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Bharat Bandh: 12 फरवरी को देश भर में हड़ताल का ऐलान, ट्रेड यूनियनों का दावा- 30 करोड़ मजदूर होंगे शामिल

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3 min read | अपडेटेड February 10, 2026, 13:27 IST

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सारांश

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि इस बार भागीदारी पिछले आंदोलन से भी ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी की हड़ताल में 30 करोड़ से कम मजदूर नहीं होंगे। इससे पहले 9 जुलाई 2025 को हुई हड़ताल में करीब 25 करोड़ मजदूरों ने हिस्सा लिया था।

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Strike: यूनियनों ने बताया कि देश के लगभग सभी राज्यों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए हैं।

Bharat Bandh: ट्रेड यूनियनों ने देश भर में 12 फरवरी (गुरुवार) को आम हड़ताल का ऐलान किया है। 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के एक जॉइंट प्लेटफॉर्म ने दावा किया कि इस हड़ताल में कम से कम 30 करोड़ मजदूर हिस्सा लेंगे। यूनियनों ने साफ किया है कि हड़ताल का आह्वान पूरी तरह कायम है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार की कई नीतियां मजदूर विरोधी और किसान विरोधी है, जिसके खिलाफ यह हड़ताल किया जा रहा है।
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पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि इस बार भागीदारी पिछले आंदोलन से भी ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी की हड़ताल में 30 करोड़ से कम मजदूर नहीं होंगे। इससे पहले 9 जुलाई 2025 को हुई हड़ताल में करीब 25 करोड़ मजदूरों ने हिस्सा लिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि इस बार हड़ताल का असर देश के 600 जिलों में देखने को मिलेगा, जबकि पिछले साल यह असर करीब 550 जिलों तक सीमित था। उनके मुताबिक, यह दावा जिला और ब्लॉक स्तर पर की गई मजबूत तैयारियों के आधार पर किया जा रहा है।

अमरजीत कौर ने बताया कि किसान संगठन और अन्य फेडरेशन भी ट्रेड यूनियनों के साथ खड़े हैं। बीजेपी शासित राज्यों में हड़ताल के असर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रहेंगे, जबकि अन्य राज्यों में भी आंदोलन का बड़ा असर देखने को मिलेगा।

संयुक्त मंच के बयान के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने इस हड़ताल को पूरा समर्थन दिया है और ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया है। इसी तरह कृषि मजदूर यूनियनों का संयुक्त मोर्चा भी इस हड़ताल का हिस्सा है, जिसमें मनरेगा (MGNREGA) की बहाली पर खास जोर दिया जा रहा है।

यूनियनों ने बताया कि देश के लगभग सभी राज्यों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए हैं। सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र, औद्योगिक इलाकों, गांवों और शहरों में मजदूरों, किसानों और आम लोगों के बीच प्रचार किया गया है। कई जगहों पर छात्र और युवा संगठन भी इन अभियानों में शामिल हुए हैं और आम नागरिकों ने भी हड़ताल की मांगों का समर्थन किया है।

बयान में कहा गया है कि ज्यादातर सेक्टरों और उद्योगों में हड़ताल की नोटिस दी जा चुकी है और तैयारियां पूरी तरह से चल रही हैं। ट्रेड यूनियनों की प्रमुख मांगों में चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) और उनसे जुड़े नियमों को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक, और SHANTI Act (न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा कानून) को वापस लेने की मांग की गई है।

यूनियनें मनरेगा की बहाली की भी मांग कर रही हैं और साथ ही विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 को रद्द करने की मांग कर रही हैं। इस संयुक्त मंच में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं। यूनियनों का कहना है कि यह हड़ताल मजदूरों, किसानों और आम लोगों के लिए है।

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