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ITR-V फॉर्म क्या होता है? सिर्फ 30 दिन में नहीं किया ये काम तो बेकार जाएगी आपकी सारी मेहनत

Upstox

4 min read | अपडेटेड April 09, 2026, 13:50 IST

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सारांश

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना जितना जरूरी है, उतना ही उसका वेरिफिकेशन भी आवश्यक है। यदि आप आईटीआर अपलोड करने के बाद उसे वेरिफाई नहीं करते हैं, तो विभाग उसे अमान्य मान लेता है। आयकर विभाग अब वेरिफिकेशन के लिए सिर्फ 30 दिनों का समय देता है, जिसके बाद रिटर्न फाइल नहीं माना जाता।

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इनकम टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आईटीआर-वी फॉर्म जरूरी है।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग स्टार्ट हो गई है। अगर आप भी अपना आईटीआर फाइल करने की तैयार कर रहे हैं, तो अभी ITR-V Form के बारे में डीटेल जान लीजिए, क्योंकि फॉर्म अपलोड करने के बाद हुई ये छोटी गलती आपका नुकसान करा सकता है। इनकम टैक्स विभाग के नियमों के मुताबिक, अगर आपने रिटर्न भर दिया है लेकिन उसे समय रहते वेरिफाई नहीं किया, तो उसे अमान्य यानी इनवैलिड करार दे दिया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि कानून की नजर में आपने अपना रिटर्न भरा ही नहीं है। इसलिए आईटीआर-वी फॉर्म की अहमियत को समझना और इसे सही तरीके से जमा करना आपके टैक्स के सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

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आईटीआर-वी की अहमियत?

ITR-V Form का आसान शब्दों में मतलब है 'इनकम टैक्स रिटर्न वेरिफिकेशन'। यह महज एक पन्ने का कागजात होता है जो इस बात का सबूत है कि आपने ऑनलाइन जो भी डेटा दिया है, वह पूरी तरह सही है और आप उसकी जिम्मेदारी लेते हैं। जब आप अपना रिटर्न ई-फाइल करते हैं और उसे तुरंत इलेक्ट्रॉनिक तरीके से वेरिफाई नहीं कर पाते, तब आपको इस फॉर्म की जरूरत पड़ती है। आयकर विभाग आपको दो तरह के विकल्प देता है। पहला डिजिटल सिग्नेचर है और दूसरा ई-वेरिफिकेशन है, जो आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है। अगर आप इनमें से किसी भी डिजिटल तरीके का इस्तेमाल कर लेते हैं, तो आपको किसी भी तरह की फिजिकल कॉपी भेजने की जरूरत नहीं होती।

किसे पड़ती है फिजिकल फॉर्म भेजने की जरूरत?

आजकल ज्यादातर काम डिजिटल हो गए हैं, लेकिन फिर भी कुछ लोगों के लिए फिजिकल आईटीआर-वी भेजना जरूरी होता है। इसमें वे लोग शामिल हैं जिनके पास डिजिटल सिग्नेचर नहीं है या जिनका मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है, जिसकी वजह से उनके पास ओटीपी नहीं आ पाता। इसके अलावा देश के कई सीनियर सिटीजन जो नई टेक्नोलॉजी के साथ उतने सहज नहीं हैं, वे भी आज भी हाथों से साइन करके फॉर्म भेजना ज्यादा पसंद करते हैं। कंपनियों और उन प्रोफेशनल्स के लिए जिनके बिजनेस का ऑडिट होना अनिवार्य होता है, उनके लिए डिजिटल सिग्नेचर जरूरी है, इसलिए उन्हें इस फिजिकल फॉर्म की कोई जरूरत नहीं पड़ती है।

30 दिन का कड़ा नियम?

इनकम टैक्स विभाग ने हाल के सालों में अपने नियमों में काफी बदलाव किए हैं। पहले वेरिफिकेशन के लिए टैक्सपेयर्स को 120 दिनों का लंबा समय दिया जाता था, लेकिन अब इस समय को बहुत कम कर दिया गया है। वर्तमान नियमों के हिसाब से अब आपको अपना रिटर्न अपलोड करने के सिर्फ 30 दिनों के भीतर ही उसे वेरिफाई करना होगा। अगर आप इन 30 दिनों के अंदर आधार ओटीपी से वेरिफिकेशन नहीं करते हैं या फॉर्म की साइन की हुई कॉपी बेंगलुरु नहीं भेजते हैं, तो आपकी पूरी मेहनत बेकार जा सकती है। ऐसे में आपके रिटर्न को फाइल नहीं किया गया माना जाएगा और आपको लेट फीस या पेनाल्टी भी भरनी पड़ सकती है।

फॉर्म भेजने का सही तरीका क्या है?

अगर आप ऑनलाइन वेरिफिकेशन नहीं कर पा रहे हैं, तो आपको कुछ जरूरी स्टेप्स फॉलो करने होंगे। सबसे पहले इनकम टैक्स के पोर्टल से अपना आईटीआर-वी फॉर्म डाउनलोड करें। यह फाइल पासवर्ड से लॉक होती है, जिसे खोलने के लिए आपको अपना पैन नंबर और अपनी जन्मतिथि का इस्तेमाल करना होगा।

इसका साफ प्रिंटआउट निकालें और बॉक्स के अंदर अपनी नीली स्याही वाले पेन से साइन करें। याद रखें कि विभाग कूरियर से भेजे गए फॉर्म को स्वीकार नहीं करता है। आपको यह फॉर्म केवल साधारण डाक या स्पीड पोस्ट के जरिए ही बेंगलुरु भेजना होगा। इसका पता है- 'सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (सीपीसी), इनकम टैक्स विभाग, बेंगलुरु, कर्नाटक - 560500'।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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