return to news
  1. NPS Swasthya: रिटायरमेंट फंड से होगा इलाज, कैसे काम करती है नई स्कीम, क्या हैं इसके फायदे

पर्सनल फाइनेंस

NPS Swasthya: रिटायरमेंट फंड से होगा इलाज, कैसे काम करती है नई स्कीम, क्या हैं इसके फायदे

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड April 09, 2026, 18:44 IST

Twitter Page
Linkedin Page
Whatsapp Page

सारांश

NPS Swasthya: आप जो पैसा रिटायरमेंट के लिए NPS में डालते हो, उसमें से जरूरत पड़ने पर 25% तक पैसा इलाज के लिए निकाल सकते हो। यह स्कीम 18 से 85 साल के भारतीय नागरिकों के लिए खुली है, बशर्ते वे एनरोलमेंट के समय अपनी सेहत के बारे में जानकारी (हेल्थ डिक्लेरेशन) दें।

NPS Swasthya

NPS Swasthya में मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे निकालने की सुविधा दी गई है।

NPS Swasthya: रिटायरमेंट के लिहाज से नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS एक पॉपुलर स्कीम है। हालांकि अब सरकार इस स्कीम में बड़ा बदलाव कर रही है, जिसे NPS Swasthya नाम दिया गया है। अब तक NPS सिर्फ रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा करने का तरीका था। लेकिन इस नए मॉडल में एक बड़ा बदलाव ये है कि अब आप अपने NPS के पैसे का इस्तेमाल मेडिकल खर्च के लिए भी कर सकते हो।
Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

क्या है यह स्कीम

आसान शब्दों में इस स्कीम का मतलब ये है कि आप जो पैसा रिटायरमेंट के लिए NPS में डालते हो, उसमें से जरूरत पड़ने पर 25% तक पैसा इलाज के लिए निकाल सकते हो। यह स्कीम 18 से 85 साल के भारतीय नागरिकों के लिए खुली है, बशर्ते वे एनरोलमेंट के समय अपनी सेहत के बारे में जानकारी (हेल्थ डिक्लेरेशन) दें।

यह स्कीम जनवरी 2026 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य आउटपेशेंट (OPD) और इनपेशेंट (हॉस्पिटल में भर्ती) दोनों तरह के मेडिकल खर्चों के लिए वित्तीय सहायता देना है। इसमें कोई भी भारतीय नागरिक अपनी इच्छा से शामिल हो सकता है और अपनी क्षमता के अनुसार पैसा जमा कर सकता है। फिलहाल ये पूरा सिस्टम अभी टेस्ट (PoC) मोड में है, यानी सरकार देख रही है कि ये सही से काम करता है या नहीं। अगर सब ठीक रहा, तो आगे इसे बड़े स्तर पर लॉन्च किया जा सकता है।

ये कैसे काम करेगा?

आपके NPS अकाउंट में जो आपका योगदान है, उसमें से एक हिस्सा “एलिजिबल बैलेंस” माना जाएगा। उसी में से आप डिजिटल तरीके से (ऐप के जरिए) पैसे निकालकर इलाज में इस्तेमाल कर सकते हो। पैसे डिजिटल तरीके से MAven एप्लिकेशन के जरिए निकाले जा सकते हैं, जो सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) सिस्टम से जुड़ा हुआ है।

इस सिस्टम में कई कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं, जिसमें Medi Assist Healthcare Services टेक प्लेटफॉर्म दे रही है। Tata Pension Fund Management और Axis Pension Fund पैसा मैनेज कर रही हैं। इसके अलावा Aditya Birla Health Insurance हेल्थ इंश्योरेंस कवर दे रही है।

स्कीम में शामिल होने के लिए क्या करना होगा

इस स्कीम में शामिल होने के लिए कम से कम ₹25,000 का शुरुआती योगदान देना जरूरी है, जिसके बाद ही व्यक्ति इसके लाभ लेने के लिए पात्र बनता है। इसमें सब्सक्राइबर अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी राशि का योगदान कर सकता है और यह पैसा पेंशन फंड्स द्वारा Multiple Scheme Framework (MSF) के नियमों के अनुसार निवेश किया जाएगा, जिससे उस पर मार्केट के हिसाब से रिटर्न मिलता रहेगा। इस स्कीम के तहत लगने वाले सभी शुल्क और चार्जेस भी MSF के अनुसार होंगे और इन्हें स्पष्ट रूप से बताया जाएगा, जिसमें हेल्थ बेनिफिट एडमिनिस्ट्रेटर (HBA) से जुड़े शुल्क भी शामिल होंगे।

इसमें शामिल होने के लिए किसी भी भारतीय नागरिक को NPS Swasthya अकाउंट के साथ एक Common Scheme Account खोलना अनिवार्य है, यदि पहले से उपलब्ध न हो। इसके अलावा, 40 साल से अधिक उम्र के ऐसे सब्सक्राइबर जो सरकारी सेक्टर या सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों से नहीं जुड़े हैं, वे अपने कॉमन स्कीम अकाउंट से 30% तक का योगदान इस हेल्थ स्कीम में ट्रांसफर कर सकते हैं।

इसका फायदा क्या है?

भारत में हेल्थकेयर बहुत महंगा होता जा रहा है। इसका खर्च 2026 में 11–14% तक बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में यह स्कीम आपको रिटायरमेंट सेविंग + हेल्थ सिक्योरिटी दोनों एक साथ देने की कोशिश करती है।

NPS Swasthya में मेडिकल जरूरतों के लिए पैसे निकालने की सुविधा दी गई है, जिसके तहत सब्सक्राइबर अपने खुद के योगदान का 25% तक किसी भी समय निकाल सकता है, चाहे खर्च OPD का हो या हॉस्पिटल में भर्ती का। इस निकासी पर कोई वेटिंग पीरियड नहीं है, लेकिन पहली बार निकासी करने से पहले अकाउंट में कम से कम ₹50,000 का कॉर्पस होना जरूरी है।

अगर 25 परसेंट से ज्यादा पैसों की जरूरत हो तो?

अगर किसी एक मेडिकल केस में खर्च इतना ज्यादा हो जाए कि वह 25% की लिमिट से अधिक हो, तो सब्सक्राइबर को पूरी रकम यानी 100% कॉर्पस निकालने की अनुमति दी गई है, लेकिन यह केवल मेडिकल जरूरत के लिए ही संभव होगा।

इस स्कीम के तहत क्लेम सेटलमेंट का प्रोसेस भी इसी तरह काम करता है, जिसमें निकासी या एग्जिट की राशि सीधे अस्पताल या संबंधित एडमिनिस्ट्रेटर को भेजी जाती है और वही मेडिकल बिल का भुगतान करता है। इससे सिस्टम को कैशलेस बनाने की कोशिश की गई है और पैसे के गलत इस्तेमाल की संभावना कम होती है।

यहां यह समझना जरूरी है कि बार-बार मेडिकल जरूरतों के लिए पैसा निकालने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाला फंड कम हो सकता है, इसलिए इस स्कीम का उपयोग करते समय शॉर्ट टर्म जरूरतों और लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

अगला लेख