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  1. बच्चे के नाम पर खोलना चाहते हैं बैंक अकाउंट? किसका होता है कंट्रोल, टैक्स के क्या हैं नियम

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बच्चे के नाम पर खोलना चाहते हैं बैंक अकाउंट? किसका होता है कंट्रोल, टैक्स के क्या हैं नियम

Upstox

3 min read | अपडेटेड April 10, 2026, 18:19 IST

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सारांश

भले ही यह सेविंग अकाउंट जैसा ही दिखता है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं होती हैं। जब गार्जियन अकाउंट चला रहा होता है, तो यह माना जाता है कि पैसे बच्चे के फायदे के लिए ही निकाले जाएंगे, भले ही हर बार इसकी जांच न हो।

Minor Bank Account

ज्यादातर लोगों को माइनर बैंक अकाउंट से जुड़े नियमों की जानकारी नहीं है।

Minor Bank Account: आज के समय में बच्चों को पैसों की समझ होना बेहद जरूरी है। इसे ध्यान में रखते हुए पैरेंट्स अब कम उम्र में ही बच्चे के लिए बैंक अकाउंट खोल रहे हैं। इससे बच्चे को बचत की आदत बनती है और धीरे-धीरे उसके फ्यूचर के लिए एक छोटा फंड भी तैयार होता है। हालांकि ज्यादातर लोगों को इस बैंक अकाउंट से जुड़े नियमों की जानकारी नहीं है। अगर आप अपने बच्चे के लिए अकाउंट खोलने जा रहे हैं तो आपको पहले इससे जुड़ी तमाम चीजों को समझ लेना चाहिए।
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कहां खोला जा सकता है अकाउंच

लगभग सभी बड़े बैंकों में बच्चे के लिए अकाउंट खोलने की सुविधा उपलब्ध है। इनमें SBI, HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank जैसे बैंक शामिल हैं।

पैसे निकालने पर पूरी आजादी नहीं होती

भले ही यह सेविंग अकाउंट जैसा ही दिखता है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं होती हैं। जब गार्जियन अकाउंट चला रहा होता है, तो यह माना जाता है कि पैसे बच्चे के फायदे के लिए ही निकाले जाएंगे, भले ही हर बार इसकी जांच न हो। अगर बच्चा खुद अकाउंट चला रहा है, तो भी पैसे निकालने या खर्च करने की एक लिमिट होती है, जो बैंक तय करता है। इसका मकसद गलत इस्तेमाल से बचाव करना होता है।

गार्जियन के पास होता है कंट्रोल

RBI के नियम के अनुसार अगर बच्चे की उम्र 10 साल से कम है तो अकाउंट पूरी तरह से माता-पिता या गार्जियन चलाते हैं। अकाउंट बच्चे के नाम पर होता है, लेकिन असली कंट्रोल गार्जियन के पास रहता है। 10 साल से 18 साल के बच्चों को सीमित तौर पर अकाउंट इस्तेमाल करने की अनुमति मिल जाती है। इस दौरान बच्चा डेबिट कार्ड या पासबुक के जरिए बेसिक ट्रांजैक्शन कर सकता है, लेकिन यह सब बैंक द्वारा तय लिमिट के अंदर होता है।

कब मिलता है बच्चे को कंट्रोल

जैसे ही बच्चा 18 साल का हो जाता है, यह अकाउंट एक सामान्य सेविंग अकाउंट में बदल जाता है। इसके लिए बैंक नए KYC डॉक्यूमेंट्स और कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करवाता है। इसके बाद अकाउंट का पूरा कंट्रोल बच्चे (अब वयस्क) के पास चला जाता है और गार्जियन की कोई भूमिका नहीं रहती।

टैक्स से जुड़ा नियम

माइनर अकाउंट में मिलने वाला ब्याज या कोई भी इनकम सीधे बच्चे की नहीं मानी जाती। यह आमतौर पर माता-पिता की इनकम में जोड़ दी जाती है, खासकर उस पैरेंट की जिसकी कमाई ज्यादा होती है। हालांकि इसमें एक छोटी सी टैक्स छूट मिलती है, लेकिन उसके बाद यह इनकम टैक्सेबल हो जाती है।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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