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  1. युद्ध के हालात में क्या SIP के बजाय Step Up SIP करना रहेगा बेस्ट? समझिए पूरी गणित

पर्सनल फाइनेंस

युद्ध के हालात में क्या SIP के बजाय Step Up SIP करना रहेगा बेस्ट? समझिए पूरी गणित

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड March 12, 2026, 13:42 IST

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सारांश

क्या आपको गिरते बाजार में अपना निवेश बढ़ाना चाहिए? क्या स्टेप-अप एसआईपी युद्ध जैसे हालातों में आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है? रुपी कॉस्ट एवरेजिंग और कंपाउंडिंग की ताकत का इस्तेमाल कर आप कैसे अपनी वेल्थ को कई गुना बढ़ा सकते हैं। आज डीटेल में जानेंगे।

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शेयर बाजार की उठापटक के बीच स्टेप-अप एसआईपी कैसा ऑप्शन है?

बिहार में एक बड़ी मशहूर कहावत है कि अगर आपके पास दो विकल्प हों और आपको किसी खास स्थिति में किसी एक को चुनना हो, तो सबसे पहले यह देखना चाहिए कि कौन सा विकल्प कितना जरूरी है। आज के समय में जब दुनिया के एक हिस्से में युद्ध छिड़ा हुआ है और इसका असर ग्लोबल सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, तो हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है कि क्या उन्हें अपना निवेश जारी रखना चाहिए या उसे बढ़ा देना चाहिए। खास तौर पर SIP और स्टेप-अप एसआईपी को लेकर लोग काफी कन्फ्यूज रहते हैं। इन दोनों के बीच के बारीक अंतर को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यही आपके फ्यूचर के प्रॉफिट को तय करता है।

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एसआईपी और स्टेप-अप एसआईपी में क्या है अंतर?

SIP यानी सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान का सीधा मतलब है कि आप एक तय की हुई रकम हर महीने या हफ्ते में निवेश करते हैं। यह एक फिक्स अमाउंट होता है जो आपके बैंक अकाउंट से कटकर म्यूचुअल फंड में जाता रहता है। वहीं, स्टेप-अप एसआईपी में आप पहले से चल रही एसआईपी की रकम में कुछ पर्सेंट की बढ़ोतरी कर देते हैं। मान लीजिए कि आप हर महीने 100 रुपये की एसआईपी के जरिए 10 यूनिट खरीद रहे हैं। अब अगर आप इसमें 10 पर्सेंट का स्टेप-अप कर देते हैं, तो अगले महीने से आपकी निवेश राशि 110 रुपये हो जाएगी। इससे आपको ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी और लंबे समय में आपका फंड बहुत तेजी से ग्रो करेगा।

मार्केट की रैली और गिरावट का खेल

जब बाजार में रैली होती है और इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही होती है, तब निवेशक बहुत खुश रहते हैं क्योंकि उनका पोर्टफोलियो ग्रीन नजर आता है। ऐसे में एसआईपी करने से आपकी एवरेजिंग होती रहती है और धीरे-धीरे एक बड़ा फंड बन जाता है। लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब बाजार गिरता है। गिरते बाजार में लोग डर के मारे अपना पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। हकीकत यह है कि जब महंगाई बढ़ती है या युद्ध जैसे हालात होते हैं, तो शेयरों के दाम गिर जाते हैं। इस स्थिति में अगर आप अपनी एसआईपी जारी रखते हैं या उसमें 5 से 10 पर्सेंट का स्टेप-अप कर देते हैं, तो आपको कम पैसों में बहुत ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं।

रुपी कॉस्ट एवरेजिंग और कंपाउंडिंग का जादू

जब आप गिरते बाजार में निवेश करते हैं, तो इसे 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब मार्केट की हालत खराब होती है, तब आप सस्ती कीमतों पर ज्यादा माल (यूनिट्स) खरीद लेते हैं। जब बाजार दोबारा ऊपर जाता है, तो यही सस्ती यूनिट्स आपके मुनाफे को कई गुना बढ़ा देती हैं। इसके साथ ही कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि ब्याज का जादू भी तभी काम करता है जब आप लंबे समय तक निवेशित रहते हैं। अगर आप बीच में डरकर अपनी एसआईपी रोक देते हैं, तो आप कंपाउंडिंग का फायदा खो देते हैं। स्टेप-अप एसआईपी आपके पोर्टफोलियो को वह रफ्तार देती है जो एक साधारण एसआईपी नहीं दे पाती।

अनुशासन ही है जीत की चाबी

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर श्वेता शास्त्री का कहना है कि ऐसे अनिश्चित समय में बाजार का अंदाजा लगाने से ज्यादा आपका अनुशासन मायने रखता है। उनके मुताबिक, मार्केट की अस्थिरता आपके धैर्य की परीक्षा लेती है। जो लोग मुश्किल समय में भी अपना निवेश नहीं रोकते, वे ही अंत में पैसा बनाते हैं। गिरते बाजार में उतने ही फंड से अधिक यूनिट खरीदी जा सकती हैं, जिससे निवेश की कुल लागत कम हो जाती है। अगर आप अपनी क्षमता के अनुसार अभी थोड़ा और निवेश यानी स्टेप-अप एसआईपी करते हैं, तो यह आपके पोर्टफोलियो को साल दर साल बहुत मजबूत बना सकता है। यानी डरने के बजाय यह समय अपनी वेल्थ को बढ़ाने की दिशा में एक साहसी कदम उठाने का है।

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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