एक्सपोजर माना गया।

इनमें रसोइये, मोटरसाइकिल मैकेनिक, लाइफगार्ड, बारटेंडर, बर्तन साफ करने वाले और ड्रेसिंग रूम अटेंडेंट जैसी नौकरियां शामिल हैं। इन कामों में शारीरिक गतिविधि और इंसानी उपस्थिति ज्यादा जरूरी होती है, इसलिए AI का असर फिलहाल कम है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

रिपोर्ट कहती है कि AI अभी अपनी पूरी ताकत तक नहीं पहुंचा है। मतलब सिद्धांत के हिसाब से AI बहुत सारे काम कर सकता है, लेकिन असल में अभी उसका इस्तेमाल उन कामों के छोटे से हिस्से में ही हो रहा है। यानी AI की क्षमता बहुत ज्यादा है, लेकिन अभी कंपनियां और लोग उसे पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर रहे।

जिन नौकरियों में AI का इस्तेमाल ज्यादा हो सकता है, उन नौकरियों की भविष्य में ग्रोथ थोड़ी कम रहने का अनुमान है। अमेरिका की सरकारी एजेंसी Bureau of Labor Statistics का अनुमान है कि 2034 तक जिन नौकरियों में AI का एक्सपोजर ज्यादा है, उनमें रोजगार की बढ़ोतरी थोड़ी धीमी रह सकती है।

जिन प्रोफेशन में AI का खतरा ज्यादा है, उनमें काम करने वाले लोग आम तौर पर उम्र में थोड़े बड़े होते हैं, उनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा होती है, उनकी पढ़ाई ज्यादा होती है और उनकी सैलरी भी औसतन ज्यादा होती है। यानी यह खतरा सिर्फ लो-स्किल नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई व्हाइट-कॉलर जॉब्स भी इसमें शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अहम बात यह है कि अभी तक ऐसा कोई साफ सबूत नहीं मिला है कि AI की वजह से बड़े पैमाने पर नौकरियां जा रही हैं। 2022 के बाद से जिन नौकरियों में AI का असर ज्यादा माना जा रहा है, उनमें बेरोजगारी बढ़ने का कोई साफ ट्रेंड नहीं दिखा। हालांकि एक हल्का सा संकेत जरूर मिला है कि इन क्षेत्रों में युवा लोगों की नई भर्ती थोड़ी धीमी हो गई है।

लेखकों के बारे में

Shubham Singh Thakur
Shubham Singh Thakur is a business journalist with a focus on stock market and personal finance. An alumnus of the Indian Institute of Mass Communication (IIMC), he is passionate about making financial topics accessible and relevant for everyday readers.

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