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  1. NPS कॉमन स्कीम और MSF में क्या हैं अंतर? चुनने से पहले किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

पर्सनल फाइनेंस

NPS कॉमन स्कीम और MSF में क्या हैं अंतर? चुनने से पहले किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड February 18, 2026, 15:55 IST

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सारांश

अगर आप NPS में नए हैं, बाजार को ज्यादा ट्रैक नहीं करना चाहते और लंबे पीरियड के लिए निवेश कर रहे हैं, तो कॉमन स्कीम पर्याप्त हो सकती है। दूसरी ओर, अगर आप बाजार की समझ रखते हैं, अलग-अलग फंड मैनेजर के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकते हैं और पोर्टफोलियो को सक्रिय रूप से मैनेज करना चाहते हैं, तो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क बेहतर विकल्प हो सकता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम

नेशनल पेंशन सिस्टम में कॉमन स्कीम और MSF में क्या अंतर हैं?

भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System, NPS) एक लोकप्रिय ऑप्शन बन चुका है। इसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा रेगुलेट किया जाता है। नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेशकों को अधिक फ्लेक्जिबिलिटी देने के लिए अलग-अलग ढांचे भी हैं, जिनमें दो प्रमुख ढांचे हैं, एक है एनपीएस के तहत कॉमन स्कीम और दूसरी है मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क। चलिए एक नजर डालते हैं कि दोनों में अंतर क्या हैं और चुनने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है-

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क्या है NPS कॉमन स्कीम?

कॉमन स्कीम पारंपरिक और सरल मॉडल है। इसमें निवेशक एक ही पेंशन फंड मैनेजर (PFM) चुनता है, जो उसके पूरे निवेश को संभालता है। यानी इक्विटी, कॉरपोरेट डेट और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज – सभी एसेट क्लास एक ही फंड मैनेजर के अधीन रहती हैं।

इस मॉडल का सबसे बड़ा फायदा है कि यह एकदम सिंपल है। निवेशक को अलग-अलग मैनेजर के प्रदर्शन पर नजर रखने की जरूरत नहीं होती। अगर फंड मैनेजर बदलना हो, तो पूरा अकाउंट एक साथ ट्रांसफर करना पड़ता है। नए या कम एक्टिव निवेशकों के लिए यह ऑप्शन सुविधाजनक माना जाता है।

क्या है NPS मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क?

मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क अपेक्षाकृत नया और फ्लेक्जिबल ढांचा है। इसमें निवेशक अलग-अलग एसेट क्लास के लिए अलग-अलग फंड मैनेजर चुन सकता है। उदाहरण के तौर पर, इक्विटी पोर्शन के लिए एक मैनेजर और डेट पोर्शन के लिए दूसरा मैनेजर चुना जा सकता है। इससे निवेशक को कस्टमाइजेशन की सुविधा मिलती है। अगर किसी फंड मैनेजर का इक्विटी में प्रदर्शन बेहतर है और किसी अन्य का डेट में, तो निवेशक दोनों का लाभ ले सकता है। हालांकि, इसमें नियमित मॉनिटरिंग और रणनीतिक फैसले लेने की जरूरत होती है।

चुनने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

कॉमन स्कीम में पूरा निवेश एक ही फंड मैनेजर के पास रहता है, जबकि MSF में एसेट क्लास के आधार पर अलग-अलग मैनेजर चुने जा सकते हैं। कॉमन स्कीम सरल और कम कॉम्प्लेक्स है, जबकि MSF ज्यादा फ्लेक्जिबिलिटी देती है, लेकिन थोड़ी कॉम्प्लेक्स हो सकती है।

कॉमन स्कीम उन लोगों के लिए बेहतर है जो ‘सेट एंड फॉरगेट’ रणनीति अपनाना चाहते हैं। वहीं MSF उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो एक्टिव रूप से पोर्टफोलियो मैनेज करना चाहते हैं और बेहतर रिटर्न के लिए रणनीति बदलने में सहज हैं।

अगर आप NPS में नए हैं, बाजार को ज्यादा ट्रैक नहीं करना चाहते और लंबे पीरियड के लिए निवेश कर रहे हैं, तो कॉमन स्कीम पर्याप्त हो सकती है। दूसरी ओर, अगर आप बाजार की समझ रखते हैं, अलग-अलग फंड मैनेजर के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकते हैं और पोर्टफोलियो को सक्रिय रूप से मैनेज करना चाहते हैं, तो मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क बेहतर विकल्प हो सकता है।

डिस्क्लेमरः आप दोनों में क्या चुनें यह आपकी जोखिम लेने की क्षमता, निवेश अवधि और सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करता है। रिटायरमेंट प्लानिंग लंबी अवधि का लक्ष्य है, इसलिए निर्णय सोच-समझकर और अपनी वित्तीय प्रोफाइल के अनुसार लेना चाहिए। यह आर्टिकल आपको दोनों के बीच अंतर समझाने के लिए लिखा गया है।
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लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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