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  1. मजदूरों के बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी: अब एक साथ मिल सकेंगी दो-दो स्कॉलरशिप!

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मजदूरों के बच्चों के लिए बड़ी खुशखबरी: अब एक साथ मिल सकेंगी दो-दो स्कॉलरशिप!

Upstox

3 min read | अपडेटेड February 24, 2026, 14:27 IST

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सारांश

यह स्कॉलरशिप मेरिट पर नहीं, बल्कि जरूरत के आधार पर दी जाती है। यानी बच्चे के नंबर कितने हैं, यह नहीं देखा जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है या नहीं। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि पैसों की कमी के कारण बच्चे की पढ़ाई न छूटे।

Labour Ministry scholarship

Labour Ministry scholarship: हर साल लगभग 1 लाख छात्र इस योजना से पहले ही फायदा उठा रहे हैं।

Labour Ministry scholarship: सरकार ने छात्रों के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब जो छात्र श्रम मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) की तरफ से दी जाने वाली जरूरत आधारित स्कॉलरशिप लेते हैं, वे केंद्र या राज्य सरकार की किसी और मेरिट स्कॉलरशिप के लिए भी योग्य माने जाएंगे। पहले ऐसा नहीं था।
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श्रम मंत्रालय ने यह फैसला असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों की पढ़ाई को मजबूत करने के लिए लिया है। सरकार का कहना है कि उसका मकसद यह है कि मजदूर परिवारों के बच्चों को शिक्षा में कोई रुकावट न आए और उन्हें आगे बढ़ने के बराबर मौके मिलें।

Labour Welfare Scheme का फायदा

श्रम मंत्रालय एक खास योजना चलाता है, जिसे Labour Welfare Scheme (Education Component) कहा जाता है। इसके तहत बीड़ी मजदूरों, सिने वर्कर्स और नॉन-कोल माइंस (जैसे आयरन, मैंगनीज, क्रोम, लाइमस्टोन, डोलोमाइट और माइका माइंस) में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद दी जाती है।

यह स्कॉलरशिप मेरिट पर नहीं, बल्कि जरूरत के आधार पर दी जाती है। यानी बच्चे के नंबर कितने हैं, यह नहीं देखा जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है या नहीं। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि पैसों की कमी के कारण बच्चे की पढ़ाई न छूटे।

पहले और अभी के नियम में क्या अंतर है?

पहले नियम यह था कि अगर कोई छात्र श्रम मंत्रालय की यह स्कॉलरशिप ले रहा है, तो वह किसी दूसरी सरकारी मेरिट स्कॉलरशिप के लिए आवेदन नहीं कर सकता था। इससे कई होनहार बच्चों को नुकसान हो रहा था, क्योंकि वे अच्छे नंबर होने के बावजूद दूसरी स्कॉलरशिप नहीं ले पा रहे थे।

अब सरकार ने इस नियम में बदलाव कर दिया है। नए नियम के मुताबिक अगर कोई छात्र श्रम मंत्रालय की जरूरत आधारित स्कॉलरशिप ले रहा है और वह किसी दूसरी मेरिट आधारित स्कॉलरशिप के लिए योग्य है, तो वह उसे भी ले सकता है। यानी अब दोनों स्कॉलरशिप साथ-साथ मिल सकती हैं।

इससे किन बच्चों को होगा फायदा

सरकार का कहना है कि इस बदलाव से उन बच्चों को फायदा मिलेगा, जो मेहनती और होशियार हैं, लेकिन गरीब परिवार से आते हैं। अब सिर्फ इसलिए उनकी पढ़ाई नहीं रुकेगी कि वे पहले से किसी एक स्कीम का फायदा ले रहे हैं।

इस फैसले से खास तौर पर बीड़ी मजदूरों, सिने वर्कर्स और नॉन-कोल माइंस में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को फायदा होगा। इससे बच्चों का ड्रॉपआउट कम होगा, यानी बीच में पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी कम होगी, और वे उच्च शिक्षा तक पहुंच पाएंगे।

हर साल लगभग 1 लाख छात्र इस योजना से पहले ही फायदा उठा रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव के बाद इससे और ज्यादा छात्रों को मदद मिलेगी, यानी लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी।

अब इन मजदूरों के बच्चे बेहतर कॉलेजों और कोर्सेज में पढ़ाई कर पाएंगे, क्योंकि उन्हें ज्यादा आर्थिक मदद मिलेगी। इससे उनका भविष्य सुधरेगा, नौकरी के मौके बढ़ेंगे और लंबे समय में उनकी जिंदगी की हालत भी बेहतर होगी। यह फैसला Code on Social Security, 2020 के उद्देश्यों के बिल्कुल अनुरूप है। इस कानून का मकसद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना है, जिसमें शिक्षा भी शामिल है।

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लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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